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राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में NDA का क्लीन स्वीप, ओडिशा में उलटफेर, हरियाणा में विवादित नतीजे आए सामने
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, March 17, 2026
Last Updated On: Tuesday, March 17, 2026
Rajya Sabha Elections 2026: राज्यसभा चुनाव 2026 में 10 राज्यों की 37 सीटों पर दिलचस्प नतीजे सामने आए. बिहार में NDA ने सभी पांच सीटें जीतीं, ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग से बीजेपी को फायदा मिला, जबकि हरियाणा में विवाद के बाद नतीजे देर से आए. कई राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध भी चुने गए.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, March 17, 2026
Rajya Sabha Elections 2026: देश के 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए चुनाव ने इस बार कई दिलचस्प राजनीतिक संकेत दिए. जहां एक तरफ 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए, वहीं 11 सीटों पर मुकाबला हुआ. इन चुनावों में बिहार, ओडिशा और हरियाणा सबसे ज्यादा चर्चा में रहे, क्योंकि यहां वोटिंग के जरिए नतीजे तय हुए और सियासी रणनीतियों का खुला खेल देखने को मिला.
बिहार में NDA का दबदबा, पांचों सीटों पर जीत
बिहार के चुनाव इस बार सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर कब्जा कर लिया. नीतीश कुमार, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार ने जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा.
NDA को अपने सभी 202 विधायकों का समर्थन मिला, जिससे जीत का रास्ता आसान हुआ. नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले, जबकि उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 42-42 वोट प्राप्त हुए.
पांचवीं सीट पर पलटा खेल
बिहार की पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक रहा. महागठबंधन के अमरेंद्र धारी सिंह को पहले वरीयता में ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन बाद में NDA के शिवेश कुमार ने दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर जीत दर्ज कर ली.
शिवेश कुमार को कुल 4202 वोट वैल्यू मिली, जबकि अमरेंद्र धारी सिंह 3700 पर रह गए. इस हार की मुख्य वजह महागठबंधन के चार विधायकों का मतदान से दूर रहना रहा. अगर ये वोट पड़ते, तो परिणाम अलग हो सकता था.
ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग का असर
ओडिशा में चार सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी ने दो सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. इस जीत के पीछे बीजेडी और कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस-वोटिंग अहम रही.
बीजेपी के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत हासिल की, जबकि दिलीप राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी रहे. बीजेडी के संतृप्त मिश्रा ने भी अपनी सीट बचा ली. यह नतीजा दिखाता है कि अंदरूनी असंतोष चुनाव परिणाम बदल सकता है.
हरियाणा में विवाद और देर से आए नतीजे
हरियाणा में चुनाव के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया. मतपत्र की गोपनीयता को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप चले, जिससे मतगणना करीब 5 घंटे तक रुक गई.
चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद कुछ वोटों को मान्य और कुछ को अमान्य घोषित किया गया. आखिरकार देर रात नतीजे आए, जिसमें कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और बीजेपी के संजय भाटिया ने जीत दर्ज की.
सात राज्यों में बिना मुकाबले जीत
असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कुल 26 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. इन राज्यों में अभिषेक मनु सिंघवी, तिरुचि शिवा, बाबुल सुप्रियो और विनोद तावड़े जैसे बड़े नाम शामिल रहे.
नतीजों का संदेश
इन चुनावों ने साफ कर दिया कि जहां NDA की रणनीति मजबूत है, वहीं विपक्ष कई जगह बिखरा हुआ नजर आया. बिहार में एकजुटता, ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग और हरियाणा में विवाद- ये सभी संकेत देते हैं कि आने वाले समय में राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है.
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