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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में SIT रिपोर्ट से खुलासे, ट्रस्ट व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, June 24, 2026
Last Updated On: Wednesday, June 24, 2026
Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया है. चढ़ावे की गिनती, निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे हैं. जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, June 24, 2026
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, लेकिन हाल ही में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी 15 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें चढ़ावे के प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली चर्चा का विषय बन गई है.
चढ़ावा व्यवस्था की जांच में क्या मिला?
SIT की जांच में पता चला कि राम मंदिर में श्रद्धालु कई माध्यमों से चढ़ावा अर्पित करते हैं. इसमें हुंडी, ऑनलाइन भुगतान और नकद रसीद काउंटर प्रमुख हैं. जांच टीम ने बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर यह जानकारी जुटाई. रिपोर्ट के अनुसार सामान्य दिनों में हर महीने लगभग 25 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, जबकि महाकुंभ के दौरान यह संख्या एक महीने में करीब एक करोड़ तक पहुंच गई थी.
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि औसतन एक श्रद्धालु द्वारा 15 से 18 रुपये का चढ़ावा दिया जाता है. हालांकि इस गणना में सोना, चांदी, अनाज, घी और अन्य वस्तुओं के दान को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उनके संबंध में पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं थे.
श्रद्धालु बढ़े, लेकिन चढ़ावा घटा
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुछ महीनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बावजूद चढ़ावे की राशि अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई. इस विसंगति को लेकर जब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो बताया गया कि उन अवधियों में नोटों की तुलना में सिक्कों का चढ़ावा अधिक आया Set featured imageथा. हालांकि जांच एजेंसियों ने इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह पर्याप्त नहीं माना और मामले की गहन जांच की आवश्यकता बताई है.
बिना आदेश के काम कर रहे थे कर्मचारी
SIT की रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन के भीतर कार्यरत कुछ कर्मचारियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. जांच में पाया गया कि कई कर्मचारी ऐसे कार्यों का संचालन कर रहे थे, जिनके लिए कोई लिखित आदेश या आधिकारिक नियुक्ति दस्तावेज उपलब्ध नहीं था. इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग गया है.
निगरानी समिति की भूमिका पर भी सवाल
रिपोर्ट में चढ़ावा गिनती और उसकी निगरानी के लिए बनाई गई समिति की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा किया गया है. जांच एजेंसी का मानना है कि यदि निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी होती तो कई विसंगतियों को समय रहते रोका जा सकता था. समिति द्वारा पर्याप्त सतर्कता न बरतने के संकेत रिपोर्ट में दर्ज किए गए हैं.
कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है. रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, हालांकि अभी किसी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. SIT ने आगे की जांच में इन पहलुओं की विस्तार से पड़ताल करने की बात कही है.
संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी ने बढ़ाई शंका
जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति का भी विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कुछ व्यक्तियों की संपत्ति और आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. इसी आधार पर जांच एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोतों की भी समीक्षा शुरू की है.
CCTV और रिकॉर्ड से भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब
SIT ने मंदिर परिसर के CCTV फुटेज और उपलब्ध रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया. हालांकि जांच में कई सवाल सामने आए, लेकिन यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हो सका कि वास्तव में कितनी राशि का चढ़ावा आया और उसमें से कितनी राशि कथित रूप से गायब हुई. सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा दिए गए चढ़ावे का कोई व्यक्तिगत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था.
आगे क्या होगा?
SIT ने 60 से अधिक लोगों से पूछताछ करने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है. टीम ने संकेत दिया है कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और आगामी दिनों में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी. साथ ही ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं.
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