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फादर्स डे (Father’s Day) 16 जून : मोटिवेटर, गाइड और ताकत बने पिता
Authored By: अंशु सिंह
Published On: Sunday, June 16, 2024
Last Updated On: Thursday, June 27, 2024
बचपन में सबसे पहले अपने पिता की अंगुली पकड़कर ही बच्चा चलना सीखता है। उनकी बाहों में उसे सुरक्षा का एहसास होता है। नि:संदेह पिता का उनके बच्चों पर प्रभाव बेहद गहरा होता है। जो पिता अपने बच्चों के साथ सार्थक समय व्यतीत करते हैं, उन्हें अपने जुनून, संघर्ष, सफलता एवं असफलता की कहानियां सुनाते हैं, वे बच्चे भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं और जीवन में आने वाले तमाम झंझावातों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने में पीछे नहीं रहते। फादर्स डे के अवसर पर कुछ विशिष्ट शख्सियतें बता रही हैं कि कैसे पिता का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है...
Authored By: अंशु सिंह
Last Updated On: Thursday, June 27, 2024
फुटबॉल के विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी डेविड बेकहम से कौन परिचित नहीं होगा। उनकी काबिलियत, अनुशासन एवं खेल के प्रति समर्पण अद्भुत हैं। प्रशंसक तो उनके बिना फुटबॉल खेल की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। लेकिन डेविड के इस प्रभावशाली व्यक्तित्व को गढ़ने में उनके पिता डेविड टेड बेकहम की अहम भूमिका रही है। टेड स्वयं एक बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी थे। उन्होंने बेटे के साथ अपने इस खेल प्रेम को साझा किया और उसे खेलने के लिए प्रेरित किया यानी अगर डेविड पिता के जुनून से वाकिफ नहीं होते, तो संभव है कि आज वे इतने महान खिलाड़ी नहीं बन पाते। एथलीट हिमा दास कहती हैं, ‘पापा मेरे पहले हीरो हैं और हमेशा रहेंगे। उनके बिना यह सफर मुमकिन नहीं था। उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मेरे साथ खड़े रहे। मेरे जीवन की हर सफलता में पिता जी का हाथ है। उन्होंने यही सीख दी कि मेहनत और समर्पण से कोई भी सपना साकार हो सकता है। उन्होंने मेरे लिए जो कुछ भी किया है, उसकी कोई कीमत नहीं लगा जा सकता है। हमेशा मुझे सिखाया कि कड़ी मेहनत औऱ ईमानदारी से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
पिता के त्याग एवं भरोसे ने बढ़ाया आगे
एक फ्रेंच कहावत के अनुसार, पिता वह बैंकर है, जो प्रकृति हमें प्रदान करती है। एक ऐसा रिश्ता जो संबल देता है। आत्मनिर्भर बनने, सपने देखने के लिए प्रेरित करता है। जीवन के संघर्षों का सामना करने, उससे लड़ने की शक्ति देता है।
नेशनल हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रीतू रानी अगर हॉकी खेल पायीं, तो उसमें उनके पिता की अहम भूमिका रही। बचपन से ही उन्होंने खेलने के लिए हर प्रकार से सपोर्ट किया एवं निरंतर प्रोत्साहित किया। बारिश हो या गर्मी, वे उन्हें अभ्यास के लिए ग्राउंड पर ले जाना कभी नहीं भूले। वे खुद भी अनुशासन प्रिय एवं समय के पाबंद थे। उन्हें भी समय की अहमियत का ध्यान रखना सिखाया। रीतू बताती हैं, ‘एक समय था जब पापा की सरकारी नौकरी चली गई थी। वे पांच साल बड़े मुश्किल से निकले थे। बावजूद इसके, उन्होंने हमें किसी प्रकार की कमी का एहसास नहीं होने दिया। हमारी हर जरूरत एवं ख्वाहिश पूरी की। कभी किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला कि अमुक चीज ही करनी है और न ही बेटी व बेटे में कोई भेदभाव किया।
