अजय देवगन-तब्बू और जान्हवी कपूर की फिल्मों ने पहले दिन कितनी की कमाई?

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Sunday, August 4, 2024

aurore mein kahan dum tha and ulajh hindi movie
aurore mein kahan dum tha and ulajh hindi movie

अजय देवगन और तब्बू स्टारर 'औरों में कहां दम था' और जान्हवी कपूर की फिल्म ‘उलझ’ शुक्रवार 2 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जिनका दर्शकों को काफी समय से इंतजार था। फिल्म 'भोला' और 'दृश्यम' के बाद अजय देवगन और तब्बू एक बार फिर एक फिल्म में सामने आए हैं। इस फिल्म की पहले दिन की कमाई के आंकड़े सामने आ गए हैं। इसके साथ ही जान्हवी कपूर की 'उलझ' भी शुक्रवार को रिलीज़ हुई। आइए एक नजर डालते हैं कि इन दोनों फिल्मों में से किस फिल्म ने ज्यादा कमाई की...

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Tuesday, August 6, 2024

इस लेख में:

‘औरों में कहां दम था’ की पहले दिन की कमाई

अजय देवगन और तब्बू स्टारर रोमांटिक फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कलेक्शन नहीं कर पाई। उनकी पिछली फिल्मों की तुलना में इस फिल्म की पहले दिन की कमाई एक तरह से निराशाजनक ही रही। हालांकि इस फिल्म की वीकेंड कमाई (शनिवार और रविवार को) बढ़ सकती है। लेकिन सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म शुक्रवार को अपने पहले दिन केवल 2.1 करोड़ रुपये का कलेक्शन पाने में कामयाब हो सकी।

अजय और तब्बू बहुत बड़े स्टार हैं। माना जा रहा था कि उनके होने से यह फिल्म सिनेमाघरों में धमाल मचाएगी, जिससे कलेक्शन जोरदार होगा। यह उनकी एक साथ 10वीं फिल्म है, इस फिल्म की कमाई की तुलना में इस जोड़ी की फिल्में अक्सर बॉक्स ऑफिस पर हिट रही हैं। पर लगता यही है कि कहानी में दम कम होने के कारण यह फिल्म दर्शकों को खींच नहीं पाई।

जानें फिल्म के बारे में

  • प्रमुख कलाकार : अजय देवगन, तब्बू, शांतनु माहेश्वरी, सई मांजरेकर, जिमी शेरगिल, सयाजीराव शिंदे

  • लेखक और निर्देशक : नीरज पांडे

  • अवधि : दो घंटे 25 मिनट

पृष्ठभूमि और कहानी

पिछले कुछ समय से हिंदी सिनेमा में प्रेम कहानियां तो बन रही हैं, लेकिन उनमें हिंसा, सेक्स और मारधाड़ की भरमार होती है। ए वेडनेसडे, स्पेशल 26, बेबी, एमएस धौनी : द अनटोल्ड स्टेारी जैसी फिल्में देने वाले नीरज पांडेय से उम्मीद थी कि वह दिल छूने वाली प्रेम कहानी से लुभाएंगे, लेकिन कमजोर लेखन सारी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। कहानी मुंबई की है। दो मर्डर के आरोप में कृष्णा (अजय देवगन) 22 साल से जेल में सजा काट रहा है। अच्छे चाल चलन के कारण उसकी बची सजा माफ हो जाती है। जेल से बाहर आने पर उसके अतीत की परतें खुलती हैं। कृष्णा अपनी चाल में रहने वाली वसुधा (तब्बू) से प्यार करता है। वह जर्मनी जाने वाला होता है, उससे पहले एक हादसे से उसकी जिंदगी का रुख बदल जाता है। उधर, वसुधा भी उसकी रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रही है। वह उससे मिलने आती है। अब वह कामयाब और शादीशुदा महिला है। आलीशान बंगले में रहने वाली वसुधा उसे अपने पति अभिजीत (जिमी शेरगिल) से मिलवाती है। पुरानी यादों के साथ एक दबा राज भी सामने आता है।

