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100% टैरिफ का खतरा, रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का नया दांव, भारत-चीन की बढ़ी चिंता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 29, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 29, 2026
Trump Tariff Fear: अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध विधेयक पर मतदान की तैयारी है. प्रस्ताव लागू होने पर रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इससे भारत और चीन की ऊर्जा रणनीति, तेल आयात और व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 29, 2026
Trump Tariff Fear: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका एक बार फिर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है. अमेरिकी सीनेट में एक नए प्रतिबंध विधेयक पर मतदान होने जा रहा है, जिसका असर केवल रूस तक सीमित नहीं रह सकता. यदि यह कानून लागू होता है, तो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भी भारी टैरिफ लगाया जा सकता है. इस सूची में भारत और चीन प्रमुख हैं. ऐसे में ऊर्जा कारोबार से लेकर व्यापारिक संबंधों तक कई क्षेत्रों में असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
क्या है नया विधेयक और क्यों है इतना अहम?
अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वे उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं. माना जा रहा है कि इस कदम का मकसद रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है. साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी दबाव बढ़ाने की रणनीति इसमें शामिल है.
भारत और चीन क्यों हैं सबसे ज्यादा प्रभावित?
रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े ग्राहकों में शामिल हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रियायती कीमतों पर रूसी तेल का आयात बढ़ाया, जिससे घरेलू ईंधन आपूर्ति और रिफाइनरियों को आर्थिक लाभ मिला. वहीं चीन भी प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदता है. ऐसे में यदि अमेरिका यह कानून लागू कर देता है और टैरिफ लगाता है, तो दोनों देशों के ऊर्जा आयात पर सीधा असर पड़ सकता है. इससे तेल व्यापार महंगा होने और ऊर्जा लागत बढ़ने की संभावना भी बन सकती है.
भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. रूस से मिलने वाला सस्ता तेल पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए अहम साबित हुआ है. यदि अमेरिकी टैरिफ लागू होते हैं, तो भारत को ऊर्जा खरीद की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है. इससे ईंधन की लागत, रिफाइनिंग सेक्टर और आयात खर्च पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी सीनेट में विधेयक किस रूप में पारित होता है और उसके बाद प्रशासन कौन-से कदम उठाता है.
अभी क्यों बनी हुई है अनिश्चितता?
इस प्रस्तावित कानून को लेकर अमेरिका के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई हैं. कुछ सांसदों का मानना है कि राष्ट्रपति को इतने व्यापक टैरिफ अधिकार देने से अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी असर पड़ सकता है और इसका बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है. फिलहाल सभी की निगाहें सीनेट की वोटिंग और उसके बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हैं. यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों के सामने नई आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं. भारत और चीन के लिए आने वाले दिनों में ऊर्जा नीति और वैश्विक व्यापार रणनीति पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी.
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