CBSE12वीं रिजल्ट विवाद के बीच री-इवैल्यूएशन शुरू, 4 लाख छात्रों ने मांगी 11 लाख कॉपियां
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, May 29, 2026
Updated On: Friday, May 29, 2026
CBSE12वीं रिजल्ट विवाद के बाद 4 लाख से अधिक छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है. ओएसएम सिस्टम में गड़बड़ी, कम अंक और पोर्टल क्रैश से नाराजगी बढ़ी. बोर्ड ने फीस घटाकर प्रक्रिया शुरू की है, जबकि छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग कर रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Friday, May 29, 2026
CBSE 12th Revaluation: CBSE कक्षा 12वीं के रिजल्ट को लेकर उठे सवाल अब बड़े विवाद का रूप ले चुके हैं. छात्रों और अभिभावकों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हुआ है. इसी बीच बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया आज से शुरू करने का फैसला किया है. इस बार करीब 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा देखने और जांचने के लिए आवेदन किया है. कुल मिलाकर 11 लाख से अधिक कॉपियों की मांग की गई है, जो इस बात का संकेत है कि छात्रों में असंतोष काफी गहरा है.
डिजिटल कॉपियों की मांग और आंकड़ों का पूरा खेल
सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस बार रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने अपनी आंसर शीट देखने की मांग की है. करीब 4,04,319 छात्रों ने आवेदन किया है. इन छात्रों ने मिलकर 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देखने की रिक्वेस्ट की है. बोर्ड ने इनमें से लगभग 8,98,214 कॉपियां छात्रों को डिजिटल रूप में उपलब्ध भी करा दी हैं. सरकार का कहना है कि आवेदन करने वाले सभी छात्रों में से करीब 20 प्रतिशत ही अंतिम चरण यानी री-इवैल्यूएशन तक पहुंचेंगे, जबकि बाकी सिर्फ स्कैन कॉपी देखने के बाद ही संतुष्ट हो जाते हैं.
OSM सिस्टम पर उठे सवालों ने बढ़ाया तनाव
इस पूरे विवाद की जड़ सीबीएसई का नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) माना जा रहा है. इस प्रणाली में परीक्षक पारंपरिक कॉपी की बजाय डिजिटल स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को स्क्रीन पर देखकर जांच कर रहे थे. बोर्ड ने इसे तेज और पारदर्शी तरीका बताया था, लेकिन रिजल्ट आने के बाद छात्रों की शिकायतें बढ़ गईं. कई छात्रों का कहना था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले, कई उत्तर बिना जांचे छोड़े गए और कुछ कॉपियां धुंधली या अधूरी दिखाई दीं. इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी नाराजगी तेज हो गई और सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए.
फीस में कटौती और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में बदलाव
बढ़ते विरोध के बाद सीबीएसई को अपने फैसलों में बदलाव करना पड़ा. बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन और संबंधित सेवाओं की फीस में भारी कटौती की है. अब स्कैन कॉपी सिर्फ 100 रुपये प्रति विषय में मिल रही है, जो पहले 700 रुपये थी. मार्क्स वेरिफिकेशन की फीस भी 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है. वहीं री-इवैल्यूएशन के लिए अब प्रति प्रश्न केवल 100 रुपये देने होंगे. बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि यदि दोबारा जांच के बाद अंक बढ़ते हैं तो फीस वापस कर दी जाएगी, लेकिन अंतिम निर्णय ही मान्य होगा.
विवाद, राजनीति और तकनीकी सवालों का बढ़ता दायरा
यह मामला अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है. एक तरफ कुछ तकनीकी खामियों और पोर्टल क्रैश की शिकायतें सामने आईं, वहीं दूसरी तरफ साइबर सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे. एक कथित हैकर द्वारा सिस्टम में गड़बड़ी के दावे भी किए गए, हालांकि सीबीएसई ने इन्हें सैंपल डेटा और टेस्टिंग सिस्टम से जुड़ा मामला बताया. इसके अलावा राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ा, जहां विपक्ष ने मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. कुल मिलाकर यह विवाद अब शिक्षा व्यवस्था, तकनीक और प्रशासनिक भरोसे तीनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
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