नीतीश की राह पर योगी आदित्यनाथ महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर दे रहे विशेष जोर

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Monday, September 21, 2026

Last Updated On: Tuesday, September 22, 2026

yogi women police
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Yogi Women Police को लेकर योगी आदित्यनाथ ने महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है. पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सरकार के इस फोकस को लेकर जानिए पूरी जानकारी

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Last Updated On: Tuesday, September 22, 2026

Yogi Women Police: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सोच नीतीश कुमार से कुछ मामलों में एक सी दिखती है. करीब 25 वर्ष मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने आधी आबादी को लेकर जो संवेदनशीलता दिखाई, कमोबेश योगी आदित्यनाथ भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ते दिखते हैं. मुख्यमंत्री योगी ने रविवार को नोएडा में पुलिस बल में महिलाओं की भर्ती और उनकी संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. इसके तहत प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 44,000 से अधिक हो गई है. अगले तीन-चार महीने में यह संख्या बढ़कर 50 हजार के पार हो जाएगी.

आधी आबादी की समाज में भागीदार को लेकर जितनी संवेदनशील उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ संजीदा है, उतनी बहुत कम राज्य की सरकारें हैं.

दिखने लगे हैं सकारात्मक बदलाव

दरअसल, महिला थानों (women police officers) और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या ज्यादा होने का सकारात्मक पक्ष यह हुआ है कि अब महिलाएं बेहिचक अपनी पीड़ा, व्यथा और उत्पीड़न की शिकायत करने लगी हैं. महिला पुलिसकर्मिंयों की संख्या बढ़ने से राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे में कई महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव आए हैं.

पारंपरिक रूप से थानों में पुरु षों के वर्चस्व के कारण ग्रामीण और शहरी महिलाएं अपनी शिकायतें (जैसे घरेलू हिंसा, छेड़खानी, दहेज उत्पीड़न या यौन शोषण) खुलकर नहीं बता पाती थीं. महिला पुलिसकर्मिंयों की मौजूदगी से पीड़ित महिलाएं अब बिना किसी झिझक या डर के अपनी बात रख पाती हैं, जिससे थानों का माहौल अधिक संवेदनशील और ‘वीमेन-फ्रेंडली‘ बना है.

 

संवदेनशील मामलों की बेहतर जांच

महिला और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों (जैसे बलात्कार, मानव तस्करी या पोक्सो एक्ट के तहत आने वाले अपराध) की जांच में महिला अधिकारियों की भूमिका बहुत प्रभावी हुई है पीड़ित महिला या बच्चे का बयान दर्ज करते समय एक महिला पुलिसकर्मी का होना कानूनी रूप से भी जरूरी है और यह उन्हें मानसिक संबल भी देता है. अब महिला पुलिसकर्मी सिर्फ ऑफिस या कागजी कामों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सक्रिय फील्ड ड्यूटी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और साइबर अपराधों की जांच में भी हिस्सा ले रही हैं.

टूट रही है जड़ता

इसके अलावा, पहले पुलिस बल को पूरी तरह पुरु षों का क्षेत्र माना जाता था. आज खाकी वर्दी में आत्मनिर्भर बेटियों को देखकर समाज की सोच बदली है और अन्य लड़िकयों में भी आगे बढ़ने का आत्मविास जगा है. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता: पुलिस की नौकरी मिलने से हजारों बेटियों को रोजगार मिला है, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुई हैं और परिवारों में उनके फैसलों को सम्मान मिलने लगा है. स्वाभविक है, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, इस बात को समझते हैं और महिलाओं की बेहतरी की गहरी समझ भी उनमें है. यही वजह है कि वो आधी आबादी की पुलिसकर्मी के तौर पर उनकी मौजूदगी को समाज और देश के लिए काफी अहमियत देते हैं.

बिहार में महिलाओं के लिए आरक्षण ने बदला भूगोल

बिहार में नीतीश कुमार सरकार द्वारा पुलिस भर्ती में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद, आज बिहार महिला पुलिसकर्मिंयों की संख्या और प्रतिशत के मामले में देश के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर है. बिहार में करीब 30,000 महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं. पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के 1 जनवरी 2020 तक राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिसकर्मिंयों के आंकड़ों के अनुसार बिहार पुलिस बल में महिलाओं की हिस्सेदारी 25.30 फीसद है, जो राज्यों में सबसे ज्यादा पाई गई. इसके अलावा पुलिस मुख्यालय ने महिलाओं और लड़िकयों की सुरक्षा के लिए सभी जिलों में ‘पुलिस दीदी‘ टीम (अभया ब्रिगेड) का गठन किया है, जिसने अब तक 600 से ज्यादा मनचलों पर कार्रवाई भी की गई है.

बिहार के बाद हिमाचल प्रदेश में 19.15 फीसद और चंडीगढ़ में 18.78 फीसद महिला पुलिसकर्मी है. वहीं लोकसभा में जारी किए गए एक दूसरे आंकड़े के अनुसार देश में सबसे ज्यादा महिला पुलिसकर्मिंयों की संख्या उत्तर प्रदेश में है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मिंयों की सबसे ज्यादा संख्या जनसंख्या के अंतर की वजह से हो सकती है. वैसे, बिहार में महिलाओं की पुलिस में भागीदारी बढ़ाने में आरक्षण की भी बड़ी अहम भूमिका रही है. नीतीश कुमार ने 2013 में पुलिस में महिलाओं के लिए 35 फीसद आरक्षण लागू किया था. इसके बाद पुलिस बल में महिला कर्मिंयों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला था.

अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार देशभर में करीब 2.4 लाख महिलाएं पुलिस बल में है. इनमें केवल 960 महिलाएं आईपीएस रैंक पर है, जबकि 24,322 महिलाएं गैर-आईपीएस अधिकारी पदों पर हैं. करीब 2.17 लाख महिलाएं कांस्टेबल स्तर पर कार्यरत है. रिपोर्ट के अनुसार पुलिस में काम करने वाली लगभग 90 फीसद महिलाएं कांस्टेबुलरी में है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने पुलिस में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े अपने निर्धारित टारगेट को पूरा नहीं किया है. हालांकि करीब 78 फीसद पुलिस थानों में अब महिला हेल्प डेस्क मौजूद हैं.

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