About Author: अंशु सिंह पिछले बीस वर्षों से हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। उनका कार्यकाल देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण और अन्य राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में प्रेरणादायक लेखन और संपादकीय योगदान के लिए उल्लेखनीय है। उन्होंने शिक्षा एवं करियर, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक मुद्दों, संस्कृति, प्रौद्योगिकी, यात्रा एवं पर्यटन, जीवनशैली और मनोरंजन जैसे विषयों पर कई प्रभावशाली लेख लिखे हैं। उनकी लेखनी में गहरी सामाजिक समझ और प्रगतिशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को न केवल जानकारी बल्कि प्रेरणा भी प्रदान करती है। उनके द्वारा लिखे गए सैकड़ों आलेख पाठकों के बीच गहरी छाप छोड़ चुके हैं।
Posts By: अंशु सिंह
भारत में पालतू जानवरों का पालन-पोषण शहरी मध्यवर्ग और नई पीढ़ी के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है. आज पालतू जानवरों को न केवल साथी, बल्कि परिवार के अभिन्न सदस्य के रूप में भी देखा जाता है. उनरे स्वास्थ्य, विशेष आहार, विलासिता और यहां तक कि सामाजिक समारोहों में शामिल करने को लेकर भी खास ध्यान रखा जाता है. रिसर्च कहते हैं कि पालतू जानवरों से लगाव मेंटल हेल्थ के लिए भी अच्छा है. लेकिन जब वे बिछड़ जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है, तो उस गम से उबरना मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में खुद को संभालना जरूरी है.
स्मोकिंग को हतोत्साहित करने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है. बावजूद इसके, यह पूरे भारत में एक आम समस्या बन गई है. विडंबना ये है कि इस जानलेवा आदत की गिरफ्त में छोटे एवं किशोर उम्र के बच्चे आ रहे हैं. वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण 2019 के अनुसार, 13 से 15 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चों में तंबाकू का प्रचलन 8.4 फीसदी था. इतना ही नहीं,11.4 फीसदी बच्चे अपना 7 वां जन्मदिन मनाने से पहले ही सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं. वहीं, 17.2 फीसदी बीड़ी और 24% बच्चे गुटखा, खैनी, ज़र्दा जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं.
प्री-डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैटी लिवर वाले बच्चों के मामले में भारत का दुनिया भर में दूसरा स्थान है. आज नौ साल की उम्र तक के बच्चे डायबिटीज की गिरफ्त में आ रहे हैं. जंक एवं प्रोसेस्ड फूड के कारण उनमें फैटी लिवर की शिकायत बढ़ गई है. लड़कियों में समय से पहले यौवन आ रहा है. थायरॉइड की समस्याएं विकसित हो रही हैं. ये सब तब है जब हमारे देश में प्राकृतिक फल, सब्जियों और अनाज की भरपूर उपलब्धता है. लेकिन बच्चों को यह सब पसंद नहीं. उनके गले के नीचे से घर का बना खाना उतर ही नहीं रहा. आखिर क्यों नहीं लुभा पा रहा बच्चों को मां के हाथ का बना भोजन?
भारत एक खतरनाक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है और वह है विटामिन डी की कमी. विडंबना यह है कि प्रचुर मात्रा में धूप होने के बावजूद, अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 70 से 90% भारतीयों में इस आवश्यक पोषक तत्व की कमी है. विटामिन डी कैल्शियम अवशोषण, प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य और समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में अगर इसकी कमी का निदान और उपचार नहीं हो पाता है, तो उससे गंभीर मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.
आज की तेज रफ्तार जिन्दगी में तनाव और चिंता आम बात हो गई है. चाहे काम का दबाव हो, निजी संघर्ष हों या स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं, कई लोग मानसिक रूप से काफी अधिक परेशान हो जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तनाव और चिंता आपके मूड को प्रभावित करने से ज्यादा कुछ कर सकते हैं? क्या ये ब्रेन एन्यूरिज्म जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं?
देश में ग्रामीण पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता में महिलाओं की बड़ी भूमिका देखी जा रही है. उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है. मध्यप्रदेश, उत्तरकाशी, असम, गोवा जैसे राज्यों की ग्रामीण महिलाएं होमस्टेज का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं. इससे महिला सशक्तीकरण को नई दिशा भी मिली है.
सोशल मीडिया, इंफ्लुएंसर्स एवं ट्रैवल ब्लॉगर्स का प्रभाव लोगों को घूमने के लिए प्रेरित कर रहा है. लेकिन आज किसी भी डेस्टिनेशन का चयन एक बड़ी चुनौती बन चुकी है, क्योंकि लोकप्रिय स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही. हालात इतने गंभीर हो जा रहे हैं कि अमुक शहर में सैलानियों के प्रवेश पर ही पाबंदी लगा दी जा रही. आखिर क्या है इस ‘ओवरटूरिज्म’ से बचने के उपाय? कैसे हम एक जिम्मेदार पर्यटक की भूमिका निभा सकते हैं?
भारतीयों का विश्वास है कि दिवाली पर श्रीलक्ष्मी के आह्वान के लिए स्वच्छता एवं पवित्रता आवश्यक है. इसलिए त्योहार से महीनों पहले घरों की साफ-सफाई शुरू हो जाती है. अब प्रश्न है कि क्या घर के कोनों को साफ करने से ही श्रीलक्ष्मी की कृपा बरसती है या बाह्य के साथ आंतरिक सफाई अर्थात् मन की सफाई भी महत्वपूर्ण है? अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोटिवेशनल स्पीकर एवं राजयोग मेडिटेशन शिक्षिका बीके शिवानी कहती हैं कि दिवाली पर पुरानी बातों को भूल, नए संस्कारों को आत्मसात करें. मन के मैल को साफ करें, उसे दिव्य एवं पवित्र बनाएं.
महाराष्ट्र के एक साधारण से चॉल में पली-बढ़ीं मधुरा बचाल ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वह अपनी पाककला से लाखों लोगों को प्रेरित करेंगी. लेकिन आज उनका यूट्यूब चैनल, ‘मधुराज रेसिपी’, घर-घर में जाना-पहचाना नाम बन चुका है.
साजो-श्रृंगार की परिभाषा बदल रही है. त्योहारों के अवसर पर भी नैचुरल लुक पर जोर दे रही हैं महिलाएं. फिर वह पहनावे में हो या गहनों में. हल्की-फुल्की ज्वेलरी का बढ़ता आकर्षण इस बात का गवाह है कि बदलते दौर की स्त्रियां अपने शौक को किस बखूबी से पूरा कर रही हैं. अब जब मौका दिवाली का है, तो इसमें भी मिनिमलिस्ट ज्वेलरी को प्राथमिकता मिल रही.




