कन्नौज में क्या खुद ही बलि चढने गए अखिलेश

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Wednesday, May 1, 2024

Last Updated On: Thursday, May 16, 2024

akhlesh yadav and subhrat pathak
akhlesh yadav and subhrat pathak

1967 में स्थापित हुई थी कन्नौज लोकसभा सीट। सबसे पहले संसोपा के टिकट पर महान समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को इस सीट ने दिल्ली पहुंचाया था। मुख्यमंत्री रहे तीन बड़े नेताओं को भी इस क्षेत्र ने देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने का अवसर दिया। इनमें मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के अलावा शीला दीक्षित का नाम शामिल है। 2019 में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव यहां से हार गई थी। इसके बाद 2022 के इस क्षेत्र के विधानसभा चुनाव परिणाम भी प्रतिकूल ही रहे। अब अखिलेश की राह भी यहां आसान नहीं है।

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Thursday, May 16, 2024

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कन्नौज के रण में अपने को झोंक कर बड़ा राजनीतिक जोखिम मोल ले लिया है। भले ही कन्नौज लोकसभा सीट को सपा के सुरक्षित दुर्ग के रूप में प्रचारित किया जा रहा हो लेकिन यह हकीकत नहीं है। 2019 में जब सपा का बसपा के साथ गठबंधन था तो भी अखिलेश की पत्नी डिंपल भाजपा के सुब्रत पाठक के मुकाबले चुनाव हार गयी थीं। 2014 में उन्होंने सुब्रत पाठक को ही हराया था लेकिन तो भी उन्हें जीत के लिए लोहे के चने चबाने पड़ गए थे। सुब्रत पाठक के मुकाबले वे केवल 19 हजार वोटों की लीड ले पाई थीं। कन्नौज में लगभग 18 लाख मतदाता दर्ज हैं जिनमें ढाई लाख यादव, ढाई लाख मुसलमान, ढाई लाख ब्राह्मण और ढाई लाख ही अनुसूचित जाति के मतदाता हैं।

मुख्यमंत्री रहे तीन नेताओं को मिल चुका अवसर

कन्नौज लोकसभा सीट 1967 में स्थापित हुई थी। सबसे पहले संसोपा के टिकट पर महान समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को इस सीट ने दिल्ली पहुंचाया था। मुख्यमंत्री रहे तीन बड़े नेताओं को भी इस क्षेत्र ने देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने का अवसर दिया। इनमें मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के अलावा शीला दीक्षित का नाम शामिल है। शीला जी कन्नौज से 1984 में सांसद चुनी गयी थीं। बाद में वे 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

अखिलेश के लिए डेब्यू सीट

अखिलेश ने कन्नौज से राजनीति में डेब्यू किया था। 1999 में मुलायम सिंह यहां से निर्वाचित हुए। 2000 में उन्होंने प्रदेश की राजनीति में वापसी के लिए लोकसभा छोड़ दी तो अखिलेश को उम्मीदवारी के लिए नामित कर दिया। 2012 में जब अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपनी पत्नी डिंपल को पहली बार यहां से लोकसभा के लिए उम्मीदवार बनाया। उनका भी डेब्यू कामयाब रहा। लेकिन 2019 में अपनी इस लकी सीट पर डिंपल का मुहूर्त बिगड़ गया था।

अखिलेश नहीं थे दिल्ली जाने के इच्छुक

अखिलेश के लिए आज़मगढ़ जैसी निरापद सीट सुझाई जा रही थी, लेकिन वे दिल्ली जाकर उत्तर प्रदेश का मोर्चा अभी नहीं छोड़ना चाहते थे। आज़म खान ने उन पर रामपुर से पर्चा भरने का दबाब डाला पर वे कन्नी काट गए। अचानक उन्होंने अपना स्टैंड क्यों बदल लिया। उस पर तुर्रा यह कि कन्नौज में उन्हें तगड़ा मुकाबला झेलना पड़ सकता है। बसपा ने पहले ही सपा को घेरने के लिए इमरान बिन जफ़र को उम्मीदवार घोषित कर रखा है जो मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर सकते हैं। अनुमान है कि केंद्र में संभावित राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर अखिलेश ने यह दांव खेला है। उन्हें बताया गया है कि केंद्र में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने की स्थिति भी इस बार बन सकती है। अगर ऐसा होता है तो अखिलेश की महत्वाकाक्षा देवगौड़ा की तरह प्रधानमंत्री पद पर अपनी लाटरी खुल जाने के दिवास्वप्न का नजारा करा रही है। उन्हें राहुल के मुकाबले इंडि गठबंधन में खुद के लिए ज्यादा स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। ममता बनर्जी आदि उन्हें तरजीह देंगी। अखिलेश का अंदाजा कितना परवान चढ़ता है यह देखने वाली बात होगी।

कन्नौज से अभी तक चुने गए सांसद

कन्नौज लोकसभा सीट ने अभी तक 14 बार अपना सांसद चुना है। इनका विवरण इस तरह है:

  • वर्ष 1967-डॉ. राम मनोहर लोहिया (संसोपा)
  • वर्ष 1971-सत्यनारायण मिश्र (कांग्रेस)
  • वर्ष 1977-राम प्रकाश त्रिपाठी (जनता पार्टी)
  • वर्ष 1980-छोटे सिंह यादव (जपा)
  • वर्ष 1984-शीला दीक्षित (कांग्रेस)
  • वर्ष 1989-छोटे सिंह यादव (जनता दल)
  • वर्ष 1991-छोटे सिंह यादव (समाजवादी जनता पार्टी)
  • वर्ष 1996-चंद्र भूषण सिंह (भाजपा)
  • वर्ष 1998-प्रदीप यादव (सपा)
  • वर्ष 1999-मुलायम सिंह यादव (सपा)
  • वर्ष 2000-अखिलेश यादव (सपा)
  • वर्ष 2004-अखिलेश यादव (सपा)
  • वर्ष 2009-अखिलेश यादव (सपा)
  • वर्ष 2012-डिंपल यादव (सपा)
  • वर्ष 2014-डिंपल यादव (सपा)
  • वर्ष 2019-सुब्रत पाठक (भाजपा)
अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
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