Special Coverage
होर्मुज में बढ़ते खतरे के बीच भारत का बड़ा फैसला, ‘Seafarer First’ प्लान से नाविकों की सुरक्षा होगी मजबूत
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 15, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 15, 2026
Seafarer First: होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए 'Seafarer First' योजना शुरू की है. इसके तहत रियल-टाइम मॉनिटरिंग, समर्पित संपर्क अधिकारी और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे, ताकि संकट के समय त्वरित सहायता मिल सके.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 15, 2026
Seafarer First: मध्य-पूर्व के रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. इन घटनाओं का असर भारत पर भी पड़ा, क्योंकि प्रभावित जहाजों पर भारतीय नाविक भी मौजूद थे. एक भारतीय नाविक की मौत और कई अन्य के घायल होने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘Seafarer First’ योजना लागू करने का फैसला किया. इस पहल का उद्देश्य समुद्र में काम कर रहे हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संकट की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना है.
उच्च स्तरीय बैठक में बनी नई रणनीति
केंद्रीय बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, जहाजरानी महानिदेशालय (DGS), जहाजरानी राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और ईरान व ओमान में भारतीय दूतावासों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में मौजूदा सुरक्षा हालात की समीक्षा की गई. मंत्री ने स्पष्ट कहा कि वैश्विक व्यापार को आगे बढ़ाने में भारतीय नाविकों की अहम भूमिका है और उनकी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
सरकार ने उठाए ये बड़े कदम
नाविकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं.
मुख्य फैसले इस प्रकार हैं:
- ‘Seafarer First’ सुरक्षा योजना लागू की गई.
- फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में मौजूद जहाजों की निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा.
- किसी भी देश के झंडे वाले जहाज पर मौजूद हर भारतीय नाविक का रिकॉर्ड रखा जाएगा.
- सुरक्षा स्थिति की लगातार निगरानी की जाएगी.
- संबंधित सभी सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करना आसान होगा.
हर नाविक के परिवार को मिलेगा सीधा सहयोग
सरकार ने प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए भी विशेष व्यवस्था की है. प्रत्येक प्रभावित भारतीय नाविक के लिए एक समर्पित संपर्क अधिकारी (Dedicated Contact Officer) नियुक्त किया जाएगा.
संपर्क अधिकारी की जिम्मेदारियां होंगी:
- परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखना.
- इलाज से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराना.
- यात्रा और घर वापसी की प्रक्रिया में मदद करना.
- मुआवजा और नाविक कल्याण योजनाओं से जुड़ी जानकारी देना.
- सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना.
इस व्यवस्था का उद्देश्य संकट के समय परिवारों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है.
बिना सुरक्षा आकलन के आगे नहीं बढ़ेंगे जहाज
सरकार ने समुद्री कंपनियों और जहाज संचालकों के लिए भी नए निर्देश जारी किए हैं. अब कोई भी जहाज नए सुरक्षा आकलन और जहाज के मास्टर की मंजूरी के बिना संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ेगा. साथ ही जहाज मालिकों और एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी भारतीय नाविक को पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना जोखिम भरे क्षेत्र में काम करने के लिए मजबूर न किया जाए.
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है और यहां बढ़ते तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है. ऐसे समय में भारत सरकार का ‘Seafarer First’ प्लान केवल एक आपातकालीन कदम नहीं, बल्कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके परिवारों के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. सरकार ने साफ कर दिया है कि विदेशों में काम कर रहे हर भारतीय नाविक की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
यह भी पढ़ें :- भारत-यूके FTA से किसानों की बदलेगी किस्मत, अब इन फसलों को बिना टैक्स बेच सकेंगे, बढ़ेगी कमाई














