क्या खत्म होने जा रही है TMC? कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियों पर बड़ा सवाल?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, June 12, 2026
Last Updated On: Friday, June 12, 2026
ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलें तेज हो गई हैं. दोनों दल भले इनकार कर रहे हों, लेकिन बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो चुकी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, June 12, 2026
TMC Congress Alliance: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है. चुनावी झटकों और पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है. दिल्ली में हुई बैठकों के बाद टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि दोनों दलों ने इन खबरों का खंडन किया है, लेकिन बंगाल की राजनीति में चल रही उठापटक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनावी हार के बाद संकट में टीएमसी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता से बाहर होने के बाद किसी भी पार्टी के लिए वापसी आसान नहीं रही है. कांग्रेस 1977 के बाद और वाम दल 2011 के बाद कभी अपनी पुरानी ताकत हासिल नहीं कर पाए. अब कुछ ऐसा ही संकट तृणमूल कांग्रेस के सामने भी दिखाई दे रहा है.
चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. कई सांसदों और विधायकों के पार्टी से दूरी बनाने की खबरें हैं. राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के कई सांसद बागी रुख अपना चुके हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है.
दिल्ली में हुई मुलाकातों ने बढ़ाई चर्चा
राजनीतिक संकट के बीच ममता बनर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की. वहीं TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बातचीत की.
इन बैठकों के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या टीएमसी और कांग्रेस किसी बड़े राजनीतिक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं. हालांकि कांग्रेस और टीएमसी दोनों ने साफ किया है कि फिलहाल किसी विलय पर चर्चा नहीं हुई है. इसके बावजूद इन मुलाकातों ने विपक्षी राजनीति में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है.
अधीर रंजन ने भी दिए संकेत
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्हें किसी विलय प्रस्ताव की जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह जरूर माना कि टीएमसी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं को वर्षों तक कांग्रेस नेतृत्व से मिलने की जरूरत महसूस नहीं हुई, वे अब लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं. उनके इस बयान को बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है.
क्या दोनों दलों को होगा फायदा?
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भविष्य में किसी प्रकार का गठजोड़ या विलय होता है तो दोनों दलों को कुछ न कुछ राजनीतिक लाभ मिल सकता है.
एक तरफ कांग्रेस को बंगाल में मजबूत जनाधार वाली पार्टी का समर्थन मिल सकता है, वहीं टीएमसी को राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है. हालांकि यह केवल संभावनाएं हैं और फिलहाल किसी औपचारिक फैसले की घोषणा नहीं हुई है.
विरोधियों की बढ़ सकती है परेशानी
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस और टीएमसी करीब आती हैं तो इसका सबसे ज्यादा असर वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों पर पड़ सकता है.
लंबे समय से वाम दल इस उम्मीद में थे कि टीएमसी के कमजोर होने के बाद विपक्षी राजनीति में जो खाली जगह बनेगी, उसे वे भर सकेंगे. लेकिन अगर कांग्रेस और टीएमसी साथ आती हैं तो यह रणनीति प्रभावित हो सकती है.
क्यों मुश्किल माना जा रहा है विलय?
कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि टीएमसी और कांग्रेस का विलय जितना आसान दिखाई देता है, व्यवहारिक रूप से उतना सरल नहीं है.
ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर हमेशा स्वतंत्र और आक्रामक शैली का रहा है. वह कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाली नेता रही हैं. ऐसे में उनके लिए किसी अन्य संगठनात्मक ढांचे के तहत काम करना आसान नहीं माना जाता. यही वजह है कि कई विशेषज्ञ विलय की संभावना को सीमित मानते हैं.
कांग्रेस और ममता का पुराना रिश्ता
ममता बनर्जी का राजनीतिक उदय कांग्रेस से ही हुआ था. लेकिन 1990 के दशक में पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने अलग रास्ता चुना और 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की.
इसके बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया. कांग्रेस का जनाधार लगातार कमजोर होता गया जबकि टीएमसी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी. यही इतिहास आज फिर चर्चा में है क्योंकि दोनों दलों के बीच संभावित नजदीकियों की खबरें सामने आ रही हैं.
बंगाल की राजनीति का अगला अध्याय?
फिलहाल कांग्रेस और टीएमसी दोनों ने विलय की अटकलों को खारिज किया है. लेकिन जिस तरह से राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं, उससे यह साफ है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है.
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि ये मुलाकातें केवल राजनीतिक शिष्टाचार थीं या फिर विपक्षी राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआती भूमिका. इतना तय है कि बंगाल की राजनीति एक बार फिर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
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