जानें कौन हैं माधवी मधुकर (Madhavi Madhukar), जिन्होंने अनंत अंबानी की शादी में बिखेरे संगीत के सुर
Authored By: अंशु सिंह
Published On: Thursday, July 11, 2024
Updated On: Friday, July 12, 2024
देश से लेकर विदेश तक इन दिनों अनंत अंबानी एवं राधिका मर्चेंट की शादी की सबसे अधिक चर्चा है। शादी के कार्ड बंट चुके हैं, जिसमें ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ स्तोत्रम् एक खास आवाज में गूंज रहा है। यह आवाज है बिहार की बेटी, झारखंड की बहू एवं वर्तमान में नोएडा (यूपी) में रह रहीं माधवी मधुकर की। संगीत से गहरे लगाव के कारण माधवी ने इस क्षेत्र में कदम रखा और बहुत कम अर्से में देव भाषा संस्कृत में गायन कर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहीं। उन्होंने शंकराचार्य के छंदों को अपनी मधुर आवाज देकर खासी प्रसिद्धि हासिल की है। हाल ही में ओटीटी पर रिलीज हुई पंचायत-3 वेब सीरीज में इनके द्वारा मैथिली में गाए कृष्ण जन्म सोहर का भी प्रयोग किया गया है।
Authored By: अंशु सिंह
Updated On: Friday, July 12, 2024
हाइलाइट्स:
‘विष्णु सहस्त्रनाम’ स्तोत्रम्
फेक न्यूज, मेल एवं कॉल के इस दौर में सही की पहचान करना मुश्किल हो गया है। माधवी के पास भी रिलायंस कंपनी की ओर से एक मेल आई थी, जिसमें उनके गाये मंत्र को अनंत अंबानी एवं राधिका मर्चेंट (Anant Ambani and Radhika Merchant) की शादी के कार्ड एवं विवाह के दिन इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी गई थी। माधवी ने इसे एक फ्रॉड मेल समझकर नजरअंदाज कर दिया। अगले दिन फिर से मुकेश अंबानी की टीम से कॉल आई और बताया गया कि नीता अंबानी को उनका गाया ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ मंत्र काफी पसंद आया है। वे उसे शादी के कार्ड, वरमाला एवं सिंदूर दान जैसे रस्मों में इस्तेमाल करने की इजाजत चाहती हैं। माधवी कहती हैं, ‘पहले पहले मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने पूछा कि आखिर उन्हें उनके बारे में कैसे जानकारी मिली? जवाब मिला कि इंटरनेट पर मंत्र सर्च करने के दौरान उन्होंने उनका मंत्र सुना था, जो नीता अंबानी को काफी पसंद आया। उन्होंने अपने परिवार के पुरोहितों से बात की और फिर उनसे संपर्क किया गया।‘
अनंत अंबानी (Anant Ambani) की शादी में होंगी शामिल

दिलचस्प यह रहा कि अंबानी परिवार की ओर से माधवी को उनके गाये मंत्र के लिए पैसों की पेशकश की गई, जिसे लेने से उन्होंने सम्मानपूर्वक इंकार कर दिया। वे कहती हैं, ‘जैसे एक फलदार पेड़ झुका रहता है, वैसे ही हमें नाम-मान-शान की इच्छा से परे, अपना काम सच्चाई एवं ईमानदारी से करते रहना चाहिए। यह एक पुण्य का काम है। किसी भी धर्म के काम के लिए उनका गाया मंत्र इस्तेमाल हो रहा है, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। मुझे शादी का निमंत्रण भी मिला है और मैं उसमें जरूर शामिल होंगी।‘ माधवी की मानें, तो उन्होंने करीब दो साल पहले इस मंत्र को अपने यूट्यूब पर अपलोड किया था। दरअसल, कोविड के पहले ही इन्होंने एक चैनल शुरू किया था, जिस पर वे अपने गाने के वीडियोज अपलोड करती थीं। काफी लोगों ने उन्हें सराहा। श्रीकृष्णाष्टकम् स्त्रोत को सबसे अधिक पसंद किया गया। अब तक करीब 23 मिलियन लोग उसे देख चुके हैं। इसके अलावा, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, कनकधारा स्तोत्रम्, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम्, शंकराचार्य के भजन एवं स्तोत्रों को भी श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला है।
संगीत से प्रेम, वही है जीवन
