आस्था के दरबार में करोड़ों का खेल? अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर में चढ़ावा विवाद, जानिए किस मंदिर में कितना घोटाला और कौन आरोपों के घेरे में

Authored By: Nishant Singh

Published On: Tuesday, July 14, 2026

Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026

अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर मंदिरों में चढ़ावा विवाद और कथित वित्तीय अनियमितताओं को दर्शाता सांकेतिक दृश्य
अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर मंदिरों में चढ़ावा विवाद और कथित वित्तीय अनियमितताओं को दर्शाता सांकेतिक दृश्य

Temple Offering Scam: अयोध्या के राम मंदिर, बद्रीनाथ धाम और नागौर के बुटाटी धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी ने देशभर में हलचल मचा दी है. कहीं आठ गिरफ्तारियां हुईं, कहीं कर्मचारी पकड़ा गया, तो कहीं 22 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए. जांच अभी जारी है. 

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026

Temple Offering Scam: देश के तीन बड़े धार्मिक स्थलों-अयोध्या के राम मंदिर, उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम और राजस्थान के नागौर स्थित बुटाटी धाम-में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों ने करोड़ों श्रद्धालुओं को झकझोर दिया है. तीनों मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं. कहीं नकद दान और कीमती सामान की कथित हेराफेरी का आरोप है, तो कहीं करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले के दस्तावेज सामने आए हैं. हालांकि सभी मामलों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है.

अयोध्या राम मंदिर: दान गिनती में गड़बड़ी का मामला

राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से नकद दान और कीमती सामान में बड़ी हेराफेरी का आरोप लगाया. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया.

23 जून 2026 को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई और दान की गिनती में शामिल 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया. सभी आरोपियों को अदालत ने 27 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि कथित रूप से कितनी रकम या कितनी मात्रा में सोना-चांदी गायब हुआ, लेकिन जांच नकद दान, सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ियों पर केंद्रित है.

इस दौरान पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई पदाधिकारियों के बयान दर्ज किए. वहीं फैजाबाद बार एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था.

बद्रीनाथ धाम: CCTV फुटेज से सामने आए आरोप

उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी दान प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे. मंदिर समिति के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने मंदिर के चढ़ावे से कीमती सामान और नकदी में हेराफेरी की.

यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर दान गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं के वीडियो वायरल हुए. इसके बाद मंदिर समिति ने आंतरिक जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए. 8 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की.

अब तक इस मामले में भी कितनी नकदी या कितनी कीमत का सामान गायब हुआ, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है. उत्तराखंड सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है.

नागौर का बुटाटी धाम: 22 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय गड़बड़ी

तीनों मामलों में सबसे बड़ा खुलासा राजस्थान के नागौर स्थित श्री चतुर्दास महाराज (बुटाटी धाम) में हुआ है. यहां जिला प्रशासन की 13 सदस्यीय जांच समिति ने 146 दिनों तक ऑडिट करने के बाद लगभग 22 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलने का दावा किया है.

जांच रिपोर्ट के अनुसार कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं-

  • मंदिर के रिकॉर्ड में 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोना दर्ज था.
  • नई समिति को चार्ज लेते समय 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना मिला.
  • करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपये मूल्य की इन संपत्तियों का सही लेखा-जोखा अकाउंट बुक और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज नहीं मिला.
  • CCTV कैमरों पर दो वर्षों में 82.41 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन न टेंडर मिला और न ही उचित कोटेशन.
  • “एम जंक्शन सर्विसेज” के नाम पर 58.14 लाख रुपये का भुगतान दर्ज हुआ, जबकि वाउचर किसी दूसरी फर्म “राणाबाई ट्रेडर्स” के नाम से जारी किए गए.
  • गांव के विकास और मरम्मत कार्यों में 1 करोड़ 28 लाख रुपये की कथित अनियमितताएं सामने आईं.
  • डाइनिंग हॉल निर्माण पर 49.49 लाख रुपये खर्च दिखाया गया, जबकि जांच में पता चला कि पूरा निर्माण एक भामाशाह ने अपने निजी खर्च से कराया था.
  • रसोई (किचन) का खर्च एक वर्ष में 335 प्रतिशत बढ़कर 90.64 लाख रुपये पहुंच गया.
  • दो वर्षों में रसोई पर कुल 1 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्ज किए गए, लेकिन न जीएसटी बिल मिले, न सप्लायर का रिकॉर्ड और न ही भोजन वितरण का कोई दस्तावेज.

जिला प्रशासन ने इस रिपोर्ट को अदालत में पेश करने का निर्णय लिया है और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

तीनों मामलों की तुलना

मंदिर आरोप कार्रवाई कथित राशि/गड़बड़ी
अयोध्या राम मंदिर दान गिनती में हेराफेरी 8 गिरफ्तार, SIT जांच राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं
बद्रीनाथ धाम दान प्रबंधन में चोरी निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल गिरफ्तार राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं
बुटाटी धाम, नागौर वित्तीय गबन और फर्जी भुगतान प्रशासनिक जांच पूरी 22 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितता

आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग तेज

इन तीनों घटनाओं ने धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. श्रद्धालु मंदिरों में विश्वास के साथ नकद, सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ाते हैं. ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था पर भी चोट मानी जाती है.

फिलहाल तीनों मामलों में जांच जारी है. अयोध्या और बद्रीनाथ में अंतिम जांच रिपोर्ट आना बाकी है, जबकि नागौर में विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अदालत में आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. इन मामलों के बाद मंदिरों में डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट और दान प्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग भी तेज हो गई है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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