ग्रीनलैंड पर ट्रंप का यू-टर्न: टैरिफ धमकी से डील डिप्लोमेसी तक

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Thursday, January 22, 2026

Last Updated On: Thursday, January 22, 2026

ग्रीनलैंड विवाद: ट्रंप ने टैरिफ धमकी वापस ली और डील कूटनीति अपनाई.
ग्रीनलैंड विवाद: ट्रंप ने टैरिफ धमकी वापस ली और डील कूटनीति अपनाई.

दावोस से एक सकारात्मक संदेश मिल रहा है कि ट्रंप फिलहाल टैरिफ और धमकी की राजनीति से पीछे हटे हैं, लेकिन उनकी शैली और सोच में मूलभूत बदलाव नहीं आया है. ग्रीनलैंड पर समझौते की बात ने संकट को टाल जरूर दिया है पर खत्म नहीं हुआ है.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Thursday, January 22, 2026

Trump on Greenland: दावोस की बर्फ़ीली वादियों में इस बार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय विवादों पर भी चर्चा हुई. यहां अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में दशकों की सबसे गहरी दरार को भरने का प्रयास हुआ. इसका असर भी साफ दिखा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए आक्रामक रुख से अचानक कदम पीछे खींच लिया. उन्होंने न सिर्फ टैरिफ की धमकियों को स्थगित किया, बल्कि यह संकेत भी दिया कि डेनमार्क और नाटो सहयोगियों के साथ किसी ‘दीर्घकालिक डील’ का फ्रेमवर्क तैयार हो चुका है.

दावोस आने से पहले ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ, दबाव और यहां तक कि बल प्रयोग तक के संकेत देकर नाटो गठबंधन को हिला दिया था. लेकिन आगे ही दिन दावोस में तस्वीर कुछ और ही नज़र आई.

नाटो प्रमुख से मुलाकात के बाद बदली तस्वीर

स्विट्ज़रलैंड के अल्पाइन रिसॉर्ट में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे से मुलाकात के बाद ट्रंप का रुख नाटकीय रूप से बदल गया है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर एक ऐसी डील संभव है, जिससे हर कोई खुश होगा. खासतौर पर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के मसले पर.

ट्रंप के मुताबिक यह समझौता अमेरिका की गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली, आर्कटिक में सामरिक बढ़त और चीन–रूस की बढ़ती मौजूदगी पर लगाम लगाने की जरूरतों को पूरा करेगा. उन्होंने दावा किया कि यह हमेशा के लिए चलने वाली डील होगी.

वहीं, नाटो महासचिव रुट्टे ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता या उसके डेनमार्क से अलग होने जैसे सवाल उनकी बातचीत का हिस्सा नहीं थे. उनका ज़ोर केवल आर्कटिक क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा पर था.

क्यों पीछे हटे ट्रंप?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न कई दबावों का नतीजा है. एक तरफ यूरोपीय सहयोगियों की नाराज़गी और नाटो के भीतर बढ़ता अविश्वास, तो दूसरी ओर वैश्विक बाज़ारों में बेचैनी. ग्रीनलैंड पर कड़े बयानों के बाद वॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट देखी गई थी.

जैसे ही ट्रंप ने बल प्रयोग से इनकार किया और टैरिफ स्थगित करने का एलान किया, शेयर बाज़ार में तेज़ उछाल आया. यह संकेत था कि वित्तीय बाज़ार ट्रंप की ‘डील डिप्लोमेसी’ को आक्रामक राष्ट्रवाद से ज़्यादा पसंद कर रहे हैं.

डेनमार्क की दो टूक: संप्रभुता और आत्मनिर्णय से समझौता नहीं

डेनमार्क ने पूरे घटनाक्रम पर संतुलित लेकिन सख़्त रुख अपनाया है. विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने साफ कहा कि इस मुद्दे को सोशल मीडिया या सार्वजनिक दबाव के ज़रिए नहीं, बल्कि शांत कूटनीति से सुलझाया जाना चाहिए.

उन्होंने दोहराया कि डेनमार्क की संप्रभुता, ग्रीनलैंड की क्षेत्रीय अखंडता और वहां के लोगों का आत्मनिर्णय सर्वोपरि है. ग्रीनलैंड सरकार ने फिलहाल कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन इससे पहले वहां के नेता साफ कर चुके हैं कि ‘ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है.’

डोनाल्ड ट्रंप की वही पुरानी शैली

हालांकि ट्रंप ने धमकियों से कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन उनका अंदाज़ वही पुराना रहा. दावोस में अपने भाषण के दौरान उन्होंने यूरोप को कमजोर सहयोगी बताते हुए पवन ऊर्जा, इमिग्रेशन, पर्यावरण नीति और रक्षा खर्च जैसे मुद्दों पर तीखी फटकार लगाई.

डेनमार्क को उन्होंने ‘अकृतज्ञ’ कहा. उन्होंने पूरे विवाद को ‘बर्फ के एक टुकड़े पर छोटी सी मांग’ बताकर कमतर आंकने की कोशिश की. यहां तक कि भाषण के दौरान वे चार बार ग्रीनलैंड को आइसलैंड कह बैठे. इससे हॉल में असहज मुस्कान और खामोशी फैल गई.

  • ट्रंप ने डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड पर अपना रुख बदला.
  • विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति का धमकी देने और फिर पीछे हटने का इतिहास रहा है.
  • वॉशिंगटन का कहना है कि ग्रीनलैंड पर एक मजबूत डील होने वाली है.
  • नाटो महासचिव रुट्टे ने कहा कि ट्रंप के साथ ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर चर्चा नहीं हुई. ट्रंप आर्कटिक सुरक्षा पर ध्यान दे रहे थे.

असली चिंता आर्कटिक है

ट्रंप प्रशासन के लिए ग्रीनलैंड केवल एक द्वीप नहीं है. ग्रीनलैंड ट्रंप के आर्कटिक रणनीति का अहम मोहरा भी है. पिघलती बर्फ़, नए समुद्री मार्ग और दुर्लभ खनिजों ने इस क्षेत्र को वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बना दिया है.

नाटो और अमेरिका दोनों को आशंका है कि रूस और चीन यहां आर्थिक और सैन्य पकड़ मज़बूत करना चाहते हैं. इसी संदर्भ में प्रस्तावित डील को सामूहिक सुरक्षा समझौते के रूप में देखा जा रहा है.

विरासत की तलाश में ट्रंप

सूत्रों के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का ज़ोर केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा है. 1959 में अलास्का और हवाई के राज्य बनने के बाद अमेरिका के क्षेत्रीय विस्तार जैसा बड़ा कदम उनके नाम दर्ज हो, यह इच्छा ट्रंप की सोच में अहम भूमिका निभा रही है.

हालांकि दावोस में उनके बदले रुख ने फिलहाल टकराव को टाल दिया है. लेकिन यह सवाल अब भी खड़ा है कि ट्रंप की कथित डील कितनी ठोस होगी? क्या इससे यूरोप – अमेरिका रिश्तों में आई दरार पूरी तरह भर पाएगी?

ट्रांसअटलांटिक रिश्तों की असली परीक्षा अब बंद कमरों में होने वाली कूटनीतिक बातचीत में होगी. उस बंद कमरे में तय होगा कि आर्कटिक सहयोग साझा सुरक्षा की कहानी बनेगा या फिर अगला भू-राजनीतिक संघर्ष क्षेत्र.

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गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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