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मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर किया पलटवार, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन तक पहुंची जंग की आंच
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, July 13, 2026
Last Updated On: Monday, July 13, 2026
US Iran War: अमेरिका के ताजा सैन्य हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया. बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में सुरक्षा चिंताएं गहरा गई हैं और पूरे क्षेत्र पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, July 13, 2026
US Iran War: मिडिल ईस्ट में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब पहले से कहीं अधिक खतरनाक दौर में पहुंच गया है. अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस पलटवार में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष पर टिक गई हैं.
अमेरिका के हमले का ईरान ने दिया जवाब
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में ईरान के पांच राज्यों में मौजूद कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया था. इन हमलों के बाद ईरान ने सोमवार को जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों पर निशाना साधा. ईरान का कहना है कि यह हमला उसके खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई का जवाब है. तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि यदि अमेरिका अपने हमले नहीं रोकता, तो आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी.
किन देशों में हुए हमले?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिका से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
हमले के प्रमुख लक्ष्य:
- बहरीन: अमेरिकी ड्रोन कमांड सेंटर पर हमला.
- कुवैत: अमेरिकी सैन्य ठिकानों और आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया गया.
- जॉर्डन: प्रिंस हसन एयरबेस के फ्यूल टैंक और मिसाइल डिपो पर हमला.
ईरान ने इन हमलों के साथ अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसके क्षेत्रीय ठिकाने भी सुरक्षित नहीं रहेंगे.
जॉर्डन और कुवैत ने किया जवाबी बचाव
हमलों के बाद जॉर्डन और कुवैत ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया. जॉर्डन ने दावा किया कि उसने ईरान की चार मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया. वहीं कुवैत ने भी कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया. हालांकि, कुवैत के उत्तरी सीमा क्षेत्र की कुछ चौकियों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा एक ड्रोन हमले में कुवैत ऑयल कंपनी के एक ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक कर्मचारी घायल हो गया.
अमेरिका ने भी बढ़ाई सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ दिनों में ईरान के सैन्य ढांचे पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है. बताया जा रहा है कि केवल एक रात में करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि तीन दिनों में कुल 300 से अधिक हमले किए गए. इन अभियानों में सैन्य अड्डों, हथियार भंडार और रणनीतिक ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया. यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
ईरान की चेतावनी और बढ़ी वैश्विक चिंता
जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहा, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर और बड़े हमले किए जाएंगे. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है.
पूरी दुनिया की नजरें अगले कदम पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव अब दो देशों की लड़ाई भर नहीं रह गया है. बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों का इस संघर्ष की चपेट में आना यह दिखाता है कि हालात कितने संवेदनशील हो चुके हैं. लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है. अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या यह संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय संकट में बदलता है.
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