Special Coverage
आर्थिक विकास में भारत से आगे निकले बांग्लादेश के लोगों में हसीना के प्रति इतना गुस्सा क्यों
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, August 6, 2024
Last Updated On: Tuesday, August 6, 2024
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश आर्थिक विकास के कई मापदंडों पर भारत से आगे पहुंच गया था। वहां शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, रोजगार से लेकर सड़क और बिजली के क्षेत्रों में काफी बदलाव आया है। तो फिर क्या हुआ कि विकासोन्मुख रही शेख हसीना के प्रति लोगों में इतना गुस्सा पनप गया।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Tuesday, August 6, 2024
बांग्लादेश में तख्तापलट की शिकार हुई शेख हसीना 15 वर्षों से लगातार प्रधानमंत्री रहीं हैं। उनके इस कार्यकाल में बांग्लादेश आर्थिक विकास के कई मापदंडों पर भारत से आगे पहुंच गया। वहां शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, रोजगार से लेकर सड़क और बिजली के क्षेत्रों में काफी बदलाव आया है। तो फिर क्या हुआ कि विकासोन्मुख रही शेख हसीना के प्रति लोगों में इतना गुस्सा पनप गया। बांग्लादेश के कुछ लोगों का मानना है कि उनके इस लंबे कार्यकाल के दौरान विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मापदंडों में बांग्लादेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन इसके विपरीत नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों हुए क्षरण से लोगों में गुस्सा भी बढ़ता गया। कुछ विशेषज्ञ इसे कोरोना के बाद देश की आर्थिक स्थिति को कारण मानते हैं तो कुछ इसे विदेशी प्रोपेगेंडा। जिसने छात्र आंदोलन पर कब्जा जमाया और अपनी राजनीतिक रोटी सेंका।
शेख हसीना के कार्यकाल और विकास
शेख हसीना दूसरी बार 2009 में बांग्लादेश की सत्ता में आईं। उसके बाद से बांग्लादेश में आर्थिक विकास तेजी से हुआ। कई वित्तीय वर्ष में बांग्लादेश का जीडीपी भारत से आगे रहा है। भारत का गार्मेंट्स इंडस्ट्री बांग्लादेश में शिफ्ट होने लगा। वहां अंतर्राष्ट्रीय गार्मेंट्स कंपनी ने बांग्लादेश को ऑर्डर दिये। जबकि यह पहले भारत को मिलता था। हसीना सरकार ने विभिन्न आर्थिक सुधारों और उपायों से बांग्लादेश को गरीब देश उबार रही थीं। दूरदराज के गांवों में बिजली पहुंचाना, देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, राजमार्गों, रेलवे लाइनों और बंदरगाहों का निर्माण करना, यह सब उनके कार्यकाल में तेजी से बढ़ा।
भारत से आगे रहा जीडीपी
बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी वित्तीय वर्ष 2023 में भारत से आगे निकल गई थी। वर्ष 2003 के बाद से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। आर्थिक विकास से शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधी उपायों में बेहतर परिणाम सामने आने लगे थे। मसलन, एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की शिशु मृत्यु दर 1973 में 151.4 (भारत से पीछे) से 2022 में 24.1 (भारत से आगे) तक काफी कम हो गई। इस दौरान वहां की लड़कियां शिक्षित होने लगी और वे घरों से बाहर निकालकर नौकरीपेशा होने लगी। यही नहीं एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक देश का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई- जो किसी राष्ट्र के स्वास्थ्य, ज्ञान और जीवन स्तर को मापता है) भी 2020 में भारत से आगे निकल गया था।
बेहतरीन विकास दर के बाद लोगों में गुस्सा क्यों?
बांग्लादेश में इन सामाजिक-आर्थिक उपायों में तेजी से प्रगति होने के विपरीत कुछ लोगों का मानना है कि वहां के राजनीतिक अधिकार, राजनीतिक बहुलवाद, नागरिक स्वतंत्रता, संगठनात्मक अधिकार, कानून का शासन और व्यक्तिगत स्वायत्तता में भारी गिरावट आई है। यह सब हाल के कुछ वर्षों में हुआ है। जैसे बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया लंबे से जेल में बंद हैं। इससे उनके समर्थकों और देश के एक वर्ग में गुस्सा भर रहा था। वे मौके की तलाश में थे। छात्र आंदोलन ने ऐसे लोगों को मौका दे दिया।
ये भी पढ़े: 30 बार तख्तापलट झेलने वाला बांग्लादेश
विपक्षी नेताओं और विदेशी ताकतों की सुनियोजित रणनीति
बांग्लादेश में भारत की राजदूत रहीं वीना सीकरी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि आरक्षण के मुद्दे पर हसीना सरकार और छात्रों का एक ही मत था। आरक्षण सुधार आंदोलन 2018 में शुरू हुआ। तब प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की सरकार ने प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें मान ली थीं। उसके ख़िलाफ़ जून के महीने में हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने आरक्षण को बरकरार रखा। तब शेख़ हसीना सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। वो छात्रों के साथ थी। उन्होंने कहा था कि वो आरक्षण ख़त्म करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लगभग ख़त्म कर दिया था। छात्रों को वो मिल गया, जो वह चाहते थे। लेकिन मुझे लगता है पाकिस्तान समर्थित जमात-ए-इस्लामी और मुख्य विपक्ष बीएनपी के छात्र शाखा प्रदर्शन में शामिल हुए और एक रणनीतिक रूप से बहुत ज़्यादा हिंसा फैलाई।
अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत
सरकार के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर से हिंसा और झड़पों के बाद शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और देश छोड़ दीं। इस हिंसक आंदोलन में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। कई सरकारी भवनों और प्रधानमंत्री आवास में लुटपाट किया गया। शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद वहां जो स्थिति दिख रही है, वह बेहद भयावह है। यह हिंसा कहीं से छात्र आंदोलन स नहीं दिखता है। अब सेना ने कमान अपने हाथ में ले लिया है। बांग्लादेश सेना के जनरल ने कहा है कि वे यहां अंतरिम सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।













