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सोना या शेयर बाजार, लंबी रेस में कौन बनेगा असली विनर? जानें 1, 10, 15 और 20 साल के रिटर्न का पूरा हिसाब
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 22, 2026
Last Updated On: Monday, August 24, 2026
बीते एक साल में सोने ने 35.3 फीसदी रिटर्न देकर शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया, लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर बदल जाती है. 10, 15 और 20 साल के आंकड़े बताते हैं कि शेयर बाजार ने बेहतर रिटर्न दिया है. ऐसे में निवेशकों के लिए दोनों में संतुलन बनाना ज्यादा समझदारी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, August 24, 2026
Gold vs Stock Market: पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. बीते एक साल में सोने ने करीब 35.3 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स इसी अवधि में 5.4 फीसदी नीचे रहा. ऐसे में पहली नजर में सोना शेयर बाजार से काफी आगे दिखाई देता है. लेकिन अगर निवेश का नजरिया लंबी अवधि का हो, तो तस्वीर काफी बदल जाती है.
एक साल में सोने ने मारी बाजी
बीते एक साल में सोने का प्रदर्शन शेयर बाजार के मुकाबले बेहद मजबूत रहा है. जहां सोने ने करीब 35.3 फीसदी रिटर्न दिया, वहीं निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स में करीब 5.4 फीसदी की गिरावट आई. यानी इस अवधि में सोने में निवेश करने वाले लोगों को फायदा हुआ, जबकि इक्विटी निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ा. यही वजह है कि मौजूदा समय में कई निवेशक यह सोच रहे हैं कि क्या शेयरों से पैसा निकालकर सोने में लगाना बेहतर विकल्प होगा.
लंबी अवधि में कहानी बदल जाती है
हालांकि, निवेश का फैसला सिर्फ एक साल के प्रदर्शन को देखकर नहीं किया जाना चाहिए. लंबी अवधि यानी 10, 15 या 20 साल के नजरिए से देखें तो शेयर बाजार की तस्वीर ज्यादा मजबूत नजर आती है. उपलब्ध औसत रिटर्न के आधार पर सोने ने लंबे समय में करीब 10 फीसदी और शेयर बाजार ने करीब 12 फीसदी सालाना रिटर्न दिया. दो फीसदी का यह अंतर पहली नजर में छोटा लग सकता है, लेकिन कंपाउंडिंग के कारण कई वर्षों में यही अंतर बड़ी रकम में बदल जाता है.
₹1 लाख के निवेश की पूरी तस्वीर
अगर किसी निवेशक ने अलग-अलग समय अवधि के लिए ₹1 लाख का निवेश किया होता, तो अनुमानित परिणाम कुछ इस तरह दिखाई देते हैं. एक साल का आंकड़ा हालिया वास्तविक रिटर्न पर आधारित है, जबकि 10, 15 और 20 साल के आंकड़े क्रमशः सोने के 10 फीसदी और शेयरों के 12 फीसदी औसत सालाना रिटर्न को मानकर निकाले गए हैं.
सोने का काम सिर्फ रिटर्न देना नहीं
सोने को केवल रिटर्न के नजरिए से देखना सही नहीं होगा. इसकी सबसे बड़ी भूमिका पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने की होती है. जब शेयर बाजार में तेज गिरावट आती है या आर्थिक और वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना अक्सर निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में काम करता है. पिछले एक साल में भी इसका मजबूत प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि अलग-अलग एसेट क्लास में पैसा रखने से पोर्टफोलियो का जोखिम कम किया जा सकता है.
शेयर बाजार क्यों जरूरी है?
लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की बात करें तो शेयर बाजार को नजरअंदाज करना भी सही रणनीति नहीं होगी. कंपनियों की कमाई और कारोबार के बढ़ने के साथ शेयरों में पूंजी बढ़ाने की क्षमता रहती है. हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और कम समय में नुकसान भी हो सकता है. इसलिए शेयर बाजार में निवेश करने वाले व्यक्ति को धैर्य और लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है.
पूरा पैसा किसी एक जगह लगाना सही नहीं
इस तुलना से सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि निवेशक को सोना और शेयर बाजार में से किसी एक को चुनने के बजाय दोनों के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान देना चाहिए. लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए शेयर बाजार महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि सोना पोर्टफोलियो में सुरक्षा और डायवर्सिफिकेशन की भूमिका निभा सकता है. कितना पैसा किसमें लगाया जाए, यह निवेशक की उम्र, लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि पर निर्भर करता है.
नोट: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है. निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.
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