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एपस्टीन फाइल्स का विस्फोट: गेट्स, मस्क से लेकर क्लिंटन, मीरा नायर तक नामों की आहट
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, January 31, 2026
Last Updated On: Saturday, January 31, 2026
अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी को देर रात एपस्टीन फाइल्स से जुड़े लाखों दस्तावेज जारी किए. अमेरिकी न्याय विभाग की यह रिलीज़ इतिहास में दर्ज हो चुकी है. अब सबकी निगाहें मीडिया, अदालतों और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर टिक गई हैं कि आखिर इन दस्तावेज़ों के साथ आगे क्या किया जाता है?
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, January 31, 2026
Epstein Files Explosion: अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी को देर रात एपस्टीन फाइल्स से जुड़े लाखों दस्तावेज जारी किए. अमेरिकी न्याय विभाग की यह रिलीज़ इतिहास में दर्ज हो चुकी है. अब सबकी निगाहें मीडिया, अदालतों और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर टिक गई हैं. आखिर इन दस्तावेज़ों के साथ आगे क्या किया जाता है
अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी को देर रात कुख्यात फाइनेंसर और यौन अपराध के दोषी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी जांच की फाइलों का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है. इस खुलासे में 30 लाख से अधिक दस्तावेज़, 2,000 से ज़्यादा वीडियो और 1,80,000 से अधिक तस्वीरों को सार्वजनिक किया गया हैं. इस विशाल डेटा-डंप ने एक बार फिर वैश्विक सत्ता, कॉरपोरेट दिग्गजों और अभिजात वर्ग के बीच एपस्टीन के कथित नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ट्रंप प्रशासन के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि यह खुलासे अमेरिकी जनता के प्रति पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक लंबी और जटिल प्रक्रिया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले जिन दस्तावेज़ों को रोका गया था, वे भी अब सार्वजनिक कर दिए गए हैं. यानी एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेज अब और सार्वजानिक नहीं होंगे.
देरी के पीछे कथित पीड़ितों की सुरक्षा का तर्क
न्याय विभाग के अनुसार, इस खुलासे में हुई देरी की मुख्य वजह 1,000 से अधिक कथित पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा थी. ब्लैंच ने कहा कि दस्तावेज़ों की पहचान, छंटाई और समीक्षा की प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल थी.
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस देरी ने पहले से ही शक्तिशाली और प्रभावशाली नामों को समय दिया. यही कारण है कि एपस्टीन मामला आज भी केवल अपराध की कहानी नहीं, बल्कि संस्थागत चुप्पी और संरक्षण की बहस बन चुका है.
एपस्टीन फाइल्स में बिलेनियर बिल गेट्स के भी नाम
नए दस्तावेज़ों में सबसे विवादास्पद सामग्री वे ड्राफ्ट ईमेल हैं, जो कथित तौर पर जेफरी एपस्टीन द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स को लिखे गए थे. इन ईमेल्स में दावा किया गया है कि गेट्स ने अपनी तत्कालीन पत्नी मेलिंडा फ्रेंच गेट्स से एक कथित यौन संचारित रोग (STD) छिपाने की कोशिश की. यही नहीं ईमेल्स में आगे आरोप है कि इसके बाद उन्होंने ‘रूसी लड़कियों’ के साथ कथित यौन संबंध बनाए.
ये दावे एक ड्राफ्ट बयान के रूप में सामने आते हैं, जो गेट्स के लंबे समय के विज्ञान सलाहकार बोरिस निकोलिक की ओर से लिखा गया बताया गया है. दस्तावेज़ों में यह भी आरोप दर्ज है कि गेट्स के लिए कथित तौर पर ड्रग्स उपलब्ध कराने और उनके अवैध संबंधों को सुविधाजनक बनाने जैसी गतिविधियों में मदद की गई.
हालांकि बिल गेट्स की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ये ड्राफ्ट ईमेल और आरोप हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है और न ही इन्हें किसी अदालत में तथ्य के रूप में स्थापित किया गया है.
गैरकानूनी गतिविधियां भी शामिल
ईमेल के एक अंश में लिखा गया है कि लेखक को नैतिक रूप से अनुचित से लेकर संभावित रूप से गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कहा गया था. इसमें एडरॉल जैसी दवाओं की आपूर्ति, शादीशुदा महिलाओं के साथ संबंधों को सुविधाजनक बनाना और अन्य गतिविधियों का उल्लेख है.
यह भाषा भले ही ड्राफ्ट के स्तर पर हो, लेकिन एपस्टीन के प्रभाव और दबाव के तरीके को लेकर गंभीर संकेत देती है. एक ऐसा नेटवर्क, जिसमें धन, रसूख और गोपनीयता मुख्य मुद्रा थे.
मेयर ममदानी की मां एवं फिल्म निर्देशक मीरा नायर की पार्टी
एपस्टीन फाइलों के एक अन्य हिस्से में 2009 की एक आफ्टरपार्टी का ज़िक्र है. यह दोषी सेक्स तस्कर घिसलेन मैक्सवेल के न्यूयॉर्क स्थित टाउनहाउस में हुई थी. इस पार्टी में न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी की मां एवं फिल्म निर्देशक मीरा नायर के शामिल होने का उल्लेख है. यह पार्टी उनकी फिल्म ‘अमेलिया’ की स्क्रीनिंग के बाद आयोजित की गई थी.
पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन और अमेज़न के CEO बेजोस
एक ईमेल, जिसे पब्लिसिस्ट पेगी सीगल ने एपस्टीन को भेजा था, में दावा किया गया है कि इस पार्टी में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और अमेज़न के CEO जेफ बेजोस भी मौजूद थे. ईमेल में माहौल, मेहमानों और फिल्म की ठंडी प्रतिक्रिया का विवरण है.
यह उल्लेख भी दस्तावेज़ी संदर्भ के रूप में सामने आता है, न कि किसी अपराध के आरोप के रूप में. लेकिन यह दिखाता है कि एपस्टीन और मैक्सवेल का दायरा केवल वित्त या राजनीति तक सीमित नहीं था.
एलोन मस्क और ‘द्वीप’ का सवाल
दस्तावेज़ों में एलोन मस्क और एपस्टीन के बीच 2012 के ईमेल एक्सचेंज भी शामिल हैं. एक ईमेल में एपस्टीन, मस्क से पूछता है कि हेलीकॉप्टर से द्वीप पर कितने लोग आएंगे. मस्क के जवाब में ‘वाइल्ड पार्टी’ जैसे शब्दों का ज़िक्र है.
यह संवाद भी अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता, लेकिन एपस्टीन के निजी द्वीप और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर पहले से मौजूद संदेहों को फिर हवा देता है.
फाइलें खुलीं, लेकिन सच अब भी अधूरा
तीन मिलियन पन्नों के इस खुलासे के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है. इसने नई जांच और बहस को फिर से जरूर शुरू कर दिया है. इसमें कई नाम हैं. कई दावे हैं और कई इशारे भी हैं लेकिन सवाल वहीँ का वहीँ अब भी खड़ा है.
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