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Sloth Fever : अमेरिका और यूरोपीय देशों में स्लॉथ फीवर का आतंक, इस रोग की क्या है भारत में स्थिति
Sloth Fever : अमेरिका और यूरोपीय देशों में स्लॉथ फीवर का आतंक, इस रोग की क्या है भारत में स्थिति
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, September 5, 2024
Updated On: Thursday, September 5, 2024
ओरोपोच वायरस एक आर्थ्रोपोड जनित वायरस है। इंसेक्ट्स के एक समूह संक्रमित आर्थ्रोपोड्स (arthropods) के काटने से लोगों में एक प्रकार का वायरस ओरोपोच वायरस फैलता है। ओरोपोच वायरस रोग को रोकने के लिए कोई टीका या उपचार करने के लिए कोई दवा नहीं है। उपचार में मुख्य रूप से आराम करने, डीहाइड्रेशन को रोकने और एसिटामिनोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द की दवा लेने जैसे उपचार उपलब्ध हैं।
Authored By: स्मिता
Updated On: Thursday, September 5, 2024
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) अमेरिकियों को एक दुर्लभ कीट जनित वायरस (Oropouche Virus) के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। इसने कई यात्रियों को संक्रमित किया है। सीडीसी के अनुसार, मध्य अगस्त में क्यूबा से लौटने वाले अमेरिकी यात्रियों में ओरोपोच वायरस रोग (Oropouche fever) के 21 मामले पाए गए हैं। इसे स्लॉथ फीवर या आलस बुखार (Sloth fever) भी कहा जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के चिकित्सक और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यालय वायरस के बारे में जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति को यह बुखार होने की आशंका हो, तो वह तुरंत जांच कराये। यात्री खुद को कीड़ों के काटने से बचाएं।
ओरोपोच वायरस से होता है स्लॉथ फीवर (Oropouche Virus causes Sloth Fever)
वायरल डिजीज जर्नल के अनुसार, ओरोपोच वायरस एक आर्थ्रोपोड जनित वायरस है। इसका अर्थ यह है कि इंसेक्ट्स के एक समूह संक्रमित आर्थ्रोपोड्स (arthropods) के काटने से लोगों में एक प्रकार का वायरस ओरोपोच वायरस फैलता है। सीडीसी के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से काटने वाले मच्छरों की एक प्रजाति संक्रमित क्यूलिकोइड्स प्रैरीएंसिस द्वारा मनुष्यों में फैलता है।
भारत में स्लॉथ फीवर की स्थिति (Sloth Fever status in India)
भारत में अभी तक ओरोपोचे बुखार (Oropouche fever) का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है। संभावित खतरे को पहचानते हुए भारत हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले का पता लगाया जा सके और उसे अलग किया जा सके।
क्यों कहा जाता है स्लॉथ फीवर (Sloth Fever)
इसे स्लॉथ फीवर कहा जाता है, क्योंकि वायरस की जांच करने वाले वैज्ञानिकों ने इसे सबसे पहले तीन-पैर वाले स्लॉथ पशु में पाया था। ओरोपोच वायरस स्वाभाविक रूप से स्लॉथ, नॉन हुमन प्राइमेट और पक्षियों में रहता है। वास्तव में प्राकृतिक संचरण चक्र में स्लॉथ मेजबान के रूप में रहता है। यह अन्य पशुओं में भी यह मौजूद रहता है। ओरोपोच वायरस अमेज़ॅन बेसिन में स्थानिक है, जिसमें बोलीविया, कोलंबिया और पेरू शामिल हैं। सबसे पहली बार 1955 में त्रिनिदाद और टोबैगो के एक गांव में एक बुखारग्रस्त वनकर्मी में यह वायरस खोजा गया था। यहीं से यह क्यूबा, कैरिबियन देशों के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप में फ़ैल गया।
डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लक्षण (Sloth Fever Symptoms)
वायरल डिजीज जर्नल के अनुसार, ओरोपोच वायरस रोग में इन्क्यूबेशन पीरियड 3 से 10 दिन है। और यह डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी समान बीमारियों के लक्षणों से मेल खाती है। आम लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों में दर्द शामिल है। ये सभी लक्षण आमतौर पर दो से सात दिनों तक रहते हैं। फिर गायब हो जाते हैं। मरीजों को मतली, उल्टी, दाने, लाइट के प्रति संवेदनशीलता, चक्कर आना और आंखों के पीछे दर्द जैसे अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। इस वायरस से संक्रमित लोगों में लगभग एक सप्ताह बाद 50% या उससे अधिक लोगों में लक्षण फिर से दिखाई देते हैं। लगभग पांच दिनों से सात दिनों तक मौजूद रहने के बाद खत्म हो जाते हैं।
ओरोपोच वायरस रोग का कोई इलाज नहीं है (Sloth Fever Treatment)
वायरल डिजीज जर्नल के अनुसार, ओरोपोच वायरस रोग का निदान करने के लिए हेल्थ केयर प्रोवाइडर को प्रयोगशाला परीक्षणों का आदेश देना होता है। ओरोपोच वायरस रोग को रोकने के लिए कोई टीका या उपचार करने के लिए कोई दवा नहीं है। उपचार में मुख्य रूप से आराम करने, डीहाइड्रेशन को रोकने और एसिटामिनोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द की दवा लेने जैसे उपचार उपलब्ध हैं।
ब्लीडिंग के जोखिम को कम करने के लिए एस्पिरिन या अन्य नॉन-स्टेरायडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं ( anti-inflammatory drugs) न लेने की सलाह दी जाती है।
वायरस की रोकथाम (Sloth Fever Prevention)
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, ओरोपोच वायरस से संक्रमण की रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों या कीड़ों के काटने से बचना है। इन्सेक्ट रेपेलेंट का उपयोग करने, खिड़कियों और दरवाजों पर टाइट-फिटिंग स्क्रीन लगाने, लंबी आस्तीन वाली शर्ट और पैंट पहनने और बाहर जाने पर पंखे का उपयोग करना चाहिए।
संक्रमण के कारण गर्भावस्था के प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं, जिसमें भ्रूण की मृत्यु और जन्मजात विकृतियां शामिल हैं। गर्भपात या समय से पहले प्रसव और जन्मजात असामान्यता हो सकते हैं। विशेष रूप से वे जो वृद्ध हैं या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर है, संक्रमण को रोकने के लिए यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। गर्भवती महिलाएं बहुत जरूरी नहीं होने पर ओरोपोच वायरस नोटिस वाले देशों की यात्रा नहीं करें।