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12 सीटों पर बवाल, 14 हजार पुलिस तैनात… PoK में चुनाव या इस्लामाबाद की सत्ता बचाने की जंग?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, July 27, 2026
Last Updated On: Monday, July 27, 2026
PoK Elections 2026: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव भारी सुरक्षा और राजनीतिक तनाव के बीच हो रहे हैं. 12 रिफ्यूजी सीटों को लेकर विरोध तेज है, जबकि 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. PTI ने चुनाव का बहिष्कार किया है और भारत इन चुनावों को अवैध मानता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, July 27, 2026
PoK Elections 2026: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 27 जुलाई से विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं, जब पिछले दो महीनों से क्षेत्र लगातार विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और राजनीतिक तनाव का सामना कर रहा है. हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पंजाब प्रांत से 14 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. चुनाव 27 जुलाई, 2 अगस्त और 10 अगस्त को तीन चरणों में कराए जा रहे हैं. PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं. पहले चरण में मीरपुर, दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद और तीसरे चरण में पुंछ डिवीजन की सीटों पर मतदान कराया जाएगा.
12 रिफ्यूजी सीटें बनीं सबसे बड़ा विवाद
इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा 12 रिफ्यूजी सीटें हैं. ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बस गए थे. स्थानीय संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद PoK की राजनीति और सरकार पर अपना प्रभाव बनाए रखता है. संगठन लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है. इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जो कई स्थानों पर हिंसक भी हो गए. झड़पों में सुरक्षाकर्मियों सहित कई लोगों की जान गई, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया.
हिंसा की आशंका के बीच कड़ी निगरानी
चुनाव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. तैनात किए गए अतिरिक्त पुलिस बल में करीब 30 प्रतिशत जवान हथियारों से लैस हैं, जबकि बाकी दंगा-रोधी उपकरणों के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात किए गए हैं. कई स्थानों पर कड़ी निगरानी, बैरिकेडिंग और आवाजाही पर नियंत्रण रखा गया है. प्रशासन का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है, जबकि स्थानीय लोग इसे बढ़ते सरकारी नियंत्रण के रूप में भी देख रहे हैं.
राजनीतिक मुकाबला और भारत का रुख
PoK के चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) आमने-सामने हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पुलिस कार्रवाई और मौजूदा हालात का हवाला देते हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया है. दूसरी ओर, भारत पहले की तरह अपने रुख पर कायम है. नई दिल्ली का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है तथा पाकिस्तान का वहां कब्जा अवैध है. भारत इन चुनावों को किसी भी प्रकार की वैधता नहीं देता. ऐसे में PoK का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति, स्थानीय असंतोष और अंतरराष्ट्रीय विवाद के बीच शक्ति संतुलन की नई परीक्षा बन गया है.
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