कहानी में दम नहीं दिखता

जासूसी या थ्रिलर कंटेंट के महारथी नीरज लवस्टोरी की पिच पर खरे नहीं उतरते। मुंबई की चाल के माहौल में कोई जीवंतता नजर नहीं आती। यह कहानी दो कालखंडों में है, जिसमें 23 साल का अंतराल है। लिहाजा नीरज ने कृष्णा और वसुधा की युवावस्था में शांतनु माहेश्वरी और सई मांजरेकर को कास्ट किया है। अतीत से वर्तमान में कई बार आती-जाती इस फिल्म में कुछ दृश्यों को लेकर दोहराव है। इसी तरह फिल्म कृष्णा के जेल में संघर्ष को दिखाती है, लेकिन वसुधा के अतीत की झलक नहीं देती। चाल से निकली वसुधा और अभिजीत कैसे मिलते हैं? वह उससे शादी करने को क्यों राजी होती है? अभिजीत आखिर में वसुधा से सच्चाई बताने को कहता है। यह समझ नहीं आता कि उसे इसका अंदाजा कैसे हुआ? वसुधा 22 साल से कृष्णा का इंतजार क्यों कर रही है? ऐसे कई सवालों के जवाब अनुत्तरित रहते हैं। जेल में 22 साल में सिर्फ एक गैंगस्टर महेश देसाई (सयाजीराव शिंदे) आता है। वह भी अपनी सुरक्षा को लेकर डरा होता है, उसे सुरक्षा मिलती है कृष्णा से। यह प्रसंग बचकाना लगता है।

अजय देवगन का उपयोग ठीक से नहीं हो सका

युवा कृष्णा की भूमिका में शांतनु अजय का प्रतिरूप नहीं दिखते, पर उन्होंने काम अच्छा किया है। अजय देवगन के लिए यहां कुछ खास नया नहीं था। सई मांजरेकर पात्र के अनुरूप मासूम लगी हैं। तब्बू पात्र के अनुरूप हैं। जिमी का पात्र दानवीर कर्ण की तरह लगता है। फिल्म का कमजोर पक्ष उसका संगीत भी है। गीतकार मनोज मुंतशिर और संगीतकार एम एम किरवाणी के संगीत से जुड़ाव नहीं होता।

‘उलझ’ की पहले दिन की कमाई

उधर, शुक्रवार को ही रिलीज जान्हवी कपूर और गुलशन देवैया स्टारर ‘उलझ’ पहले दिन सिर्फ 1.10 करोड़ का कलेक्शन करने में सफल रही (इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक)। हालांकि इस फिल्म ने दुनिया भर में दो करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर हिट होने के लिए 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई करनी होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वीकेंड पर यानी शनिवार-रविवार को फिल्म की कमाई बढ़ती है या नहीं।

सुधांशु सरिया द्वारा निर्देशित, जासूसी थ्रिलर फिल्म में जान्हवी कपूर के साथ गुलशन देवैया और रोशन मैथ्यू भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण विनीत जैन और जंगली पिक्चर्स ने किया है। यह कहानी एक युवा आईएफएस अधिकारी (जान्हवी कपूर) की है।

जानें इस फिल्म के बारे में

  • प्रमुख कलाकार : जाह्नवी कपूर, गुलशन देवैया, राजेश तैलंग, आदिल हुसैन, रोशन मैथ्यू, मियांग चैंग

