TMC में तीन धड़े? ममता बनर्जी की पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कौन किसके साथ खड़ा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, June 9, 2026
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. पार्टी में ममता बनर्जी समर्थक, काकोली घोष के नेतृत्व वाला बागी गुट और एक साइलेंट समूह दिखाई दे रहा है. सांसदों के बीच बढ़ती खींचतान ने पार्टी की एकजुटता और भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
TMC Internal Conflict: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही उठापटक की हो रही है. विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है. पहले विधायकों के बीच मतभेद की खबरें आईं और अब सांसदों के बीच भी अलग-अलग गुट बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या टीएमसी अब तीन हिस्सों में बंटती नजर आ रही है?
पहला धड़ा: ममता बनर्जी के साथ खड़े वफादार नेता
पार्टी के भीतर एक ऐसा समूह अभी भी मौजूद है जो पूरी तरह ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है. इस गुट का मानना है कि टीएमसी की पहचान और ताकत ममता बनर्जी के नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है. इस खेमे में पार्टी के कई बड़े और अनुभवी चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं.
ममता समर्थक नेताओं में अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, सायनी घोष और कीर्ति आजाद जैसे नाम प्रमुख माने जा रहे हैं. इन नेताओं के सार्वजनिक बयानों से भी यह संकेत मिला है कि वे अभी पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी तरह की बगावत का हिस्सा नहीं हैं.
दूसरा धड़ा: काकोली घोष के नेतृत्व में बागी समूह
दूसरी ओर, पार्टी के भीतर एक बागी गुट भी सक्रिय दिखाई दे रहा है. इस समूह का नेतृत्व लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में सांसद हैं और वे संसद में अलग पहचान की मांग कर रहे हैं.
इस गुट से जुड़े जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं, उनमें शताब्दी रॉय, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), अरूप चक्रवर्ती, बापी हलदर, कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक शामिल बताए जा रहे हैं.
बागी गुट का दावा है कि उसे पर्याप्त सांसदों का समर्थन प्राप्त है और वह भविष्य में अलग राजनीतिक रास्ता चुन सकता है. हालांकि इस दावे को लेकर अभी भी विवाद बना हुआ है.
तीसरा धड़ा: चुप्पी साधे हुए नेता
टीएमसी के भीतर सबसे दिलचस्प स्थिति तीसरे समूह की है. यह ऐसा गुट है जिसने अभी तक किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है. न तो ये नेता ममता बनर्जी के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं और न ही बागी खेमे का हिस्सा बने हैं.
इस समूह में सजदा अहमद, रचना बनर्जी, प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बेग, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इन नेताओं की चुप्पी ने राजनीतिक अटकलों को और बढ़ा दिया है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में उनका रुख किस दिशा में जाएगा.
सांसदों की संख्या को लेकर विवाद
बागी गुट का दावा है कि उसके पास बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन है, लेकिन ममता समर्थक नेता इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि बागी खेमा अपने समर्थन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और वास्तविक संख्या उतनी नहीं है जितनी बताई जा रही है.
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कुछ सांसदों की मौजूदगी को आधार बनाकर पूरे संगठन में बड़ी टूट का माहौल दिखाने की कोशिश की जा रही है. यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच आंकड़ों को लेकर लगातार बयानबाजी जारी है.
आगे क्या होगा?
टीएमसी के भीतर चल रही यह खींचतान केवल पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है. यदि बागी गुट अपने दावे के अनुसार समर्थन जुटाने में सफल होता है, तो पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं. वहीं यदि ममता बनर्जी अपने समर्थकों को एकजुट रखने में कामयाब रहती हैं, तो यह संकट सीमित भी रह सकता है.
फिलहाल इतना साफ है कि टीएमसी के भीतर तीन अलग-अलग धाराएं दिखाई दे रही हैं एक ममता बनर्जी के साथ, दूसरी बागी खेमे के साथ और तीसरी अभी भी इंतजार और चुप्पी की राजनीति अपनाए हुए है. आने वाले दिनों में इन तीनों गुटों की दिशा बंगाल की राजनीति का नया अध्याय तय कर सकती है.
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