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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य का अपमान, साधु-संतों में हड़कंप, देवकीनंदन, अनिरुद्धाचार्य और रामदेव क्या बोले?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, January 23, 2026
Last Updated On: Friday, January 23, 2026
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में गंगा स्नान से रोक दिया गया, जिससे समर्थकों और पुलिस में धक्का-मुक्की हुई. विवाद ने संत समाज, प्रशासन और राजनीतिक गलियारों तक को छू लिया. देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य और बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, कुछ ने समर्थन किया, कुछ संयम की सलाह दी. संत समाज में विवाद अब एकता और सम्मान की परीक्षा बन गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, January 23, 2026
मुख्यमंत्री योगी के ‘कालनेमि’ वाले बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संत और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सबसे महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग धर्म का गलत इस्तेमाल कर सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश कर सकते हैं. उनका यह बयान विवाद में और इंधन डाल गया. मुख्यमंत्री के शब्दों ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन और संत समाज के बीच पैदा हुआ तनाव सिर्फ एक धार्मिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है.
संत समाज में दो हिस्सों में बंटाव
इस घटना के बाद देशभर के संत समाज की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़े हुए तो कुछ ने संयम और आपसी समझ की बात कही. कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रशासन की गलती स्पष्ट है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी के बाल पकड़कर अपमान करना किसी अधिकार में शामिल है? वहीं देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि दोनों पक्षों को संयम दिखाना चाहिए और विवाद को तूल देने के बजाय आपसी तालमेल से सुलझाना चाहिए.
वृंदावन और हरिद्वार में विरोध प्रदर्शन
मथुरा के वृंदावन में संतों ने मांग की कि शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक गंगा स्नान कराया जाए. फलाहारी बाबा और स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. हरिद्वार की हर की पौड़ी पर भारत साधु समाज और अखंड परशुराम अखाड़े ने एक घंटे का धरना दिया. अखाड़ा नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर माफी नहीं दी गई तो वे शिखा कटवाने तक का कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे.
बाबा रामदेव का संदेश: अहंकार नहीं, सहयोग जरूरी
योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि तीर्थ स्थलों पर किसी तरह का अहंकार या एजेंडा नहीं लाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी साधु के साथ अभद्र व्यवहार अस्वीकार्य है. बाबा रामदेव ने संत समाज को आपसी विवाद से बचने और सनातन परंपरा को मजबूत रखने का संदेश दिया. उनका कहना था कि बाहरी चुनौतियों का मुकाबला तभी संभव है जब संत समाज में एकता बनी रहे.
राजनीतिक बयानबाजी और सनातन परंपरा की रक्षा
राजनीतिक गलियारों में भी यह विवाद गरमाया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य के अपमान को सनातनी समाज पर हमला बताया. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का आह्वान किया. वहीं शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर शंकराचार्य का सम्मान नहीं है तो इसका मतलब सभी संतों का अपमान है. इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्र आपस में कितने जुड़ गए हैं.
निष्कर्ष: संत समाज की एकता ही समाधान
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य विवाद ने साफ कर दिया कि संत समाज में एकता बनाए रखना जरूरी है. प्रशासन की गलतियों को सुलझाना और आपसी तालमेल से काम करना ही धर्म और परंपरा की रक्षा का सबसे मजबूत तरीका है. चाहे देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य या बाबा रामदेव हों, सभी ने यही संदेश दिया कि अहंकार और विवाद से सनातन परंपरा कमजोर होती है, जबकि संयम और सहयोग से धर्म और समाज दोनों सुरक्षित रह सकते हैं.
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