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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आरोप, बरामदगी, SIT जांच और सीएम योगी की चेतावनी तक, जानिए पूरा घटनाक्रम
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, June 20, 2026
Last Updated On: Saturday, June 20, 2026
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों ने उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है. शुरुआत में इसे राजनीतिक आरोप माना गया, लेकिन बाद में जांच, कर्मचारियों के घरों से नकदी बरामद होने और विशेष जांच दल (SIT) [...]
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, June 20, 2026
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों ने उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है. शुरुआत में इसे राजनीतिक आरोप माना गया, लेकिन बाद में जांच, कर्मचारियों के घरों से नकदी बरामद होने और विशेष जांच दल (SIT) के गठन के बाद मामला गंभीर होता चला गया. अब यह विवाद सिर्फ मंदिर के चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्रवाई का बड़ा मुद्दा बन गया है.
7 जून: आरोपों की शुरुआत और सियासत का विस्फोट
इस विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने इस मामले को करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की. आरोप सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया. विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए, जबकि सत्तारूढ़ दल और मंदिर प्रबंधन ने आरोपों को निराधार बताया.
ट्रस्ट का इंकार और बीजेपी का पलटवार
आरोप लगने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सामने आए और उन्होंने किसी भी प्रकार की चोरी या गबन से इनकार किया. उनका कहना था कि मंदिर की आय-व्यय प्रक्रिया नियमित ऑडिट के दायरे में है. इसके बाद बीजेपी नेताओं, मंत्रियों और कई संतों ने विपक्ष पर राम मंदिर और सनातन पर अनावश्यक सवाल उठाने का आरोप लगाया. राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा.
9 और 10 जून: CBI जांच की मांग और PMO की एंट्री
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की CBI जांच की मांग की. अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली. इससे साफ हो गया कि मामला अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है और इसकी गंभीरता को शीर्ष स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है.
13 जून: SIT का गठन और नकदी बरामदगी
13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया. जांच का नेतृत्व लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत को सौंपा गया. इसी दिन जांच में बड़ा मोड़ तब आया जब मंदिर में दान की राशि गिनने वाले एक कर्मचारी के घर से लगभग 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. बताया गया कि यह रकम गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी.
सूत्रों के अनुसार जांच में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं. इनमें दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है. कुछ आरोपियों के घरों से सोना और अन्य कीमती सामान मिलने की भी जानकारी सामने आई है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में संबंधित लोगों की संपत्ति में असामान्य वृद्धि कैसे हुई.
16 जून: अयोध्या पहुंची SIT, कई घंटे चली पूछताछ
16 जून को SIT टीम अयोध्या पहुंची और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा बैंक अधिकारियों से लंबी पूछताछ की. जांच टीम ने कई लोगों के बयान दर्ज किए और मंदिर परिसर में घंटों तक दस्तावेजों की जांच की. ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों से भी विस्तृत जानकारी ली गई. पिछले कई दिनों में बैंक रिकॉर्ड, दान संग्रह प्रणाली और नकदी प्रबंधन प्रक्रिया की बारीकी से जांच की गई है.
विपक्ष का हमला और संतों की चिंता
जांच के बीच आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई. विपक्ष का कहना है कि राम मंदिर जैसे श्रद्धा के केंद्र में यदि आर्थिक अनियमितता हुई है तो दोषियों को तुरंत सजा मिलनी चाहिए. दूसरी ओर, कई संतों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने भी इस घटना को शर्मनाक बताया और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की.
शंकराचार्य और अन्य नेताओं ने भी उठाए सवाल
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मामले पर चिंता व्यक्त की और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. वहीं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यदि किसी ने आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए.
19 जून: अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री, दिया बड़ा संदेश
विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि जल्द ही “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा. मुख्यमंत्री के बयान के बाद विपक्ष ने भी पलटवार किया और मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग दोहराई.
जांच जारी, सबकी नजर रिपोर्ट पर
इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच अभी जारी है. मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी स्वीकार किया कि दान पात्र से जुड़ी व्यवस्था में कुछ गड़बड़ी के संकेत मिले हैं और इसकी जांच की जा रही है. हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. अब पूरे देश की नजर SIT की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यह मामला केवल धन की चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और राम मंदिर की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है.
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