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BRICS Summit 2026: Summit के लिए दुनिया के कई बड़े नेता नई दिल्ली पहुंचे, वैश्विक मंच पर बढ़ी हलचल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, September 12, 2026
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
BRICS Summit 2026: BRICS Summit 2026 के लिए दुनिया के कई बड़े नेता नई दिल्ली पहुंच चुके हैं. राजधानी में बढ़ी कूटनीतिक हलचल के बीच वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और Global South से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख द्विपक्षीय मुलाकातों और Summit से होने वाले अहम फैसलों पर भी दुनिया की नजर रहेगी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS Summit 2026 को लेकर दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हैं. Summit में शामिल होने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता नई दिल्ली पहुंच चुके हैं. बड़े नेताओं की मौजूदगी से राजधानी में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और इस बैठक को वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
दुनिया के बड़े नेताओं का नई दिल्ली पहुंचना बना चर्चा का विषय
BRICS की बढ़ती वैश्विक भूमिका के बीच इस Summit में शामिल होने वाले नेताओं का नई दिल्ली पहुंचना अपने आप में बड़ा घटनाक्रम है. अलग-अलग देशों के नेता ऐसे समय भारत आए हैं, जब दुनिया कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है. युद्ध, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों जैसे मुद्दे इस Summit की चर्चाओं में अहम रह सकते हैं.
कई बड़े मुद्दों पर होगी नेताओं की नजर
इस बार BRICS बैठक सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाली. दुनिया में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच सदस्य देश आपसी सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. खास तौर पर Global South की आवाज को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान रहने की उम्मीद है.
BRICS के सामने इस समय कुछ अहम विषय हैं:
- वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग
- ऊर्जा और वित्तीय सुरक्षा
- स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन की संभावनाएं
- Global South की भूमिका
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार
- विकासशील देशों के लिए निवेश और वित्तीय सहयोग
भारत के लिए Summit क्यों है खास?
इस Summit की मेजबानी भारत के लिए कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है. BRICS के विस्तार के बाद संगठन में अलग-अलग क्षेत्रों और आर्थिक परिस्थितियों वाले देशों की संख्या बढ़ी है. ऐसे में सभी देशों को एक साझा मंच पर लाकर सहमति बनाना भारत के लिए बड़ी जिम्मेदारी है.
भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों के मुद्दों को प्रमुखता देने के साथ-साथ बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकता है. BRICS देशों की संयुक्त आर्थिक ताकत भी इस मंच को वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाती है.
मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों पर भी रहेगी नजर
Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरे देशों के नेताओं के साथ होने वाली bilateral meetings भी काफी महत्वपूर्ण रहेंगी. खास तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बातचीत पर दुनिया की नजर रहेगी. इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
अमेरिका और डॉलर का मुद्दा भी अहम
BRICS की बढ़ती ताकत के बीच अमेरिका की नजर भी इस Summit पर रहेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले BRICS देशों की ओर से डॉलर के विकल्प को बढ़ावा देने की किसी कोशिश का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय सहयोग से जुड़े किसी भी फैसले को वैश्विक स्तर पर करीब से देखा जाएगा.
साझा बयान बनाना होगी बड़ी चुनौती
Summit के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग विचार रखने वाले सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की होगी. खासकर पश्चिमी देशों के साथ संबंधों और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर BRICS सदस्यों के विचार एक जैसे नहीं हैं. ऐसे में भारत के लिए ऐसा साझा रुख तैयार करना अहम होगा, जिसमें सभी सदस्य देश सहमत हो सकें.
नई दिल्ली से दुनिया को क्या संदेश मिलेगा?
BRICS Summit के लिए दुनिया के बड़े नेताओं का नई दिल्ली पहुंचना भारत की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत को भी दर्शाता है. अब नजर इस बात पर है कि दो दिनों की बैठकों से कौन से ठोस फैसले सामने आते हैं. अगर भारत सभी देशों के बीच संतुलन बनाते हुए सार्थक सहमति तैयार करने में सफल रहता है, तो यह Summit भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है.
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