बचपन से गायन में रुचि रही है माधवी की। स्कूल के कार्यक्रमों में गाने गाती थीं। लेकिन ये खयाल कभी नहीं आया कि आगे चलकर संगीत के क्षेत्र में करियर बनाएंगी। जब बड़ी हुईं, तो बैंकिंग समेत अन्य विकल्पों पर काम किया। पर कहीं सफलता नहीं मिली। फिर शादी हो गई और वे दिल्ली आ गईं। अच्छी बात ये रही कि उन्हें ऐसे जीवनसाथी मिले, जिन्होंने उन्हें अपने पैशन को जीने के लिए प्रेरित किया। माधवी बताती हैं, ‘संगीत से प्रेम रहा है मुझे। मेरी आत्मा में समाई हुई है वह। जिंदगी है मेरी। लेकिन ‘इंडियन आइडल’ (Indian Idol) से रिजेक्शन मिलने के बाद काफी निराशा हुई थी। फिर सेहत ने भी साथ नहीं दिया कुछ समय। बहुत मायूस हो गई थीं। कोई काम पूरा नहीं हो रहा था। लगता था कि ऐसा क्या करूं, जिससे जीवन में आगे बढ़ सकूं। खुशनसीब रही कि मुझे पीयूष के रूप में एक ऐसे जीवनसाथी मिले, जिन्होंने हर मोड़ पर साथ दिया। प्रेरित किया। मेरे गाइड बने। हमने फैसला लिया कि हम कुछ ऐसा करेंगे, जिसमें हमारी रुचि हो। इस तरह, संगीत, संस्कृत एवं सनातन को लेकर हम आगे बढ़ते गए।‘
संस्कृत के पहले बैंड ‘मधुरम वृंद’ (Madhuram Vrind) की रखी नींव

दरअसल, माधवी को सोशल मीडिया की ताकत का एहसास था। उन्होंने पहले अपना एक यूट्यूब चैनल शुरू किया। साथ ही पति के साथ मिलकर म्यूजिकल बैंड ‘मधुरम वृंद’ भी बनाया। पूरी दुनिया में संस्कृत का यह पहला बैंड है, जिसकी स्थापना वर्ष 2018 में हुई। बताती हैं माधवी, ‘अगर संस्कृत को अच्छे संगीत के साथ जोड़ दिया जाए, तो वह काफी कर्णप्रिय हो सकता है। उसे जन-जन तक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। यूट्यूब पर मेरे वीडियोज में स्तोत्रों के हिंदी भावार्थ भी दिए जाते हैं, ताकि लोगों को समझने में कठिनाई न हो। जब हमने यह यात्रा शुरू की थी, तो पता नहीं था कि संस्कृत गीतों व स्तोत्रों को इतना प्यार मिलेगा। आज यूट्यूब पर हर महीने करोड़ों लोग उन्हें सुनते हैं। अकेले अमेरिका में ही हर महीने ढाई लाख से ज्यादा लोग उन्हें सुनते हैं। खुशी होती है ये देखकर मॉडर्न म्यूजिक सुनने वाली आज की युवा पीढ़ी संस्कृत के गीतों से जुड़ाव महसूस कर रही है। ‘ इसके अलावा, माधवी अपने बैंड के माध्यम से अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देती रहती हैं। भविष्य में इनकी इच्छा दक्षिण भारत में परफॉर्म करने की है। उनका मानना है कि वहां संस्कृत को जानने एवं समझने वाले लोगों की बड़ी संख्या है।
मैथिली गीत गाने से हुई शुरुआत
नि:संदेह संगीत में ऐसी शक्ति है, जो छोटे से पौधे को भी विकसित कर सकती है। माधवी के जीवन में बदलाव लाने में उसकी अहम भूमिका रही है। संस्कृत के स्तोत्रों एवं मंत्रों के गायन से उनमें सकारात्मकता का संचार हुआ है। उनकी गायन शैली अद्भुत है, जो इंसान को ईश्वर एवं संस्कृति से साक्षात्कार कराती है। वे कहती हैं, ‘मेरी शुरुआत तो मैथिली गीत गाने से हुई थी। फिर लगा कि वेद पुराण की भाषा संस्कृत में जो कृत्य हैं, उन्हें गीतों में पिरोया जाना चाहिए। इससे कठिन मानी जाने वाली इस भाषा से लोगों को जोड़ना सहज होगा। तत्पश्चात् मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछेक प्रोफेसर्स एवं दूसरे आचार्यों से संपर्क किया।गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी से मिली और फिर उनकी प्रेरणा से संस्कृत में गायन का निर्णय लिया। माधवी के अनुसार, संस्कृत में गाना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि उनके पास इसकी कोई डिग्री नहीं है। लिहाजा, खूब शोध एवं स्त्रोतों का अध्ययन करती हैं। मेहनत लगती है। कहती हैं, ‘संस्कृत एक देव वाणी है, जिसके गायन में शब्दों की स्पष्टता एवं उनका शुद्ध उच्चारण बेहद जरूरी होते हैं। इसलिए दिन में सुबह और शाम दोनों समय रियाज करती हूं।’
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Very well written. A great singer .समाज को सुसंस्कृत कर रही हैं।