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डीपफेक से पीएम मोदी की पोस्ट तक, आखिर क्यों भारत सरकार से माफी मांगनी पड़ी मार्क जुकरबर्ग को?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, August 5, 2026
Last Updated On: Wednesday, August 5, 2026
डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और पीएम मोदी की पोस्ट हटने के विवाद के बाद मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांगी है. सरकार ने प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर कंपनी के सामने सख्त रुख अपनाया.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, August 5, 2026
Mark Zuckerberg Apology India: सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) और भारत सरकार के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है. कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक कंटेंट, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई कमियों को लेकर सरकार के सामने खेद जताया है. सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ प्रकार के कंटेंट को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रमोशन किया गया था. इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है.
सरकार ने ‘सेफ हार्बर’ पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने मेटा के सामने स्पष्ट किया कि केवल खुद को “इंटरमीडियरी” बताना पर्याप्त नहीं है. सरकार का तर्क है कि जब कोई प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेटा ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए अपनी ओर से हुई कमियों पर खेद व्यक्त किया.
डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर सरकार की सख्ती
बैठक में सरकार ने सोशल मीडिया पर बढ़ते डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और अन्य आपत्तिजनक सामग्री को लेकर चिंता जताई. सरकार ने साफ कहा कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को देश के कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा. जवाब में मेटा ने दावा किया कि कंपनी के पास ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सख्त आंतरिक नियम मौजूद हैं और किसी भी तरह के दुरुपयोग को बढ़ावा देना उसकी नीति का हिस्सा नहीं है.
पीएम मोदी की पोस्ट हटने का मामला भी बना चर्चा का केंद्र
इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट का कुछ समय के लिए हट जाना भी रहा. यह पोस्ट युवाओं को संबोधित थी और इसमें प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया था. सरकार ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया. कंपनी ने सफाई देते हुए कहा कि पोस्ट तकनीकी गड़बड़ी के कारण हट गई थी, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया. इस घटना के लिए भी कंपनी ने खेद व्यक्त किया.
डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी बहस
मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मु World Newsलाकात की. इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, नियामकीय जिम्मेदारियों और प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता के नए मानक तय कर सकता है. डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों के बीच यह मामला तकनीक और कानून के संतुलन की अहम मिसाल बनकर सामने आया.
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