माइनस तापमान में उबलता अमेरिका: मिनियापोलिस से वॉशिंगटन तक ICE के ख़िलाफ़ सड़कों पर जनविद्रोह

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Saturday, January 31, 2026

Last Updated On: Saturday, January 31, 2026

ICE Protest के खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन, ठंड के बावजूद सड़कों पर उतरे लोग.
ICE Protest के खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन, ठंड के बावजूद सड़कों पर उतरे लोग.

मिनियापोलिस की बर्फ़ीली सड़कों आम अमेरिकी नागरिक प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका अपना देश उनसे उनकी स्वतंत्रता छिन रहा है. सड़कों पर उतरे आम अमेरिकियों का यह गुस्सा एक शहर और एक नीति के विरोध से आगे अमेरिका को आईना दिखाता है, जो अपने ही लोकतांत्रिक मूल्यों से टकरा रहा है.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Saturday, January 31, 2026

ICE Protest: मिनेसोटा की सर्द हवाओं में जब तापमान शून्य से नीचे गिर चुका था, तब भी मिनियापोलिस की सड़कों पर हज़ारों लोग जमा थे. भारी कोट, दस्ताने और ऊनी टोपी पहने प्रदर्शनकारी ठिठुरते शरीर के साथ एक ही नारे लगा रहे थे- ‘नो ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट).

दो अमेरिकी नागरिकों एलेक्स प्रीटी और रेनी गुड की संघीय आव्रजन कर्मचारियों की गोलीबारी में हुई मौत के बाद हजारों अमेरिकी सड़कों पर हैं. ट्रंप प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा सिर्फ मिनियापोलिस तक सीमित नहीं है. अमेरिकियों का यह गुस्सा कैलिफ़ोर्निया से न्यूयॉर्क तक, शिकागो से वाशिंगटन तक फैल चुका है.

गोलीबारी से भड़का जनाक्रोश

इस महीने मिनियापोलिस के एक पड़ोस में हुई गोलीबारी ने आग में घी डाल दिया. आरोप है कि संघीय आव्रजन एजेंटों ने कार्रवाई के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों को गोली मार दी. यही घटना ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) के ख़िलाफ़ पहले से मौजूद लोगों की नाराज़गी को विस्फोट में बदलने वाली चिंगारी बनी.

घटनास्थलों के पास स्थानीय स्कूलों के शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों ने मार्च निकाला. बच्चों को साथ लाए परिवार, बुज़ुर्ग जोड़े और युवा कार्यकर्ता सब एक-दूसरे से एक ही डर साझा कर रहे थे कि राज्य अब अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ हथियार उठा रहा है.

‘नो ICE’: अमेरिकी सपने की रक्षा या विद्रोह?

अमेरिकन कात्या कगन ‘नो ICE’ लिखी स्वेटशर्ट पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. उनके हाथ में पोस्टर था, ‘ICE, Leave Our City.’ कगन ने बताती हैं, ‘मेरे माता-पिता सुरक्षा और बेहतर ज़िंदगी की तलाश में अमेरिका आए थे. मैं उसी अमेरिकी सपने के लिए लड़ रही हूं.’

विरोध प्रदर्शन में शामिल वहीं 65 वर्षीय ध्यान प्रशिक्षक किम ने इस कार्रवाई को ‘संघीय सरकार द्वारा नागरिकों पर पूर्ण फासीवादी हमला’ बताया. आम अमेरिकी नागरिकों के ये बयान बताते हैं कि यह आंदोलन केवल आव्रजन नीति के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि सत्ता के चरित्र पर सवाल बन चुका है.

तीन हजार फेडरल एजेंट तैनात

ट्रंप प्रशासन ने ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत मिनियापोलिस क्षेत्र में 3,000 संघीय अधिकारियों को तैनात किया है. सामरिक गियर, नकाब और भारी हथियारों से लैस यह बल स्थानीय पुलिस से पांच गुना बड़ा है.

शहर की सड़कों पर गश्त करते इन एजेंटों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. यहीं से विरोध ने राष्ट्रव्यापी रूप ले लिया है.

