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Ashadha Purnima 2026: 28 या 29 जुलाई? जानिए सही तिथि, स्नान-दान का शुभ समय और गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, July 21, 2026
Last Updated On: Tuesday, July 21, 2026
Ashadha Purnima 2026: आषाढ़ पूर्णिमा 2026 का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा, गुरु पूजन और दान का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पावन तिथि पर किए गए शुभ कार्य सुख, समृद्धि और अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, July 21, 2026
Ashadha Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दिन को आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर पवित्र नदी में स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा, गुरु वंदना और जरूरतमंदों को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर आषाढ़ पूर्णिमा 28 जुलाई को मनाई जाएगी या 29 जुलाई को. आइए जानते हैं इसका सही उत्तर और इस दिन का धार्मिक महत्व.
28 या 29 जुलाई, किस दिन मनाई जाएगी आषाढ़ पूर्णिमा?
द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे शुरू होगी और 29 जुलाई को रात 8:05 बजे समाप्त होगी. हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं. चूंकि 29 जुलाई की सुबह सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए आषाढ़ पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा. इसी दिन व्रत, स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा.
स्नान-दान का सबसे शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे के बीच स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है. यदि किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर जाना संभव न हो, तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है. स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र जाप और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. हालांकि इस दिन पूरे दिन पूजा-पाठ और दान का शुभ समय माना जाता है.
भगवान विष्णु और सत्यनारायण कथा का महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है. कई श्रद्धालु अपने घरों में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन भी करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है. साथ ही जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.
यदि कोई व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा हो, तो इस दिन शाम के समय माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई यह आराधना धन संबंधी बाधाओं को दूर करने और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है.
क्यों कहा जाता है गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा?
आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दिन गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर माना जाता है. वहीं इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. उन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की. इसी कारण इस दिन गुरु, आचार्य और शिक्षकों का सम्मान करने की परंपरा है. विद्यार्थी और शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद लेकर ज्ञान, सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं.
इस दिन क्या करें?
आषाढ़ पूर्णिमा पर किए गए सत्कर्मों का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल, जल, छाता, मिठाई या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करनी चाहिए. इसके अलावा गौ माता को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
आषाढ़ पूर्णिमा 2026: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व | आषाढ़ पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा / व्यास पूर्णिमा |
| तिथि प्रारंभ | 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे |
| तिथि समाप्त | 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे |
| पर्व मनाने की तिथि | 29 जुलाई 2026 (उदयातिथि के अनुसार) |
| स्नान का शुभ समय | सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) |
| प्रमुख पूजा | भगवान विष्णु, सत्यनारायण, गुरु पूजन, लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजा |
| शुभ कार्य | स्नान, दान, जप, गौ सेवा, गुरु वंदना, सत्यनारायण कथा |
आषाढ़ पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, सेवा, दान और आत्मिक शुद्धि का संदेश देने वाला विशेष अवसर भी है. इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए पूजा-पाठ, दान और सेवा कार्यों को सनातन परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
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