  • निर्देशक : सुधांशु सरिया

  • अवधि : दो घंटे 24 मिनट

फिल्म ‘उलझ’ युवा डिप्‍टी हाई कमिश्नर (जान्हवी कपूर) को केंद्र में रखकर बनी है, लेकिन कहानी का बैकड्राप भारत और पाकिस्‍तान ही है। भारत और पाकिस्‍तान के जटिल संबंध जगजाहिर है। ऐसे में फिल्‍म के एक दृश्‍य में जब भारतीय विदेश मंत्री कहते हैं कि तुम्‍हें पाकिस्‍तान की नीयत पर कोई शक लगता है तो लेखक और निर्देशक की इस दृश्‍य संरचना पर बेहद अफसोस होता है। बहरहाल, कहानी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहजाद आलम (रुशाद राणा) आतंकी यासीन मिर्जा को भारत वापस भेजने की घोषणा करते हैं, ताकि दोनों देशों के बीच दोस्‍ती की पहल हो सके। उधर, अफसरों के परिवार से आने वाली हावर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ी आइएफएस सुहाना भाटिया (जाह्नवी कपूर) के पिता धनराज भाटिया (आदिल हुसैन) साउथ कोरिया, रूस और जर्मनी जैसे देशों में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उन्‍हें संयुक्त राष्‍ट्र में भारत का स्‍थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है। काठमांडू में सुहाना की बुद्धिमत्ता की झलक दी जाती है। आइएफएस सुहाना को ब्रिटेन में भारतीय उच्‍चायोग में दूसरे सबसे उच्‍च पद पर तैनात किया जाता है। वह देश की सबसे युवा डिप्‍टी हाई कमिश्‍नर बनती है। सुहाना की तैनाती से उसका सहयोगी जैकब (मियांग चैंग) और सेबिन जोसेफ कुट्टी (रोशन मैथ्‍यू) खुश नहीं हैं। सुहाना की मुलाकात नकुल (गुलशन देवैया) से होती है। वह नकुल को दिल दे बैठती है, जो पाकिस्तानी एजेंट निकलता है। वह सुहाना के साथ अपना अंतरंग वीडियो दिखाकर उसे ब्‍लैकमेल करता है। उससे गोपनीय सूचनाएं निकलवाता है। ऐसे में दिल्‍ली में नकुल के नापाक मिशन को सुहाना रोक पाती है या नहीं, फिल्‍म इस संबंध में है।

खटकती है कहानी

परवेज शेख और सुधांशु सरिया द्वारा लिखी कहानी बेहद कमजोर है। सुहाना का पात्र और उसके आसपास का परिवेश विश्‍वसनीय नहीं लगता। पद और पारिवारिक विरासत के अनुरूप उसकी ताकत और चतुराई नहीं दिखती। जैकब की हत्‍या को ब्‍लास्‍ट बता दिया जाता है। भारत सरकार की तरफ से मामले को लेकर जांच की मांग नहीं होती, ये पहलू बहुत खटकते हैं। सुहाना जिस आजादी से नकुल के साथ घूमती-फिरती और अंतरंग संबंध बनाती है, उससे लगता ही नहीं कि वह इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात है। रा का चित्रण भी कमजोर है। सबसे अहम मुद्दा लीक सूचनाओं का था कि उससे भारत पर क्‍या असर पड़ा? इस पर कोई बात ही नहीं होती। ड्राइवर सलीम (राजेश तैलंग) देशभक्‍त था या गद्दार जैसे सवालों के जवाब ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलेंगे।

भावनात्मक दृश्यों में कमजोर हैं जान्हवी

फिल्‍मों का भार जाह्नवी कपूर के कंधों पर है। कहानी उन्‍हें ध्‍यान में रखते हुए लिखी गई है। उनके आसपास मंझे कलाकार हैं। भावनात्मक दृश्यों में वह कमजोर दिखती हैं। गुलशन देवैया प्रभाव छोड़ते हैं। मियांग चैंग के हिस्‍से में कुछ खास नहीं आया है। रोशन मैथ्‍यू के पात्र को भी समुचित तरीके से नहीं गढ़ा गया है। गीत-संगीत याद नहीं रहता। अंत में सीक्‍वल का संकेत अवश्‍य है।

(हिन्दुस्थान समाचार के इनपुट के साथ)

अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
Leave A Comment

अन्य मनोरंजन खबरें