अमेरिकी छात्रों का नारा ‘नो वर्क, नो स्कूल’

30 जनवरी को छात्रों और शिक्षकों ने ‘राष्ट्रीय विरोध दिवस’ के तहत कक्षाओं का बहिष्कार किया. इन्होंने नारा दिया, ‘कोई काम नहीं. कोई स्कूल नहीं. कोई ख़रीदारी नहीं. ICE को फंडिंग बंद करो.’

राष्ट्रीय विरोध दिवस पर 46 राज्यों में 250 से अधिक प्रदर्शनों का अनुमान लगाया गया. ऑरोरा (कोलोराडो) और टक्सन (एरिज़ोना) में बड़े पैमाने पर अनुपस्थिति के डर से स्कूल बंद करने पड़े.

शिकागो की डीपॉल यूनिवर्सिटी से लेकर लॉन्ग बीच और ब्रुकलिन तक, शिक्षण संस्थानों के कैंपस ‘सैंक्चुअरी’ और ‘फासीवादियों का यहां स्वागत नहीं’ जैसे नारों से गूंज उठे.

  • कड़ाके की ठंड में मिनियापोलिस से लेकर कई राज्यों और शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.
  • रॉक स्टार स्प्रिंगस्टीन ने भी प्रदर्शन स्थल पर कॉन्सर्ट कर अपना समर्थन दिया.
  • सूत्रों के मुताबिक FBI फील्ड ऑफिस के स्थानीय प्रमुख को हटाया गया.
  • ICE को बिना वारंट के लोगों को गिरफ्तार करने की ज़्यादा शक्ति दी गई.

ब्रूस स्प्रिंगस्टीन की आवाज़ और सांस्कृतिक मोर्चा

मशहूर रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन भी इस आंदोलन से जुड़े. उन्होंने मिनियापोलिस में गुड और प्रीटी के लिए आयोजित फंडरेज़र में मंच से अपना नया गीत “Streets of Minneapolis” पेश किया. उनका प्रदर्शन में शामिल होने का यह संकेत था कि विरोध केवल राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक और नैतिक लड़ाई में भी बदल चुका है.

प्रदर्शन का वॉशिंगटन तक असर

मिनियापोलिस की घटनाओं का असर संघीय सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया है. एफबीआई (FBI) के मिनियापोलिस फील्ड ऑफिस के कार्यवाहक प्रमुख जारैड स्मिथ को पद से हटाकर वाशिंगटन स्थानांतरित कर दिया गया है.

इसी दौरान पूर्व CNN के एंकर डॉन लेमन की गिरफ्तारी ने प्रेस की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है. चर्च के अंदर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़े आरोपों पर लेमन ने कहा, ‘मुझे चुप नहीं कराया जा सकता.’

बिना वारंट गिरफ्तारी से लोकतंत्र पर संकट

एक आंतरिक ICE मेमो के लीक होने से विवाद और गहरा गया. इसमें एजेंटों को बिना वारंट गिरफ्तारी की व्यापक शक्तियां दिए जाने की बात सामने आई. आलोचकों का कहना है कि इससे निचले स्तर के एजेंटों को भी मनमानी छूट मिल गई है.

डेमोक्रेट्स ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की फंडिंग का विरोध कर दिया है. इससे अमेरिकी सरकार के आंशिक शटडाउन का ख़तरा पैदा हो गया है.

ट्रंप बनाम अमेरिकी जनता

ट्रंप की आव्रजन नीति को लेकर जनसमर्थन उनके दूसरे कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. हालांकि ट्रंप ने तनाव कम करने की बात कही, लेकिन उन्होंने प्रदर्शनकारियों को फिर पैसे लेकर आए विद्रोही बताया और विद्रोह अधिनियम लागू करने की धमकी दोहराई.

मिनेसोटा के डेमोक्रेटिक गवर्नर टिम वाल्ज़ ने साफ़ कहा कि मिनेसोटा की सुरक्षा का एकमात्र तरीका है कि संघीय सरकार अपनी सेना वापस बुलाए और इस क्रूर अभियान को खत्म करे.

माइनस तापमान में सड़कों पर खड़े अमेरिकी नागरिक शायद यही पूछ रहे हैं, ‘क्या सुरक्षा के नाम पर स्वतंत्रता की कीमत चुकानी होगी?’

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गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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