बंगाल की राजनीति में भूचाल, ओवैसी ने तोड़ा गठबंधन, हुमायूं कबीर को झटका, AIMIM अब अकेले लड़ेगी चुनाव
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, April 10, 2026
Last Updated On: Friday, April 10, 2026
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ, जब असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया. एक विवादित वीडियो के बाद लिया गया यह फैसला AIMIM की नई रणनीति को दिखाता है. अब पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, April 10, 2026
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति ने अचानक नया मोड़ ले लिया है. असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब चुनावी माहौल पूरी तरह गरम है और हर पार्टी अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी है. ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने साफ कर दिया है कि अब वह बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी. इस कदम को सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि पार्टी अपनी अलग पहचान और स्वतंत्र रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है.
विवादित वीडियो बना गठबंधन टूटने की वजह
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ एक कथित वायरल वीडियो है, जिसमें हुमायूं कबीर कुछ ऐसे बयान देते नजर आए, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई. इस वीडियो के सामने आने के बाद AIMIM ने तुरंत दूरी बना ली. पार्टी का कहना है कि वह किसी भी ऐसे बयान या गतिविधि का समर्थन नहीं कर सकती, जिससे समाज के किसी वर्ग, खासकर मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे. ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए साफ किया कि उनकी पार्टी अब किसी भी कीमत पर ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी, जो उनके मूल सिद्धांतों के खिलाफ जाता हो.
विपक्ष के आरोप और बढ़ता राजनीतिक बवाल
इस मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब तृणमूल कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस वीडियो को सार्वजनिक किया और गंभीर आरोप लगाए. पार्टी ने दावा किया कि कबीर के कथित संबंध भाजपा नेताओं से हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने के लिए रणनीति बनाई थी. इस पूरे मामले में शुभेंदु अधिकारी और हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के नाम भी सामने आए, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया. जांच की मांग भी उठने लगी, जिससे यह मुद्दा सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक लड़ाई का बड़ा केंद्र बन गया.
AIMIM की नई रणनीति और चुनावी असर
गठबंधन टूटने के बाद अब AIMIM ने साफ कर दिया है कि वह बंगाल में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी और किसी अन्य पार्टी के साथ समझौता नहीं करेगी. पार्टी का फोकस खासतौर पर उन वर्गों पर रहेगा, जो खुद को उपेक्षित और हाशिए पर महसूस करते हैं. इस फैसले का सीधा असर राज्य की चुनावी गणित पर पड़ सकता है, क्योंकि अल्पसंख्यक वोट बैंक में बंटवारा होने की संभावना बढ़ गई है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नए राजनीतिक समीकरण से किसे फायदा मिलता है और किसे नुकसान. बंगाल की सियासत अब पहले से ज्यादा दिलचस्प और अप्रत्याशित हो गई है.
यह भी पढ़ें :- UP Politics: यूपी में AIMIM का बड़ा अभियान, एक लाख सदस्य जोड़ने की तैयारी, सपा बीजेपी की बढ़ेगी मुश्किलें













