सबसे ज्यादा वेतन और सुविधाएं, फिर भी तीन साल में 422 डॉक्टरों ने एम्स से दिया इस्तीफा

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Tuesday, August 13, 2024

Last Updated On: Tuesday, August 13, 2024

AIIMS Doctors Resignation
AIIMS Doctors Resignation

देश के लगभग सभी एम्स से डॉक्टरों का इस्तीफा हो रहा है। लेकिन उनमें सबसे ज्यादा चिंता की बात दिल्ली एम्स के डॉक्टरों का इस्तीफा है। क्योंकि दिल्ली एम्स इस्तीफा देने वाले सीनियर डॉक्टर दशकों से संस्थान में थे।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Tuesday, August 13, 2024

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) देश का सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान है। यहां पढ़ना और यहां का डॉक्टर बनने का सपना हर मेडिकल का छात्र देखता है। लेकिन बहुत कम सौभाग्यशाली छात्र होते हैं, जिनका सपना पूरा हो पाता है। आखिर फिर क्या कारण है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान को डॉक्टर्स अलविदा कह रहे हैं। अब तक संस्थान छोड़ने की खबर दिल्ली एम्स से आती थी। लेकिन संसद में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दी गई जानकारी चौकने वाली है। साथ ही सरकार को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है नहीं तो इस प्रतिष्ठित संस्थान के स्तर को गिरने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

तीन साल में 422 डॉक्टर्स ने छोड़ा एम्स

दो दशक पहले तक सिर्फ राजधानी दिल्ली में एम्स था। लेकिन आज 20 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान देश भर में हैं। 3 से 4 नए एम्स खुलने की प्रक्रिया में है। इसी बजट सत्र में एम्स से जुड़े एक सवाल का जवाब केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड़ड़ा दे रहे थे। इनके जवाब में ही एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से डॉक्टरों का इस्तीफा बड़ा मुद्दा उभरकर सामने आया है। सदन में दिए उनके जवाब के मुताबिक पिछले 3 वर्षों में देश के 20 एम्स से कुल 422 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं।

भुवनेश्वर-रायपुर से सबसे ज्यादा इस्तीफा

देश के लगभग सभी एम्स से डॉक्टरों का इस्तीफा हो रहा है। लेकिन उनमें सबसे ज्यादा चिंता की बात दिल्ली एम्स के डॉक्टरों का इस्तीफा है। क्योंकि दिल्ली एम्स कई सीनियर डॉक्टर दशकों से संस्थान में थे। इनमें कई देश-दुनिया के जाने-माने नाम थे। दिल्ली एम्स से पिछले 3 साल में 25 डॉक्टरों ने संस्थान को छोड़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा इस्तीफा देने वाले डॉक्टर भुवनेश्वर एम्स और रायपुर एम्स के हैं। इन दोनों स्थानों के एम्स से 37-37 डॉक्टर्स ने संस्थान को छोड़ दिया। इसके बाद जोधपुर एम्स से 35 डॉक्टरों ने संस्थान को अलविदा कहा है। इसके अलावा मध्यप्रदेश के भोपाल और महाराष्ट्र के नागपुर एम्स से 27-27 डॉक्टरों ने संस्थान से इस्तीफा दिया है।

विभिन्न एम्स में 36 प्रतिशत डॉक्टर नहीं

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) से मिली जानकारी के मुताबिक देश के 20 एम्स में अभी डॉक्टरों के लिए 5767 पद स्वीकृत किए गए हैं। इन स्वीकृत पदों में से 3653 डॉक्टर ही विभिन्न एम्स में कार्यरत हैं। यानी करीब 64 प्रतिशत डॉक्टर हैं। अभी देश भर के सभी 20 एम्स में डॉक्टरों के 2114 पद खाली हैं। यानी 36 प्रतिशत पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। दिल्ली एम्स 1232 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। यहां 416 पद पर डॉक्टर नहीं है। डॉक्टरों के केवल 816 पद भरे हुए हैं।

कल्याणी एम्स में 259 में से 103 डॉक्टरों के पद काली हैं। यहां 156 पदों पर डॉक्टर हैं। रायबरेली में 201 डॉक्टरों के पद हैं। यहां इनके 95 पदों पर डॉक्टर नहीं है। सिर्फ 106 पद भरे हुए हैं। एम्स बठिंडा में 209 में से 142 पद भरे हैं। पहले से ही डॉक्टरों की कमी झेल रहे एम्स से जब डॉक्टर इस्तीफा देते हैं तो स्थिति और गंभीत हो जाता है। हालांकि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इन पदों को जल्द से जल्द भरने की प्रक्रिया चल रही है। डॉक्टरों की नियुक्ति जल्द हो जाएगी।

डॉक्टर क्यों छोड़ रहे हैं एम्स

एम्स डॉक्टरों के वेतन से लेकर सुविधाएं, अन्य डॉक्टरों की तुलना में अधिक है। शायद इसी लिए यहां पढ़ाई, शोध करना हर मेडिकल छात्रों का एक सपना होता है। सिर्फ यही नहीं देश के सबसे बहतरीन मेडिकल छात्रों का ही दाखिल एम्स में होता है। यहां बहुत कम फीस में छात्र डॉक्टर बनते हैं। इन सबके बावजूद कुछ वर्षों की नौकरी करने के बाद डॉक्टर एम्स को अलविदा कह देते हैं।

इसका एक सबसे बाद कारण है निजी अस्पतालों से एम्स से भी मोटी सैलरी का ऑफर मिलना। वहीं कई छोड़ने वाले डॉक्टरों ने यही भी बताया है कि एम्स प्रबंधन से परेशान होकर उन्होंने एम्स को छोड़ने का निर्णय लिया। कुछ डॉक्टरों के छोड़ने का कारण संस्थान में राजनीति का हावी होना भी बताया जाता है। कुछ का मानना यह भी है कि डॉक्टरों की कमी के कारण एम्स में काम कर रहे डॉक्टरों पर जरूरत से ज्यादा बोझ है। वे वर्किंग कंडिशन से खुश नहीं हैं। एम्स जैसे संस्थान से भी डॉक्टर के जाने के सही कारण सरकार को खोजने ही होंगे।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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