बांग्लादेश में क्यों नहीं रुक रही है हिंसा, फिर एक इस्कॉन मंदिर में आगजनी, विहिप ने जताई चिंता

Authored By: सतीश झा

Published On: Sunday, December 8, 2024

Last Updated On: Sunday, December 8, 2024

arson in iskcon temple
arson in iskcon temple

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में एक बार फिर इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) के मंदिर को हिंसा का शिकार बनाया गया। बांग्लादेश के फेनी जिले में स्थित इस मंदिर में शुक्रवार रात अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ करने के बाद आगजनी कर दी। इस घटना ने एक बार फिर हिंदू समुदाय को डर और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Sunday, December 8, 2024

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में एक बार फिर ISKON  (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) के मंदिर को हिंसा का शिकार बनाया गया। अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ करने के बाद आगजनी कर दी। इस घटना ने एक बार फिर हिंदू समुदाय को डर और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों ने मंदिर के अंदर मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया और धार्मिक ग्रंथों को आग के हवाले कर दिया। मंदिर में रखे दानपात्र और अन्य कीमती सामानों की भी लूटपाट की गई। इस घटना के बाद हिंदू समुदाय के लोग भारी भय और आक्रोश में हैं।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बांग्लादेश सरकार से मांग की है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। विहिप के महासचिव ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले मानवता के खिलाफ हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।”

शनिवार को एक और इस्कॉन मंदिर में आगजनी

बांग्लादेश के ढाका जिले के धौर गांव में शनिवार तड़के अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के एक मंदिर को अज्ञात हमलावरों ने आग के हवाले कर दिया।इस्कॉन बांग्लादेश के महासचिव चारु चंद्र दास ब्रह्मचारी ने बताया कि मंदिर की टिन की छत को उठाकर उसमें आग लगाई गई। उन्होंने कहा, “आग को जल्दी बुझा दिया गया, लेकिन एक मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई और पर्दे जल गए।“ वारदात शनिवार की है।

कोलकाता से भी विरोध का स्वर

वहीं, इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने इस घटना की कड़ी निंदा की और बताया कि धौर गांव में इस्कॉन नमहट्टा केंद्र को पूरी तरह जला दिया गया। उन्होंने कहा, “मंदिर में स्थापित श्री राधा-कृष्ण और श्री महाभाग्य लक्ष्मी नारायण की मूर्तियों सहित वहां रखी सभी चीजें जलकर खाक हो गईं।“दास ने जानकारी दी कि यह घटना सुबह दो से तीन बजे के बीच घटी। उन्होंने बताया, “मंदिर के पीछे की ओर से टिन की छत उठाकर उसमें पेट्रोल या ऑक्टेन डालकर आग लगाई गई।“—-हिंदुओं पर बढ़ते हमले

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद यह स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। चिन्मय कृष्ण दास, जो पहले इस्कॉन बांग्लादेश के सदस्य थे, अब बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोटे संगठन के प्रवक्ता हैं। उन्हें 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था।26 नवंबर को जब उनकी जमानत खारिज की गई, तो चटगांव में उनके समर्थकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन में सहायक सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या हो गई।—-भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव

त्रिपुरा में भी हो रहा है विरोध प्रदर्शन

हाल में हिंदुओं पर बढ़ते हमलों और चिन्मय कृष्ण दास (Chinmay Krishan Das) की गिरफ्तारी के विरोध में भारत के त्रिपुरा राज्य में प्रदर्शनकारियों ने अगरतला में बांग्लादेशी मिशन पर धावा बोला। इसके बाद बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास को तलब कर विरोध जताया।

असम से भी उठने लगा है विरोध का स्वर

इधर, भारत के असम राज्य में बराक वैली होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे बांग्लादेश के किसी भी नागरिक को तब तक ठहरने की अनुमति नहीं देंगे, जब तक वहां अल्पसंख्यकों और हिंदुओं पर हमले नहीं रुकते। बराक वैली के तीन जिले – कछार, श्रीभूमि (पूर्ववर्ती करीमगंज) और हेलकांडी – बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र से 129 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों से दोनों देशों के संबंध और खराब हो सकते हैं। भारतीय और बांग्लादेशी समुदाय में इस मुद्दे पर भारी रोष है।

विश्व हिंदू परिषद ने जताई चिंता

विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महा-मंत्री श्री बजरंग लाल बागड़ा ने बांग्लादेश प्रशासन द्वारा वहां के इस्कॉन मंदिर के मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त करते हुए उसे वहाँ के प्रशासन की कायरता पूर्ण और अलोकतांत्रिक घटना बताया है। उन्होंने कहा है कि विश्व हिंदू परिषद प्रशासन की इस कायरता पूर्ण और अलोकतांत्रिक घटना का पुरजोर विरोध करती है। इस्कॉन ने या अन्य हिंदू समाज के संगठनों ने अभी तक अपने उत्पीड़न के विरोध में जितनी भी कार्यवाहियां की हैं, समस्त लोकतांत्रिक तरीके से उन्होंने प्रदर्शन किया है। किसी भी प्रकार की हिंसा का उन्होंने प्रतिहिंसा के रूप में अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया है। इस प्रकार के पूर्ण शांतिप्रिय और लोकतांत्रिक रूप से अपनी बात रखने वाले समाज के किसी नेतृत्व को, जो एक वर्ग का भी नेतृत्व करते हैं, इस प्रकार से अलोकतांत्रिक तरीके से गिरफ्तार करना, उनको बंद करना उनकी आवाज को दबाने की कुचेष्टा करना अलोकतांत्रिक है, अमानवीय है और हिंदू समाज के मानवाधिकारों का हनन भी है!

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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