हरियाणा के एक छोटे से इलाके शाहबाद से निकलकर मैं देश-विदेश में टूर्नामेंट्स खेलने जाती थी। उन्होंने हमेशा मेरे ऊपर भरोसा रखा। साथ आने की जिद नहीं की। उनसे प्रेरणा लेकर ही मैंने रीतू रानी हॉकी एकेडमी शुरू की है, जहां हम बच्चों को नि:शुल्क हॉकी की ट्रेनिंग देते हैं। साथ में उनकी पढ़ाई का खर्च भी उठाते हैं। पिता का आपकी जिंदगी में होना, सबसे बड़ी नियामत है। खुशनसीबी है। शादी के बाद भले ही बेटियों को पराया मान लिया जाता है। लेकिन पिता के साथ बेटी का संबंध कभी पराया नहीं होता है।’
पिता ने गढ़ा है व्यक्तित्व
पिता का स्थान कोई नहीं ले सकता है। उनका साथ छूटने के बाद भी सुनहरी यादें दिल के एक कोने में बनी रहती है। हम सबने देखा है कि क्रिकेट के मैदान में शतक जड़ने या रिकॉर्ड बनाने पर कैसे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अपना बल्ला आकाश की ओर लहराते थे। यह उनका पिता के प्रति प्रेम एवं सम्मान को दर्शाता है। उन्हें विश्वास था कहीं ऊपर आकाश से वह अपने बेटे की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित महसूस कर रहे होंगे।
शास्त्रीय नृत्यांगना पूजा कपूर (Pooja Kapoor) कहती हैं, ‘पिता का साथ छूटे एक लंबा अर्सा हो गया है। पर उनकी दुआएं अब भी साथ हैं। बचपन से मैंने अपने दिल की गहराइयों से यही महसूस किया है कि बेशक हम भगवान को नहीं देख पाते हैं। लेकिन पैरेंट्स में उनका स्वरूप नजर आता है। वे ही हमारी हर इच्छा, मनोकामना पूरी करते हैं। अगर कोई परिस्थिति आती है, तो समाधान के लिए हम उनकी ओर ही रुख करते हैं। वे हमारे गाइड, मोटिवेटर सब होते हैं। मेरे पिता एक सशक्त व्यक्तित्व के मालिक थे। मेरे जन्म से जुड़ा वाक्या बताता है कि कैसे नाते-रिश्तेदारों के तानों की परवाह किए बगैर पिता जी ने बेटी होने पर खूब जश्न मनाया था। दूसरी बार बेटी होने पर भी उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वे हमेशा से बच्चियों को सशक्त करने पर जोर देते थे और हर चीज में सकारात्मकता ढूंढ ही लेते थे। उन्हें वर्तमान में जीने में विश्वास था। हम बड़े हुए और हमारा एक शक्तिशाली व्यक्तित्व गढ़ा गया। डांसर बनने का निर्णय भी उसी का परिणाम था।’
सबसे बड़ी ताकत रहे हैं पापा
आज जब हम फादर्स डे मना रहे हैं, तो हमें अपने पिता के त्याग, समर्पण, उनके मूल्यों को भी याद रखना होगा। उस पर अमल करना होगा। प्रसिद्ध टीवी अभिनेत्री शुभांगी अत्रे (TV Actress Shubhangi Atre) के जीवन को संवारने में उनके पापा की सबसे अहम भूमिका रही है। वह कहती हैं, ‘हम तीन बहनें ही हैं। पापा ने कभी हमें बेटों से कम नहीं समझा। आज भी जब किसी मुश्किल में फंसती हूं और लगता है कि कैसे करूंगी, तो पापा यही कहते हैं कि तुम सब कुछ कर सकती हो। जो चाहो वह हासिल कर सकती हो। मैं खुद को खुशनसीब समझती हूं कि मुझे ऐसे पापा मिले, जिनकी सोच शुरू से काफी प्रगतिशील रही है। पिछले कुछ सालों में जीवन में जो परिवर्तन आए हैं, उनका सामना करने में उन्होंने बहुत मदद की। बात चाहे करियर की हो या मुंबई में अपना घर खरीदने की, पापा ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया। वे समय-समय पर गाइड बनकर दिशा-निर्देश देते रहते हैं। अपने अनुभवों से समझाते हैं और मुश्किल से निकलने की प्रेरणा देते हैं। पापा मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं।’ पिता की हमारे जीवन में भूमिका भी कुछ ऐसी ही होती है। अभिभावक होते हुए वे कभी दोस्त, कभी मार्गदर्शक, कभी शिक्षक के रूप में हमें प्रेरित करते रहते हैं। मुश्किल घड़ियों एवं चुनौतियों का सामना करने का साहस देते रहते हैं।













