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बांग्लादेश में शेख हसीना की बढ़ीं मुश्किलें, 40 लोगों पर नए केस दर्ज, अदालत ने जारी किए गिरफ्तारी वारंट
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, July 28, 2026
Last Updated On: Tuesday, July 28, 2026
बांग्लादेश की विशेष अदालत ने 2013 की हिफाजत-ए-इस्लाम रैली में हुई मौतों के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 40 लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराध के नए आरोप दर्ज किए हैं. अदालत ने फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, July 28, 2026
Sheikh Hasina Bangladesh: बांग्लादेश की राजनीति में एक दशक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. देश की विशेष अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 40 लोगों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध से जुड़े नए आरोप दर्ज किए हैं. मामला मई 2013 में ढाका में हुई हिफाजत-ए-इस्लाम की रैली के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी. अदालत ने आरोपों पर संज्ञान लेते हुए फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिए हैं. इससे बांग्लादेश की राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
5 मई 2013 को कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम ने अपनी 13 मांगों को लेकर राजधानी ढाका में बड़ा प्रदर्शन किया था. संगठन की प्रमुख मांगों में ईशनिंदा कानून लागू करना और इस्लाम के अपमान पर कठोर सजा का प्रावधान शामिल था. तय समय के बाद भी प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ और हजारों प्रदर्शनकारी राजधानी के मोतीझील स्थित शपला चत्तर इलाके में डटे रहे. इसके बाद हालात बिगड़ने लगे और कई स्थानों पर हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं. सरकारी संपत्तियों, बसों, दुकानों और अन्य भवनों को नुकसान पहुंचाया गया. उस समय विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था.
रातभर चली कार्रवाई और मौतों पर विवाद
स्थिति बेकाबू होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने रातभर अभियान चलाकर प्रदर्शनकारियों को हटाया. अब मुख्य अभियोजक का दावा है कि उस कार्रवाई में ढाका समेत पांच जिलों में कुल 58 लोगों की मौत हुई थी. वहीं मानवाधिकार संगठन ‘अधिकार’ ने भी इस कार्रवाई को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया था. हालांकि तत्कालीन अवामी लीग सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि झड़प और भगदड़ में केवल 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे. सरकार का यह भी कहना था कि मृतकों की कुछ सूचियां तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं.
किन लोगों पर कार्रवाई हुई?
विशेष अदालत ने शेख हसीना के अलावा कई पूर्व मंत्रियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी आरोप दर्ज किए हैं. अदालत ने उन सभी आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है, जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं. अभियोजन पक्ष के अनुसार कुछ हाई-प्रोफाइल आरोपी पहले से ही हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है. यह मामला बांग्लादेश के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों में सबसे अहम माना जा रहा है.
पहले से कानूनी दबाव में हैं शेख हसीना
शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं. उनके खिलाफ पहले भी कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हो चुकी है. पिछले वर्ष इसी विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े मामले में उनकी गैरमौजूदगी में फैसला सुनाया था. इसके बाद अंतरिम सरकार ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण कानून में संशोधन कर पूर्व सरकार के नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में कार्रवाई का रास्ता और आसान बनाया. ऐसे में नए आरोप दर्ज होने के बाद शेख हसीना की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां पहले से अधिक बढ़ती नजर आ रही हैं.
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