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Trump Tariffs: भारत पर फिर टैरिफ का खतरा, ट्रंप की नई व्यापारिक रणनीति से बढ़ी चिंता, 60 देशों पर अमेरिका की नजर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, June 3, 2026
Last Updated On: Wednesday, June 3, 2026
Trump Tariffs: अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी एजेंसी का आरोप है कि ये देश जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं. यह प्रस्ताव भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच आया है, जिससे व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, June 3, 2026
Trump Tariffs: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन अब एक नया विवाद दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर असर डाल सकता है. अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों ने कथित तौर पर जबरन श्रम से तैयार उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं. ऐसे में अमेरिका अब अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है.
क्या है अमेरिका का नया आरोप?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का कहना है कि कई देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार और उद्योग के लिए नुकसानदायक साबित हो रही हैं. एजेंसी के अनुसार, जबरन श्रम से बने उत्पाद वैश्विक बाजार में कम कीमत पर पहुंच जाते हैं, जिससे उन कंपनियों को नुकसान होता है जो नियमों का पालन करते हुए उत्पादन करती हैं. अमेरिका का तर्क है कि इससे उसके श्रमिकों और उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.
भारत समेत कई बड़े देश सूची में शामिल
इस प्रस्तावित कार्रवाई की सूची में केवल भारत ही नहीं बल्कि चीन, बांग्लादेश, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं. इससे स्पष्ट है कि अमेरिका इस मुद्दे को केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं मान रहा, बल्कि इसे वैश्विक व्यापार से जुड़ा मामला बता रहा है.
हालांकि रिपोर्ट में पाकिस्तान का नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया है, जिसके चलते यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या कुछ देशों को इस कार्रवाई से राहत मिल सकती है. फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है.
कितना लग सकता है अतिरिक्त शुल्क?
अमेरिका ने प्रस्ताव रखा है कि जिन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए हैं या प्रतिबद्धता दिखाई है, उन पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है. वहीं अन्य देशों के लिए यह दर 12.5 प्रतिशत तक हो सकती है. इसके अलावा कपड़ा और परिधान उद्योग से जुड़े कुछ आयातों के लिए अलग व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है.
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो कई देशों के निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
मार्च से चल रही थी जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी, जब अमेरिकी एजेंसी ने जांच शुरू की. जांच के दौरान विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए. साथ ही सैकड़ों लिखित सुझाव और टिप्पणियां भी प्राप्त हुईं. इन्हीं जानकारियों के आधार पर एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है.
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या होगा असर?
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें जारी हैं. दोनों देशों के अधिकारी कई दौर की बातचीत कर चुके हैं और बाजार पहुंच, कृषि, डिजिटल व्यापार तथा शुल्क जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाते हैं तो बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. हालांकि दोनों देशों ने अब तक आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई है.
अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
व्यापारिक मतभेदों के बावजूद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है. दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार 120 अरब डॉलर से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है. यही वजह है कि किसी भी नए टैरिफ या व्यापारिक प्रतिबंध का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर महसूस किया जा सकता है.
अभी अंतिम फैसला बाकी
फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है. अमेरिकी एजेंसी ने 6 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जबकि 7 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई होगी. इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
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