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ADHD Treatment: अटेंशन -डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का क्या हो सकता है इलाज
Authored By: स्मिता
Published On: Monday, September 15, 2025
Last Updated On: Monday, September 15, 2025
ADHD Treatment: क्या वाकई में अटेंशन -डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है? क्या कुछ उपाय अपनाकर इस रोग को मैनेज किया जा सकता है? बता रहे हैं विशेषज्ञ.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Monday, September 15, 2025
अटेंशन -डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर या एडीएचडी (ADHD Treatment) एक डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो मुख्य रूप से स्कूल गोइंग बच्चों में देखा जाता है. इन दिनों 10 प्रतिशत से अधिक स्कूली बच्चों में यह डायग्नूज किया जा रहा है. यह दिमाग से जुड़ा विकार है. इसमें बच्चों का ध्यान लगाना मुश्किल होता है. इस विकार से प्रभावित बच्चे या तो बहुत ज्यादा सक्रिय रहते हैं या हर काम जल्दबाजी में करते हैं. यदि बच्चों को कंसन्ट्रेशन में दिक्कत आ रही है या क्लास में ब्लैकबोर्ड से कॉपी करने में समस्या आ रही है, तो वह इस मनोविकार से ग्रस्त हो सकता है. यह बीमारी इन दिनों बड़ों में भी खूब देखी जा रही है.
कैसे किया जाता है इलाज (ADHD Treatment)?
सीनियर साइकोलोजिस्ट और ईमोनीड्स की को-फाउंडर डॉ. नीरजा अग्रवाल बताती हैं अटेंशन -डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का कोई इलाज नहीं है. वर्तमान में उपलब्ध उपचार लक्षणों को कम कर सकते हैं. कामकाज में सुधार कर सकते हैं. उपचारों में दवा, मनोचिकित्सक, शिक्षा या प्रशिक्षण या उपचारों का संयोजन शामिल हो सकता है. थेरेपी से किसी भी एडल्ट की रोजमर्रा की जिंदगी को मैनेज किया जा सकता है. एक पेशेवर परामर्शदाता या चिकित्सक पीड़ित वयस्क को यह सीखने में मदद कर सकता है कि वे अपने जीवन को कैसे व्यवस्थित करें, जैसे कि
- रूटीन बनाए रखना
- घर और ऑफिस के कार्यों और गतिविधियों के लिए अलग-अलग सूची बनाकर काम करना.
- जरूरी कार्यों को शेड्यूल करने के लिए कैलेंडर का उपयोग करना.
- याद रखने के लिए नोट्स और डायरी का उपयोग करना.
- चाबियों, बिलों और कागजी कार्रवाई के लिए एक विशेष स्थान बना कर चलना.
- बड़े कार्यों को मैनेज करने के लिए छोटे-छोटे स्टेप्स में तोड़कर काम करना, ताकि कार्य के प्रत्येक भाग को पूरा करने से उपलब्धि की भावना मिले.
- दिमाग को स्थिर बनाये रखने और पेशेंस लूज नहीं करने के लिए ध्यान-योग और एक्सरसाइज का सहारा लेना.
थेरेपी से कामकाज में सुधार (Therapy for ADHD)
6 साल से पहले भी बच्चे में लक्षण देखे जा सकते हैं, लेकिन निदान 6 वर्ष की उम्र के बाद ही किया जा सकता है. बच्चे में इसका पता लगाने के लिए उसका आईक्यू असेसमेंट कराना जरूरी है. इसमें आईक्यू बहुत एवरेज आ सकता है. बहुत सीवियर कंडीशन नहीं होने पर बच्चे और बड़े दोनों का थेरेपी के माध्यम से बहुत अधिक इम्प्रूव हो सकता है. इसके बाद वे डेली लाइफ में अच्छी तरह कामकाज कर सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति बहुत जल्दी किसी बात के लिए इमोशनल होकर लड़ाई-झगड़े में पड़ जाता है, तो उसके लिए थेरेपी कारगर हो सकती है.
विस्तृत साक्षात्कार और आत्म-मूल्यांकन
अनन्या चाइल्ड फाउंडेशन में सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. ईशा सिंह के अनुसार, बड़ों में ADHD की पहचान के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले, व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास की समीक्षा की जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या बचपन में भी इसी प्रकार के लक्षण मौजूद थे. इसके बाद, विस्तृत साक्षात्कार और आत्म-मूल्यांकन प्रश्नावली का उपयोग किया जा सकता है. इन प्रश्नावली में ध्यान केंद्रित करने, समय प्रबंधन, आवेग नियंत्रण, और कार्यक्षमता से संबंधित प्रश्न होते हैं. मनोवैज्ञानिक परीक्षण और स्केल्स जैसे कि ADHD रेटिंग स्केल, बड़ों में ADHD की पहचान में सहायक हो सकते हैं. इसके साथ ही, चिकित्सक द्वारा व्यक्तिगत रूप से व्यवहार और जीवनशैली का मूल्यांकन भी किया जाता है. संपूर्ण मूल्यांकन के बाद, यदि आवश्यक हो, तो उचित उपचार और परामर्श की योजना बनाई जाती है.
खुशहाल जिंदगी जीने के तरीके
डॉ. एलएच हीरानंदानी अस्पताल, पवई, मुंबई में मनोचिकित्सक डॉ. ऑस्टिन फर्नांडीस के अनुसार, एडीएचडी क्रोनिक कंडीशन है, जिसे पूरी तरह से खत्म या ठीक नहीं किया जा सकता है. सही इलाज और थेरेपी के सहारे पीड़ित खुशहाल जिंदगी जी सकता है.
1.व्यवहार चिकित्सा (Behavioral Therapy)
यह इलाज व्यक्ति के वातावरण को बदलने और उन्हें नए व्यवहार सीखने में मदद करने पर आधारित है. इसमें आमतौर पर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, टाइम मैनेजमेंट की तरकीबें और चीजों को व्यवस्थित करना जैसे काम शामिल हैं. आसपास के लोगों को भी पीड़ित के साथ बढ़िया व्यवहार करने के लिए कहा जाता है.
2. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी
यह थेरेपी एडीएचडी वाले लोगों को मुकाबला करने के तरीके और समस्याओं को सुलझाने के कौशल सीखने में मदद करती है. यह नकारात्मक सोच को कम करती है. लक्षणों को बेहतर तरीके से मैनेज करने की तरकीब सिखाती है. जैसे कि किसी काम को छोटे-छोटे चरणों में बांटना और याद दिलाने के लिए चीजों का इस्तेमाल करना.
3. दवाइयां (Medicine)
आमतौर पर एडीएचडी पीड़ितों को उत्तेजक दवाइयां जैसे कि मेथिलफेनिडेट (methylphenidate) और एम्फ़ैटेमिन (amphetamines) दी जाती हैं. ये लक्षणों को कम करने में काफी असरदार हो सकती हैं. इनके लिए गैर-उत्तेजक दवाइयां जैसे कि एटोमोक्सेटीन (atomoxetine) और गुआनफैसीन (guanfacine) भी उपलब्ध हैं. कुछ मामलों में इन्हें बेहतर माना जा सकता है.
4. जीवनशैली में बदलाव
रोजाना एक्सरसाइज करना, हेल्दी डाइट लेना और पर्याप्त नींद लेना एडीएचडी के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है. खासतौर पर एक्सरसाइज से ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है और अतिसक्रियता और जल्दबाजी में फैसले लेने की परेशानी कम होती है. माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, योग और गहरी सांस लेने के व्यायाम एडीएचडी से जूझ रहे लोगों को फोकस बढ़ाने और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं.
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