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Bollywood Actresses turning to Spirituality : अध्यात्म से जुड़, जीवन के उद्देश्य को तलाश रहीं फिल्मी हसीनाएं
Authored By: अंशु सिंह
Published On: Tuesday, January 14, 2025
Last Updated On: Tuesday, January 14, 2025
धर्म एवं अध्यात्म के मार्ग पर चलना आसान नहीं है। वह भी ऐसी फिल्मी हस्तियों के लिए जिनकी दुनिया चकाचौंध से भरी होती है। बेतहाशा प्रतिस्पर्धा एवं एक-दूजे से आगे निकलनी की होड़ रहती है। फिल्म फ्लॉप होने लगे, चेहरे का आकर्षण एवं शरीर बेडौल होने लगे, तो मान लिया जाता है कि अब अमुक अभिनेत्री का सफर खत्म हुआ की हुआ। बाकी फिल्मी दुनिया के जटिल रिश्ते किसी भी शख्स को निराशा, अवसाद एवं अन्य मानसिक रोगों की जद में जाने से रोक नहीं पाते। यही वजह है कि बॉलीवुड के कई कलाकारों, यूं कहें अभिनेत्रियों ने सुकून एवं शांति की तलाश में फिल्मी दुनिया की ग्लैमर्स जिन्दगी, ऐशोआराम को त्याग कर, अध्यात्म के मार्ग पर चलने का बड़ा निर्णय ले लिया...। इनमें बरखा मदान, अनु अग्रवाल, जायरा वसीम से लेकर अन्य हसीनाएं शामिल हैं।
Authored By: अंशु सिंह
Last Updated On: Tuesday, January 14, 2025
Highlights
- बरखा मदान ने 1994 में मिस टूरिज्म इंडिया का जीता था खिताब
- 2012 में बौद्ध भिक्षु बनीं बरखा, अब ग्यालटेन समतेन (Gyalten Samten) नाम से हैं जानी जातीं
- 2022 में नुपूर अलंकार बनीं संन्यासी
- 2017 की मिस इंडिया रहीं इशिका तनेजा ने ली गुरु से दीक्षा
Bollywood Actresses turning to Spirituality : 90 के दशक में हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को कई नवोदित अभिनेत्रियां मिलीं, जिन्होंने अपने काम एवं अभिनय से एक खास मुकाम बनाया। फिर वे ऐश्वर्या राय बच्चन हों, सुष्मिता सेन, दिव्या दत्ता, नगमा, रानी मुखर्जी, नंदिता दास या पूजा बत्रा। उन्हीं के बीच में एक जानी-मानी मॉडल, अभिनेत्री थीं बरखा मदान (Barkha Madan)। बरखा ने वर्ष 1994 में हुई मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता में ऐश्वर्या एवं सुष्मिता के साथ कंपीट किया था। तब उन्हें ‘मिस टूरिज्म इंडिया’ का खिताब मिला था। इसके पश्चात् साल 1996 में उन्होंने फिल्म ‘खिलाड़ियों के खिलाड़ी’ (Khiladiyon ka Khiladi) से बॉलीवुड में करियर का आगाज किया। वे रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘भूत’ में भी नजर आईं। फिल्मों के अलावा बरखा ने छोटे पर्दे पर अपने शानदार अभिनय से सबका ध्यान खींचा। लेकिन एक दिन अचानक उनकी राह बदल गई। तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा से प्रभावित होने के कारण बौद्ध धर्म उन्हें आकर्षित करता था। इस तरह, उन्होंने मनोरंजन जगत को छोड़ अध्यात्म के मार्ग पर चलने का निर्णय ले लिया। ये साल 2012 की घटना है। बरखा लामा जोपा रिनपोचे की निगरानी में कर्नाटक की एक मोनेस्ट्री में बौद्ध भिक्षु बनीं और उन्हें एक नया नाम मिला- ग्यालटेन समतेन (Gyalten Samten)। वे अपना ज्यादातर समय मोनेस्ट्री में बिताती हैं। संन्यासी जीवन जीने के साथ ही सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं।
दलाई लामा के संपर्क में आने के बाद बदला जीवन
बरखा ने एक बार किसी इंटरव्यू में बताया था कि आखिर उन्होंने ये राह क्यों चुनी? वे अपने जीवन के असल उद्देश्य की तलाश कर रहीं थीं। नाम और शोहरत तो सभी कमा लेते हैं, गाड़ी, बंगला खरीद लेते हैं। लेकिन मानव जीवन का सिर्फ यही मकसद नहीं हो सकता। दलाई लामा से संपर्क में आने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि जीवन कैसा होना चाहिए? उसमें सादगी के साथ हर किसी के प्रति करुणा एवं प्रेम की भावना होनी चाहिए। अपने मन का करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। पेशेवर दुनिया में रहते भेदभाव से लेकर और भी बहुत कुछ सहन करना पड़ता है। तब इसका एहसास नहीं होता कि अच्छाई सभी में होती है, सिर्फ उसे पहचान नहीं पाते। अध्यात्म ही उसकी पहचान कराता है। ऐसा नहीं है कि बरखा के पास काम नहीं थे। वे एक्टिंग के साथ फिल्म एवं धारावाहिक का निर्माण कर रहीं थीं। अच्छी चल रही थी जिन्दगी। लेकिन बॉलीवुड के अंदर व्याप्त असमानता एवं अन्य चुनौतियों को बेहद करीब से देखते हुए उन्हें लगा कि यह जीवन नहीं है, जो वे जीना चाहती हैं।
