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कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव (यूपी): एक सीट जिसकी जीत बनी सियासी मिसाल
Authored By: अरुण श्रीवास्तव
Published On: Tuesday, November 26, 2024
Last Updated On: Monday, November 25, 2024
कुंदरकी (यूपी) विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के रामवीर सिंह की जीत राजनीतिक दलों के साथ चुनाव विश्लेषकों के लिए भी हैरान कर देने वाली रही है। दरअसल, सपा की सबसे सुरक्षित मानी जानी वाली इस सीट से हाजी मोहम्मद रिजवान तीन बार से लगातार जीत रहे थे। लेकिन अपनी जीत के प्रति अतिआत्मविश्वास ने ही उन्हें लगड़ा झटका दे दिया और तीन बार से लगातार हार रहे रामवीर सिंह को उनकी मेहनत का परिणाम जीत के रूप में मिल गया। आइए जानते हैं क्या रहा उनकी जीत का राज...
Authored By: अरुण श्रीवास्तव
Last Updated On: Monday, November 25, 2024
हाइलाइट्स
- कुंदरकी में अपनी हार को नहीं पचा पा रहे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर इलेक्ट्रानिक बूथ कैप्चरिंग करके छल से चुनाव जीतने का आरोप लगाया है।
- यूपी में विधानसभा उपचुनाव में नौ में सात सीटें भाजपा/राजग की झोली में डालकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने वर्चस्व को फिर साबित कर दिया है।
यूं तो हर चुनाव खास ही होता है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव (Assembly Bypoll) को किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं कहा जा रहा था। वजह भी थी…लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिला करारा झटका। 80 सीटों वाले प्रदेश में भारी जीत की आस लगाए भाजपा को मिलीं मात्र 33 सीटें…अखिलेश की सपा पाई 37 सीटें…कांग्रेस को भी छह सीटें मिलीं यानी 80 में आधी से अधिक विपक्ष के खाते में गईं। इससे भी बड़ी बात यह कि भाजपा फैजाबाद सीट हार गई। रामलला की अयोध्या नगरी इसी लोकसभा क्षेत्र में है और इसे अय़ोध्या सीट ही कहा जाता है। इससे विपक्ष को नैरेटिव गढ़ने का मौका मिल गया… यूपी में भाजपा के दिन लदने का। विपक्ष की वापसी का। एकबार लगा भी कि शायद भाजपा के लिए अब यूपी उतना आसान मैदान नहीं रहा। इसी बीच आ गए विधानसभा उपचुनाव। नौ सीटों पर विधायक चुनने के लिए वोट की जंग शुरू हुई। मैदान में उतरे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adtiyanath)। महाराज के नाम से लोकप्रिय योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा इन उपचुनाव में दांव पर थी। यदि भाजपा हारती या अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाती तो लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष द्वारा गढ़ा गया नैरेटिव और मजबूत हो जाता, लेकिन बाबा तो बाबा। भला कहां चुप बैठते और क्यों चुप बैठते।
चुनाव प्रचार में बोले-जमकर बोले और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का जो नारा गढ़ा, वह गली-नुक्कड़ पर चर्चा का विषय बन गया। अब 23 नवंबर को आए परिणाम बता रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ की तपस्या सफल रही है-यूपी में भाजपा और सहयोगी दल आरएलडी को मिलाकर नौ में से सात सीटें मिली हैं। इनमें से भी भाजपा ने दो सीटें अखिलेश की सपा से छीनी हैं-कटेहरी और कुंदरकी। इनमें भी कुंदरकी की बात अब सब जगह हो रही है। यहां से भाजपा के ठाकुर रामवीर सिंह जीते हैं। अब आप कहेंगे कि तो इसमें क्या खास बात है…किसी न किसी पार्टी का प्रत्याशी तो जीतना ही था। भाजपा का जीत गया। तो आपको यह पता होना जरूरी है कि रामवीर सिंह उस कुंदरकी से जीते हैं जहां करीब 65 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। वह भी एक लाख से अधिक वोट से जीते हैं। मुरादाबाद क्षेत्र की यह सीट सपा की परंपरागत सीट रही है। हाजी मोहम्मद रिजवान तीन बार से विधायक रहे। रामवीर सिंह तीन बार से चुनाव लड़ रहे थे, हार रहे थे, लेकिन नहीं हारी तो हिम्मत।
क्या मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी रामवीर सिंह (Ramveer Singh) की जीत सियासी तस्वीर में नए रंगों की ओर इशारा कर रही है…यह इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल है। आइए समझने की कोशिश करते हैं। कुंदरकी में सपा को शायद यह भ्रम हो गया कि यहां तो वह जीतेगी ही। शायद पार्टी का यह भ्रम प्रत्याशी हाजी रिजवान पर भी हावी हो गया। वह तीन बार से वहां के विधायक जो थे। सामने वही प्रत्याशी था जो तीन बार हार चुका था। सबसे अधिक मतदाता भी मुस्लिम समुदाय से ही थे। फिर आखिर क्या हुआ कि सपा को हार मिली? अतिआत्मविश्वास एक कारण हो सकता है, लेकिन एक प्रत्याशी कैसे अपनी निरंतर मेहनत, फील्ड वर्क और सोशल स्किल्स से हारी हुई बाजी पलट सकता है, कुंदरकी का परिणाम इसका भी गवाह है। रामवीर सिंह वहां से हारते भले रहे हों, लेकिन उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। जनता के बीच पहुंचना नहीं छोड़ा। अपना विशाल जनता दरबार लगाना नहीं छोड़ा।
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मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि रामवीर सिंह का जनता दरबार किसी विधायक के दरबार से भी बड़ा और अधिक गहमागहमी वाला होता था। जनता के काम भी खूब कराए उन्होंने। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह अक्सर जालीदार टोपी लगाए कार्यक्रमों, समारोहों में शामिल होते रहे। लोगों के काम कराते रहे। सुख-दुख के साथी रहे। बिना विधायक बने भी वह विधायक से अधिक सक्रिय और मेहनती रहे। यह भी उल्लेखनीय है कि चुनाव प्रचार के दौरान यहां मुख्यमंत्री योगी ने अपने भाषणों में कटेंगे तो बंटेंगे की बात नहीं की। इसके बजाय उन्होंने यह कहा कि जिस तरह दीवाली का उत्सव मनाया जाता है, उसी तरह यहां ईद को सेलिब्रेट किया जाएगा। परिणाम सामने है-रामवीर सिंह कुंदरकी के नए विधायक हैं…भाजपा विधायक।
सपा के हाजी मोहम्मद रिजवान (Haji Mohammad Rizwan) अब पूर्व विधायक हैं। एंटी इन्कंबेंसी शायद उन पर भारी पड़ी। कुंदरकी सीट बताती है कि जनता आखिरकार उसे ही पसंद करती है जो उसके काम कराता है। साथ खड़ा रहता है। रामवीर सिंह को इसी का फायदा मिला। मुस्लिमों के वोट बांटने में वह सफल रहे। मुस्लिमों का एक तबका उनके साथ खड़ा हो गया और परिणाम यह रहा। हालांकि सपा ने भाजपा पर ईवीएम में धांधली के आरोप लगाए हैं, लेकिन इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। फिलहाल तो रामवीर सिंह मैनेजमेंट का एक बड़ा सबक राजनेताओं को दे चुके हैं…परसिस्सटेंस आलवेज पेज…बस लगे रहिए, जुटे रहिए…डटे रहिए…जनता के लिए भी संदेश है उनकी जीत में…जो जितना जुड़ा रहेगा, वह उतना करीब रहेगा।












