Special Coverage
जिहादी असीम मुनीर के हाथ में आया पाकिस्तान का परमाणु बटन, पहला CDF बनते ही बदल गया सत्ता संतुलन
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, December 6, 2025
Last Updated On: Saturday, December 6, 2025
पाकिस्तान में सत्ता का असली नियंत्रण अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, क्योंकि फील्ड मार्शल असीम मुनीर देश के पहले CDF बनने के साथ पूरे सैन्य ढांचे और परमाणु कमांड के सबसे बड़े फैसलों के केंद्र में आ गए हैं. राजनीतिक अस्थिरता से घिरे पाकिस्तान में उनका बढ़ता प्रभाव न सिर्फ घरेलू सत्ता संतुलन को बदल रहा है बल्कि भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया के लिए नई रणनीतिक चिंताएं भी पैदा कर रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, December 6, 2025
CDF की कुर्सी: पाकिस्तान का नया सुपर-पॉवर सेंटर
पाकिस्तान में CDF का पद अभी हाल ही में बनाया गया है और यह इतना ताकतवर है कि सैन्य कमांड की पूरी चेन सीधे इसी पद पर आकर टिक जाती है. यह रैंक तीनों सैन्य सेवाओं का एकीकृत नेतृत्व संभालती है. सबसे खास बात CDF के पास नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का नियंत्रण भी आ गया है, जो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम को संचालित करता है. यानी अब परमाणु बटन, आखिरी फैसले और हथियारों की अनुमति सब कुछ सीधा असीम मुनीर के हाथ में है.
कैसे बने असीम मुनीर पाकिस्तान के पहले CDF?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को असीम मुनीर का नाम सुझाया. कई दिनों की अंदरूनी खींचतान के बाद आखिरकार राष्ट्रपति ने मंजूरी दी और फील्ड मार्शल मुनीर को पाकिस्तान का पहला CDF नियुक्त कर दिया गया. दिलचस्प बात यह है कि असीम मुनीर पहले ही आर्मी चीफ के पद पर थे. अब दोनों पद एक ही व्यक्ति को मिलने के बाद उनके पास पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली की पूर्ण कमान आ गई है. उनका कार्यकाल अगले पांच साल के लिए तय कर दिया गया है और उम्मीद है कि यह अवधि और बढ़ भी सकती है.
एक साथ दो कुर्सियां: अब तक का सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारी
असीम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास में पहले ऐसे सैन्य अधिकारी बन गए हैं, जिनके पास एक साथ फील्ड मार्शल, COAS और CDF जैसी तीन-तीन अतिशक्तिशाली भूमिकाएं हैं. इससे पहले सिर्फ अयूब खान को फील्ड मार्शल बनाया गया था. CDF का पद मिलने के बाद मुनीर अब किसी भी मुकदमे, कानूनी कार्रवाई या सरकारी हस्तक्षेप से लगभग पूर्णतः मुक्त माने जाएंगे. उन्हें राष्ट्रपति जैसा सुरक्षा कवच मिल गया है. इतना ही नहीं, CDF बनने के बाद अब वे वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति की सिफारिश भी खुद करेंगे, जो पहले राजनीतिक नेतृत्व के अधिकार में था.
परमाणु हथियारों की चाबी: भारत और क्षेत्र के लिए नई चुनौती?
CDF बनने के साथ असीम मुनीर के पास पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का सीधा नियंत्रण आ गया है.
यह बदलते माहौल में भारत के लिए विशेष चिंता का विषय हो सकता है. पाकिस्तान में अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और आंतरिक सत्ता संघर्ष के समय ऐसे निर्णय लेने की शक्ति का होना बहुत संवेदनशील स्थिति पैदा करता है. कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर अब परमाणु नीति से लेकर मिसाइल परीक्षण तक हर निर्णय पर अंतिम हस्ताक्षर करेंगे. ऐसे में अगर राजनीति और सेना के बीच किसी मामले को लेकर तनाव बढ़ता है, तो फैसला करने वाला एकमात्र व्यक्ति वही होंगे.
संविधान में बदलाव: सेना का प्रभाव और बढ़ा
CDF का पद बनाने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने संविधान में संशोधन किया, जिसका विपक्ष ने खुलकर विरोध किया. उनका आरोप है कि इससे सेना का हस्तक्षेप और बढ़ जाएगा और नागरिक सरकार की शक्तियां कम हो जाएंगी. हकीकत यह है कि इस संशोधन के बाद सरकार की सैन्य नियुक्तियों में भूमिका बेहद सीमित हो गई है. मुनीर अब बिना तख्तापलट किए ही पाकिस्तान की सत्ता के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं एक तरह से छिपे हुए शासक की तरह.
क्या बदलेगा पाकिस्तान का राजनीतिक और सैन्य भविष्य?
असीम मुनीर की बढ़ती ताकत पाकिस्तान की राजनीति को अगले कई वर्षों तक प्रभावित करेगी.
एक तरफ सेना की संपूर्ण कमान एक व्यक्ति में सिमट गई है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन दूसरी ओर सत्ता का केंद्रीकरण बेहद खतरनाक भी साबित हो सकता है. पाकिस्तान के इतिहास में ऐसे कई मौके रहे हैं जब शक्तिशाली सैन्य अधिकारी देश की राजनीतिक दिशा तय करते रहे हैं. मुनीर के पास अब कानून, रक्षा और रणनीतिक फैसलों पर पहले से कहीं ज्यादा अधिकार है. इससे अंदरूनी राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय नीति तक, दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
निष्कर्ष: पाकिस्तान का भविष्य अब एक व्यक्ति की मुट्ठी में
CDF बनने के बाद फील्ड मार्शल असीम मुनीर के हाथ में पाकिस्तान की सबसे बड़ी और खतरनाक शक्ति आ चुकी है. राजनीतिक अस्थिरता झेल रहे पाकिस्तान में एक व्यक्ति का इतने बड़े सैन्य ढांचे पर नियंत्रण क्षेत्रीय संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है. खासकर जब मामला परमाणु हथियारों जैसा संवेदनशील हो, तो पूरे दक्षिण एशिया की नजरें मुनीर के हर कदम पर टिकी रहना लाजिमी है.
यह भी पढ़ें :- Russia-Ukraine War: ड्रोन हमले से चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त, रेडिएशन फैलने का खतरा मंडराया















