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अमेरिका का नया वीजा नियम: 50 देशों पर लागू होगा 20,000 डॉलर तक का वीजा बॉन्ड, क्या भारत प्रभावित है?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 1, 2026
Last Updated On: Saturday, August 1, 2026
New US Visa Rule: अमेरिका ने 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को स्थायी रूप से लागू कर दिया है, जिसके तहत कुछ आवेदकों को 20,000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है. फिलहाल भारत इस सूची में शामिल नहीं है. सरकार इसे अवैध इमिग्रेशन रोकने का कदम बता रही है, जबकि आलोचक इसका विरोध कर रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 1, 2026
New US Visa Rule: अमेरिका ने अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को स्थायी रूप से लागू करने का फैसला किया है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों की संख्या कम करना है जो वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रुक जाते हैं. हालांकि यह नियम फिलहाल भारत पर लागू नहीं होगा, लेकिन पड़ोसी देशों समेत कई देशों के नागरिक इसके दायरे में आएंगे. इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर इमिग्रेशन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
क्या है नया वीजा बॉन्ड प्रोग्राम?
अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने पायलट परियोजना की समीक्षा के बाद वीजा बॉन्ड प्रोग्राम को स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया है. इसके तहत चयनित देशों के नागरिकों को अमेरिका का बिजनेस (B-1) या टूरिस्ट (B-2) वीजा लेने से पहले एक निश्चित राशि बतौर सुरक्षा बॉन्ड जमा करनी पड़ सकती है. अधिकारियों का मानना है कि इससे वीजा नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
भारत इस सूची में है या नहीं?
भारतीय नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल भारत इस सूची में शामिल नहीं है. यह नियम मुख्य रूप से लगभग 50 देशों पर लागू किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों की है. इसके अलावा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे दक्षिण एशियाई देश भी इस नई नीति के दायरे में शामिल किए गए हैं. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में जरूरत के अनुसार अन्य देशों को भी इस सूची में जोड़ा जा सकता है.
कितना देना होगा बॉन्ड?
नई व्यवस्था के तहत अमेरिकी कॉन्सुलर अधिकारी वीजा आवेदकों से अधिकतम 20,000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा कराने की मांग कर सकते हैं. पहले पायलट प्रोग्राम में 5,000, 10,000 और 15,000 डॉलर के विकल्प थे, लेकिन अब 5,000 डॉलर वाला विकल्प समाप्त कर दिया गया है और अधिकतम सीमा बढ़ाकर 20,000 डॉलर कर दी गई है.
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी सरकार का कहना है कि एक वर्ष तक चले पायलट प्रोजेक्ट के दौरान यह पाया गया कि जिन लोगों ने बॉन्ड जमा किया, उन्होंने वीजा की शर्तों का बेहतर तरीके से पालन किया. सरकार का दावा है कि यह कदम उन लोगों पर नियंत्रण रखने में मदद करेगा जो वीजा समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुक जाते हैं.
आलोचना भी तेज हुई
इस फैसले को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे वैध यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और अमेरिका की यात्रा पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है. उनका यह भी मानना है कि कड़ी इमिग्रेशन नीतियों से कानूनी आवेदकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
ट्रंप प्रशासन का पक्ष
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अवैध इमिग्रेशन पर रोक लगाने के लिए जरूरी है. प्रशासन का तर्क है कि बॉन्ड प्रणाली वीजा नियमों के पालन को बेहतर बनाएगी और इमिग्रेशन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगी.
वहीं आलोचकों का आरोप है कि हाल के वर्षों में वीजा शुल्क बढ़ाने, सोशल मीडिया जांच को सख्त करने और अन्य प्रक्रियाओं के कारण कानूनी इमिग्रेशन भी पहले से अधिक जटिल हो गया है.
क्या होगा इसका असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई नीति का असर सबसे अधिक उन देशों के नागरिकों पर पड़ेगा जो पर्यटन, व्यापार या पारिवारिक कारणों से अमेरिका की यात्रा करते हैं. अधिक बॉन्ड राशि के कारण कई लोगों के लिए अमेरिका जाना महंगा हो सकता है. दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार को उम्मीद है कि इससे वीजा नियमों के उल्लंघन के मामलों में कमी आएगी.
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