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राम मंदिर में आस्था का सैलाब: चढ़ावा विवाद के बावजूद दोगुना हुआ दान, श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 1, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 1, 2026
राम मंदिर में चढ़ावा विवाद का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है. अयोध्या में भक्तों की बढ़ती संख्या के साथ दानराशि भी लगातार बढ़ रही है. ट्रस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर को करोड़ों रुपये का दान मिला, जबकि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 1, 2026
Ram Mandir Donation Surge: अयोध्या स्थित राम मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा विवाद सुर्खियों में रहा, लेकिन इसका असर श्रद्धालुओं की आस्था पर बिल्कुल भी दिखाई नहीं दिया. उल्टा मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या और दान दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. यही वजह है कि मंदिर परिसर में पहले की तुलना में अधिक चहल-पहल देखने को मिल रही है. यह स्थिति बताती है कि किसी भी विवाद से ऊपर उठकर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास को प्राथमिकता दे रहे हैं.
रोजाना जमा होने वाला दान लगभग दोगुना हुआ
बैंक सूत्रों के अनुसार, पहले मंदिर में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 लाख रुपये दान के रूप में जमा होते थे, लेकिन अब यह राशि बढ़कर करीब 20 से 24 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है. हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से नहीं की गई है, लेकिन बैंक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से दान में भी तेजी आई है. श्रद्धालु न केवल दर्शन कर रहे हैं, बल्कि अपनी श्रद्धा के अनुसार उदारतापूर्वक दान भी दे रहे हैं.
वार्षिक रिपोर्ट में सामने आए करोड़ों रुपये के दान के आंकड़े
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर को एक वर्ष के दौरान कुल 327 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई. वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में मंदिर को 153 करोड़ रुपये का दान मिला. यदि इस राशि का औसत निकाला जाए तो प्रतिदिन लगभग 41.92 लाख रुपये, प्रतिघंटा करीब 1.75 लाख रुपये और प्रति मिनट लगभग 2,912 रुपये का दान मंदिर को प्राप्त हुआ. ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राम मंदिर देश के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है.
विशेष अवसरों पर रिकॉर्ड स्तर का चढ़ावा
राम मंदिर में त्योहारों और विशेष अवसरों पर दान की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है. मंदिर के उद्घाटन के बाद जनवरी 2024 के पहले ही दिन लगभग 3.17 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ था. वहीं फरवरी 2024 में मात्र 11 दिनों के भीतर करीब 11 करोड़ रुपये का दान मिला, यानी औसतन प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये. यह दर्शाता है कि विशेष धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु खुले मन से दान करते हैं और मंदिर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं.
राम मंदिर में दान देने की पूरी व्यवस्था कैसे काम करती है?
राम मंदिर में दान की व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी बनाई गई है. दर्शन मार्ग के पास 20 से अधिक बड़े दान पात्र रखे गए हैं, जिनमें श्रद्धालु नकद राशि डाल सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम और कंप्यूटरीकृत काउंटरों के जरिए भी दान स्वीकार किया जाता है. दान पेटियों में जमा राशि की गिनती के लिए 14 सदस्यीय टीम कार्य करती है, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और ट्रस्ट के 3 प्रतिनिधि शामिल होते हैं. इसके अतिरिक्त श्रद्धालु सोना, चांदी, आभूषण, वस्त्र और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी भगवान राम को अर्पित करते हैं.
दो वर्षों में करोड़ों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से लेकर वर्ष 2026 तक अनुमानित 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु भगवान रामलला के दर्शन कर चुके हैं. सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, जबकि शनिवार, रविवार और प्रमुख धार्मिक पर्वों पर यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है. इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं का असर मंदिर की दानराशि पर भी साफ दिखाई देता है. नकद दान के अलावा बड़ी मात्रा में गुप्त दान और बहुमूल्य वस्तुएं भी मंदिर को प्राप्त होती हैं.
आस्था का संदेश: विवाद नहीं, विश्वास सबसे बड़ा
राम मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और विश्वास में कोई कमी नहीं आई है. बढ़ती दानराशि और लगातार बढ़ती दर्शनार्थियों की संख्या यह संकेत देती है कि लोगों की धार्मिक आस्था किसी भी विवाद से प्रभावित नहीं हुई है. आने वाले समय में भी यदि श्रद्धालुओं की यही भागीदारी बनी रहती है, तो राम मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी देश का एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र बना रहेगा.
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