यूनिसेफ ने ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024’ रिपोर्ट जारी, वर्ष 2050 तक दुनिया में बच्चों की आबादी लगभग 230 करोड़ हो जाएगी

Authored By: सतीश झा

Published On: Wednesday, November 20, 2024

the state of the world's children 2024
the state of the world's children 2024

यूनिसेफ की रिपोर्ट बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने वाले वैश्विक चलन/प्रभाव (मेगाट्रेंड) पर प्रकाश डालती है। नई रिपोर्ट के अनुसार, जब तक वैश्विक स्तर पर बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय नहीं अपनाए जाते, बचपन असंतुलित रहेगा।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Wednesday, November 20, 2024

यूनिसेफ ने वैश्विक फ्लैगशिप रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024’ जारी कर दी है। ‘बदलती दुनिया में बच्चों का भविष्य’ शीर्षक से इस रिपोर्ट को यूनिसेफ के भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे (Cynthia McCaffrey) ने द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) के पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के निदेशक सुरुचि भदवाल के साथ जारी की। इस अवसर पर यूनिसेफ इंडिया के युवा अधिवक्ता कार्तिक वर्मा और बच्चे भी उपस्थित थे।

यूनिसेफ की रिपोर्ट में मध्य शताब्दी में बच्चों के जीवन में आने वाले बदलावों का खाका तैयार खींचने का प्रयास किया गया है। यह रिपोर्ट 2050 के दशक में तीन वैश्विक स्तर के बड़े प्रचलन/प्रवृत्ति (megatrends) का उल्लेख करती है, जिनमें जनसांख्यिकीय बदलाव, जलवायु और पर्यावरणीय संकट तथा सीमांत प्रौद्योगिकियों का गहन अध्ययन किया गया है। इन अध्ययनों के आधार पर वर्तमान और इस सदी के मध्य के बीच (अब से 2050 तक) बच्चों का जीवन, उनके अधिकार और अवसर नए स्वरूप में होंगे।

यूनिसेफ के भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने रिपोर्ट में जारी अनुमानों पर कहा कि ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024’ रिपोर्ट में उल्लेखित तीन मेगाट्रेंड हमें यह विचार और अध्ययन के लिए मजबूर करते हैं कि बेहतर होती दुनिया में हम कैसे एक शानदार भविष्य बना सकते हैं जहाँ हर बच्चा अपने अधिकारों को सुरक्षित कर सके।

उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट बताती है कि हर बच्चे के अधिकारों को बढ़ाने वाले भविष्य के निर्माण में देशों का समर्थन कैसे किया जाए। श्री मैककैफ्रे ने कहा कि आज लिए गए निर्णय 2050 में हमारे बच्चों को विरासत में मिली दुनिया को आकार देंगे। इसलिए हमारे पास सभी बच्चों के लिए एक समृद्ध और टिकाऊ भविष्य बनाने का अवसर और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सभी रणनीति, नीति और कार्यों में बच्चे और उनके अधिकारों को केंद्र में रखकर ही आगे बढ़ना होगा। और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हम बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।

‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन’ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में बच्चों की आबादी लगभग 2.3 बिलियन (230 करोड़) हो जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि 2050 तक बच्चों की वैश्विक जनसंख्या में एक-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी भारत, चीन, नाइजीरिया और पाकिस्तान की होगी।

आज की तुलना में 10.6 करोड़ की कमी के बाद भी भारत में 35 करोड़ बच्चे होंगे। बच्चों की बढ़ती आबादी से साथ चुनौतियाँ भी बढ़ेंगी। इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए बच्चों और युवाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और कौशल विकास में अधिक निवेश बहुत महत्वपूर्ण है। लगभग 100 करोड़ बच्चे पहले से ही जलवायु संबंधी खतरों के अधिक जोखिम वाले देशों में रहते हैं। अगर कई बड़ा हस्तक्षेप नहीं होता है तो यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाएगा। बच्चे जलवायु और पर्यावरणीय संकट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, विशेष रूप से वे बच्चे जो ग्रामीण और कम आय वाले समुदाय में रहते हैं।

जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से बहुत अधिक गर्मी, बाढ़, जंगल में आग और चक्रवात जैसी घटनाओं में आठ गुना वृद्धि होने का अनुमान है। और इनका सीधा असर बच्चों पर पड़ेगा। ये जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियाँ बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों पर विपरीत असर डालेंगी। इससे हमारे बच्चे ना केवल कमजोर होंगे, बल्कि उनका भविष्य भी अंधकारमय होगा। बच्चों के जलवायु जोखिम सूचकांक (सीसीआरआई) के अनुसार, वर्ष 2021 में वैश्विक स्तर पर 163 रैंक वाले देशों में से भारत 26वें स्थान पर था। इस रैंकिंग में उन देशों को शामिल किया जाता है जिनके बच्चे अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जोखिमों से जूझ रहे होते हैं।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा कि यूनिसेफ पिछले 75 वर्ष से भारत के साथ साझेदारी कर रहा है। बच्चों को उनकी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में समान पहुँच और अवसर प्रदान करने में सहायता कर रहा है, जहाँ युवा भारत को दूसरी शताब्दी में ले जाने के लिए सशक्त बनाया गया है।

द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) के पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के निदेशक सुरुचि भदवाल (Suruchi Bhadwal) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों माध्यम से अलग-अलग प्रभाव डालता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में बच्चों को शामिल करने की सख्त जरूरत है। बच्चे परिवर्तन के सक्रिय एजेंट बनकर जलवायु एजेंडे में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।

यूनिसेफ इंडिया के कार्तिक वर्मा ने COP29 में अपनी हालिया भागीदारी से अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बाल अधिकार संकट है- यह हमारे स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण को प्रभावित कर रहा है। COP29 में उन्होंने दुनिया भर के युवाओं को नवोन्वेषी समाधान प्रस्तुत करते और तत्काल कार्रवाई की माँग करते देखा था। उन्होंने कहा कि जलवायु शिक्षा हमारे स्कूलों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए ताकि अधिक बच्चे समाधान का हिस्सा बन सकें।

‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024’ रिपोर्ट तीन मेगाट्रेंड्स द्वारा उत्पन्न चुनौतियों और अवसरों को पूरा करने का आह्वान करती है-

  • शहरों में बच्चों के लिए शिक्षा, स्थायीत्व और सेवा में निवेश करना।
  • बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, आवश्यक सेवाओं और सामाजिक सहायता प्रणालियों में बेहतर जलवायु सिस्टम (climate resilience) का विस्तार करना।
  • सभी बच्चों के लिए कनेक्टिविटी और सुरक्षित प्रौद्योगिकी का खाका प्रदान करना।

इस वर्ष ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024‘ रिपोर्ट 20 नवंबर को लॉन्च की गई है। यह दिन विश्व स्तर पर विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यूनिसेफ इस मौके पर ‘भविष्य की बात सुनें’ के माध्यम से बच्चों और युवाओं की आवाज पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करता है ताकि हम एक ऐसी दुनिया रच सकें जैसा कि हमारे बच्चे चाहते हैं। लेकिन इसके लिए हमें अपने बच्चों की बात सुननी होगी।

विश्व बाल दिवस (World Childrens Day) की पूर्व संध्या पर हर वर्ष की तरह इस बार भी नई दिल्ली सहित देशभर के प्रतिष्ठित स्मारक बाल अधिकारों के समर्थन में नीली रोशनी में जगमगा उठे। राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, संसद भवन, रायसीना हिल के उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक, कुतुब मीनार और संयुक्त राष्ट्र कार्यालय विश्व बाल दिवस पर #For EveryChild के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए रोशनी से जगमगा उठे। #GoBlue समावेशन, समानता और गैर-भेदभाव के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो हर बच्चे के लिए उज्जवल भविष्य की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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