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क्या कलयुग का अंत करीब है? शास्त्रों में बताए संकेत क्या कहते हैं, जानिए पूरी सच्चाई
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 22, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 22, 2026
Kalki Puran: समाज में बढ़ती हिंसा, लालच, धोखाधड़ी और नैतिक मूल्यों में गिरावट को देखकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कलयुग अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. हिंदू धर्म में समय को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग में विभाजित किया गया है. वर्तमान समय को कलयुग माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसकी कुल अवधि 4,32,000 वर्ष है और अब तक इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही बीता है. इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से कलयुग का अंत अभी निकट नहीं माना जाता.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 22, 2026
Kalki Puran: समाज में बढ़ती हिंसा, लालच, धोखाधड़ी और नैतिक मूल्यों में गिरावट को देखकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कलयुग अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. हिंदू धर्म में समय को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग में विभाजित किया गया है. वर्तमान समय को कलयुग माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसकी कुल अवधि 4,32,000 वर्ष है और अब तक इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही बीता है. इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से कलयुग का अंत अभी निकट नहीं माना जाता.
शास्त्रों में क्या है कलियुग का वर्णन?
श्रीमद्भगवद्गीता में कलियुग के अंत की कोई निश्चित तिथि नहीं बताई गई है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने यह संदेश अवश्य दिया है कि जब भी अधर्म बढ़ेगा और धर्म कमजोर होगा, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में संसार में संतुलन स्थापित करेंगे. वहीं कल्कि पुराण में बताया गया है कि समय के साथ मनुष्य के विचारों में स्वार्थ बढ़ेगा, सत्य और ईमानदारी कमजोर होगी तथा धन और शक्ति को ही सबसे बड़ा मान लिया जाएगा. इन बातों को समाज के लिए एक चेतावनी और आत्मचिंतन का संदेश भी माना जाता है.
कल्कि अवतार की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब अन्याय और अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में प्रकट होंगे. कहा जाता है कि वे अधर्म का अंत कर धर्म की पुनः स्थापना करेंगे और एक नए सतयुग की शुरुआत होगी. कई विद्वान इस कथा को प्रतीकात्मक रूप में भी देखते हैं. उनका मानना है कि जब समाज में बुराइयां बढ़ती हैं, तब परिवर्तन की एक नई शुरुआत भी होती है, जो सकारात्मक दिशा दिखाती है.
क्या आज दिखाई दे रहे हैं संकेत?
कई लोग वर्तमान समय की घटनाओं को कलियुग के संकेतों से जोड़कर देखते हैं. प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि, रिश्तों में स्वार्थ, सामाजिक तनाव और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसी बातें अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं. वहीं कुछ धार्मिक मान्यताओं में उत्तर प्रदेश के संभल को कल्कि अवतार का जन्मस्थान बताया गया है. महाराष्ट्र के केदारेश्वर मंदिर और जोशीमठ से जुड़ी कुछ लोकमान्यताएं भी समय-समय पर चर्चा में रहती हैं. हालांकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इन्हें आस्था के रूप में ही देखा जाता है.
धर्म का वास्तविक संदेश
धार्मिक ग्रंथ केवल भविष्य की घटनाओं का वर्णन नहीं करते, बल्कि बेहतर जीवन जीने की सीख भी देते हैं. उनका संदेश है कि यदि व्यक्ति सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार को अपनाए तो समाज में संतुलन बना रह सकता है. इसलिए कलियुग के अंत को लेकर डरने की बजाय अपने कर्मों को सुधारना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है. यही सनातन परंपरा का मूल संदेश भी है.
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