इशिका ने शांति एवं संतुष्टि के लिए ली गुरु से दीक्षा
वर्ष 2017 में मिस इंडिया का खिताब जीतने वाली इशिका तनेजा (Ishika Taneja) ने भी अपने लिए बहुत कुछ किया। कई पुरस्कार जीते, रिकॉर्ड बनाए। लेकिन वह यात्रा बिल्कुल अलग थी। क्योंकि उसमें नाम और शोहरत तो थी, लेकिन शांति और आत्मसंतुष्टि नहीं। इसलिए उस यात्रा को छोड़कर उन्होंने अध्यात्म की यात्रा पर जाने का फैसला किया। उनका कहना है, ‘इस यात्रा में सनातन धर्म और लोगों की सेवा करके इशिता को जो खुशी मिलती है, उसकी तुलना किसी और खुशी से नहीं की जा सकती।‘ इशिका ने द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती से गुरु दीक्षा प्राप्त की है। दीक्षा देने और शिष्य के रूप में स्वीकार करने से पहले शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने इशिका की शंकाओं का समाधान किया और फिर उन्हें गुरु मंत्र की दीक्षा दी।
अचानक नहीं, सोच-समझकर बनीं संन्यासी नुपूर
बीते दशकों में अनु अग्रवाल, सोफिया हयात, ममता कुलकर्णी, सुचित्रा सेन, अनघा भोसले, जायरा वसीम, सना खान जैसी कई फिल्मी हस्तियों ने स्टारडम एवं ऐशोआराम भरी जिन्दगी को छोड़ आध्यात्मिक यात्रा पर निकलना स्वीकार किया। नुपूर अलंकार (Nupur Alankar) भी एक ऐसी ही अदाकारा हैं जिन्होंने 150 से अधिक टीवी सीरियल्स एवं फिल्मों में काम करने के बाद संन्यासी बनने का निर्णय लिया। 27 साल से अधिक समय तक मनोरंजन जगत में अपनी जगह बनाए रखने वाली नुपूर के जीवन में यह परिवर्तन वर्ष 2022 में आया। वे खुद को खशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें शंभू शरण झा से गुरु मिले, जिन्होंने उन्हें अध्यात्म का सही अर्थ समझाया। संजय लीला भंसाली, डेविड धवन, संजय झा, अपर्णा घोष जैसे निर्देशकों के साथ काम करने के अलावा टीवी के मशहूर धारावाहिक शक्तिमान में अभिनय का जादू बिखेरने वाली नुपूर ने भी आवेश में आकर या भावुक होकर जीवन का इतना बड़ा फैसला नहीं लिया, बल्कि सोच-समझकर एवं परिवार की सहमति लेकर इस मार्ग पर आगे बढ़ीं।
फिल्मों से मोह भंग होने पर ‘योगी’ बनीं अनु
फिल्म ‘आशिकी’ से प्रसिद्ध हुईं अनु अग्रवाल (Anu Aggarwal) की कहानी से हर कोई वाकिफ है। वर्ष 2001 में फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ उन्होंने संन्यास ले लिया और एक योगी बन गईं। दो साल आश्रमों में रहकर योग एवं माइंडफुलनेस का गहरा अभ्यास किया। न्य़ूरोसाइंस एवं साइंस ऑफ हैप्पीनेस की पढ़ाई के लिए अमेरिका के बरक्ले यूनिवर्सिटी गईं। जब वापस लौटीं, तो एक हादसे में गंभीर रूप से शिकार हो गईं। करीब 29 दिनों तक कोमा में रहीं। लेकिन हार नहीं मानी। तीन साल लगे ठीक होने। उसके बाद उन्होंने ‘अनु अग्रवाल फाउंडेशन’ की स्थापना की, जो महिलाओं के सशक्तीकरण, बच्चों को योगा सिखाने समेत कई अन्य अमुद्दों पर काम करती है। आज अनु एक मोटिवेशनक स्पीकर एवं लेखक के तौर पर पहचानी जाती हैं। बतौर टेडएक्स स्पीकर शोज करती हैं। उनका कहना है कि न्यूरोसाइंस ने साबित किया है कि अगर हम अपने मन को पॉजिटिव एवं खुशी वाले विचार दें, तो जीवन के प्रति कभी निराशा नहीं आती। योगी और संन्यासी बनने के बाद वैसे भी आपके व्यक्तित्व में ठहराव आ जाता है और अहंकार खत्म हो जाता है।
जब टीवी एक्टर स्नेहा वाग को अध्यात्म से जुड़कर मिली शांति
फिल्मी दुनिया भी हमारे वृहद समाज का ही एक हिस्सा है। आज जब भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों का आध्यात्मिकता के प्रति रुझान बढ़ रहा है, वैसे में फिल्म व टीवी कलाकार भी पीछे नहीं हैं। छोटे पर्दे की लोकप्रिय एक्टर स्नेहा वाग ( Sneha Wagh) के जीवन में भी साल 2016-17 में आध्यात्मिकता का प्रवेश हुआ, जो गुजरते साल के साथ और गहरा होता गया। उन्होंने अनेक मंदिरों के दर्शन किए, पौराणिक कथाएं एवं प्रवचन सुने। उन्हें एहसास हुआ कि देश की संस्कृति एवं विरासत कितनी समृद्ध है। अध्यात्म से जुड़ने के बाद उन्हें असीम शांति का अनुभव होता है।
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