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कलिंग सेना बनाम ISKCON: आखिर जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर क्यों बढ़ा विवाद, क्या है पूरे मामले की सच्चाई?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, July 11, 2026
Last Updated On: Saturday, July 11, 2026
Kalinga Sena vs. ISKCON: ओडिशा में कलिंग सेना और ISKCON के बीच जगन्नाथ रथ यात्रा की तिथि को लेकर विवाद गहरा गया है. कलिंग सेना का आरोप है कि ISKCON पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का पालन नहीं कर रहा, जबकि ISKCON वैश्विक स्तर पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रथ यात्रा आयोजित करने की बात कहता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, July 11, 2026
Kalinga Sena vs. ISKCON: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है. लेकिन इस बार रथ यात्रा शुरू होने से पहले एक नया विवाद सामने आ गया है. ओडिशा के क्षेत्रीय संगठन कलिंग सेना ने ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) पर परंपराओं से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है. संगठन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शास्त्रों में तय तिथि पर ही निकाली जानी चाहिए. इसी मुद्दे को लेकर भुवनेश्वर में विरोध प्रदर्शन भी किया गया और ISKCON को चेतावनी दी गई कि वह धार्मिक परंपराओं का सम्मान करे.
क्या है कलिंग सेना और कब हुई इसकी शुरुआत?
कलिंग सेना ओडिशा का एक क्षेत्रीय सामाजिक और राजनीतिक संगठन है. यह खुद को ओड़िया संस्कृति, भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और राज्य की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने वाला संगठन बताता है. संगठन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसकी स्थापना 7 नवंबर 2001 को हेमंत रथ ने की थी. इसका उद्देश्य लोगों को प्राचीन कलिंग साम्राज्य के गौरव, इतिहास, कला और संस्कृति से जोड़ना था. समय के साथ संगठन ने राजनीतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेना शुरू किया और कई चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे. हालांकि अब तक उसे किसी चुनाव में सफलता नहीं मिली, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों पर उसकी सक्रियता लगातार बनी हुई है.
ISKCON से आखिर विवाद क्यों हुआ?
विवाद की सबसे बड़ी वजह रथ यात्रा की तारीख को लेकर है. पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन निकाली जाती है. वहीं ISKCON विदेशों में स्थानीय परिस्थितियों, मौसम और भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा का आयोजन करता है. मंदिर से जुड़े कई परंपरागत पक्षों का मानना है कि ऐसा करने से मूल धार्मिक परंपरा कमजोर होती है. दूसरी ओर ISKCON का कहना है कि भगवान जगन्नाथ पूरी दुनिया के हैं और उनका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आयोजन करना आवश्यक होता है.
कलिंग सेना की आपत्ति और बढ़ता विवाद
कलिंग सेना के अध्यक्ष हेमंत रथ ने ISKCON की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि संगठन पारंपरिक तिथि का पालन नहीं करता, तो उसके कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि रथ यात्रा के दौरान ISKCON के भक्तों को पुरी में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जाएगी. इसी विवाद के बीच संगठन ने यह आरोप भी लगाया कि ISKCON ने पुरी के गजपति महाराजा की अपील को नजरअंदाज किया है. गौरतलब है कि गजपति महाराजा को भगवान जगन्नाथ का प्रथम सेवक माना जाता है और उनकी धार्मिक भूमिका विशेष महत्व रखती है.
अब आगे क्या हो सकता है?
यह विवाद केवल दो संगठनों के मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि परंपरा और वैश्विक धार्मिक विस्तार के बीच संतुलन का भी प्रश्न बन गया है. एक पक्ष शास्त्रों के अनुसार तय तिथि और परंपराओं को सर्वोच्च मानता है, जबकि दूसरा पक्ष भगवान जगन्नाथ के संदेश को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने पर जोर देता है. ऐसे मामलों में संवाद और आपसी समझ सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए उम्मीद की जा रही है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालेंगे, ताकि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रद्धा, सौहार्द और परंपरा के साथ संपन्न हो सके.
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