Special Coverage
बिकने जा रहा IDBI बैंक: कर्मचारियों और पेंशनर्स का क्या होगा? सरकार ने दिया जवाब
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Friday, October 16, 2026
Last Updated On: Friday, October 16, 2026
केंद्रीय कैबिनेट ने IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स को बेचने की मंजूरी दे दी है। बैंक यूनियनें इसे 'विदेशीकरण' बता रही हैं और आज काली पट्टी बांधकर विरोध कर रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Friday, October 16, 2026
IDBI Bank Stake Sale: IDBI बैंक बिकने जा रहा है, और इसके साथ ही हजारों कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में सवाल उठ रहे हैं कि उनका आगे क्या होगा। सरकार भरोसा दिला रही है कि कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन बैंक यूनियनें इस फैसले से नाराज हैं और सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
सरकार ने बेचने को दी हरी झंडी
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता साफ कर दिया है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी को बेचने की मंजूरी दे दी। सौदा करीब 52,878 करोड़ रुपये का है, और बताया गया है कि कीमत 81 रुपये प्रति शेयर तय हुई है। बिकने वाली हिस्सेदारी में केंद्र सरकार के 30.48 फीसदी और LIC के 30.24 फीसदी शेयर शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक की बिक्री की यह प्रक्रिया करीब पांच साल से चल रही थी। यह कदम सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार का दावा: विनिवेश नहीं, पुनर्गठन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सौदे को ‘रणनीतिक विनिवेश’ नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक पुनर्गठन’ बताया है। उन्होंने साफ किया कि सरकार और LIC बैंक में अपनी कुछ हिस्सेदारी बनाए रखेंगे। सरकार इसे अब तक की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) डील भी बता रही है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक यह फैसला दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद लिया गया है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स को भरोसा
कर्मचारियों की चिंता पर DIPAM के सचिव अरुणीश चावला ने बिजनेस टुडे को बताया कि मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। पेंशनर्स के लिए अलग पेंशन फंड रखा गया है, इसलिए उनके पेंशन लाभ भी सुरक्षित रहेंगे। उनके मुताबिक बैंक का ‘रणनीतिक पुनर्गठन’ एक चलते हुए कारोबार के तौर पर हो रहा है। यानी बैंक का कामकाज जारी रहेगा और वह बोर्ड के तहत चलने वाली कंपनी बना रहेगा। कर्मचारियों से बातचीत की जिम्मेदारी भी बैंक प्रबंधन के पास रहेगी, और चावला ने कहा कि कर्मचारियों व पेंशनर्स को डरने की जरूरत नहीं है।
यूनियनों का विरोध: ‘यह विदेशीकरण है’
बैंक यूनियनें सरकार के इस फैसले से खुश नहीं हैं। सात यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) का दावा है कि वह बैंकिंग क्षेत्र के करीब 90 फीसदी कर्मचारियों की नुमाइंदगी करता है। संगठन ने इसे सिर्फ निजीकरण नहीं, बल्कि ‘विदेशीकरण’ बताया है, क्योंकि एक राष्ट्रीय महत्व के बैंक का नियंत्रण विदेशी निवेशक को जा रहा है। IDBI के अधिकारियों-कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने भी मांग की है कि सरकार फैसले की समीक्षा करे और जनता को यह सबूत दिखाए कि राष्ट्रीय संपत्ति बेहद कम कीमत पर नहीं बेची जा रही।
आज बांधेंगे काली पट्टी
विरोध के तौर पर UFBU ने अपने सदस्यों से आज, 16 अक्टूबर को, काली पट्टी बांधकर काम करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के बैंक में विदेशी निवेशक को नियंत्रण सौंपने के फैसले पर दोबारा विचार होना चाहिए।
शेयर गिरा, मंजूरियां बाकी
फैसले के बाद गुरुवार को बाजार खुलते ही IDBI बैंक का शेयर करीब 7.5 से 8 फीसदी टूट गया। सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है। सबसे पहले खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने ‘फिट एंड प्रॉपर’ जांच में खरा उतरना होगा, यानी यह साबित करना होगा कि वह बैंक चलाने के काबिल है। शेयर खरीद समझौते पर दस्तखत RBI की मंजूरी के बाद ही होंगे। इसके अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और दूसरे नियामकों की इजाजत भी लेनी होगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह प्रक्रिया मौजूदा वित्त वर्ष में पूरी हो जाए।
कौन है खरीदार फेयरफैक्स
फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स कनाडा की निवेश कंपनी है। इसके प्रमुख प्रेम वत्स हैं। असल खरीदार कंपनी का नाम 10955230 कनाडा इंक है, जो फेयरफैक्स की सहायक कंपनी है।
IDBI बैंक का सफर
IDBI की शुरुआत 1964 में एक विकास वित्त संस्था के तौर पर हुई थी। 2005 में इसका कमर्शियल बैंक वाला हिस्सा इसमें मिल गया और यह एक सरकारी बैंक बन गया। मार्च 2021 में यह RBI की पाबंदियों (PCA) से बाहर निकला था।
कुल मिलाकर सरकार भरोसा दे रही है और यूनियनें सवाल उठा रही हैं। असली तस्वीर RBI की मंजूरी, सौदे की अंतिम शर्तों और कर्मचारियों से होने वाली बातचीत के बाद साफ होगी।













