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Tulsidas Jayanti 2026: तुलसीदास जयंती कब ? आखिर अवधी में क्यों लिखी रामचरितमानस, जानिए रामभक्ति की अद्भुत कहानी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, August 5, 2026
Last Updated On: Wednesday, August 5, 2026
Tulsidas Jayanti 2026: 19 अगस्त 2026 को तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी. गोस्वामी तुलसीदास ने संस्कृत के बजाय अवधी भाषा में रामचरितमानस लिखकर श्रीराम के आदर्शों को आम लोगों तक पहुंचाया. हनुमान चालीसा की रचना और रामभक्ति का उनका संदेश आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, August 5, 2026
Tulsidas Jayanti 2026: भारतीय भक्ति परंपरा के महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती इस वर्ष 19 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी. सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर आने वाली यह जयंती केवल एक संत का स्मरण नहीं, बल्कि रामभक्ति, भारतीय संस्कृति और लोकभाषा की शक्ति का उत्सव भी है. तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाया. आज भी उनकी कृतियां करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का हिस्सा हैं.
अवधी में रामचरितमानस लिखने का उद्देश्य क्या था?
16वीं शताब्दी में अधिकांश धार्मिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे जाते थे, जिन्हें आम लोग आसानी से समझ नहीं पाते थे. तुलसीदास चाहते थे कि भगवान श्रीराम का जीवन, उनके आदर्श और धर्म का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचे. इसी सोच के साथ उन्होंने रामचरितमानस की रचना संस्कृत के बजाय अवधी भाषा में की. इससे गांव-गांव और जन-जन तक रामकथा पहुंची. यही कारण है कि रामचरितमानस आज भी सबसे अधिक पढ़े और सुने जाने वाले धार्मिक ग्रंथों में शामिल है.
हनुमान चालीसा लिखने के पीछे क्या थी सोच?
तुलसीदास का विश्वास था कि भगवान श्रीराम तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग भगवान हनुमान की भक्ति है. इसी भावना से उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की. इसकी चौपाइयों में भी यह संदेश मिलता है कि हनुमान जी की कृपा से ही श्रीराम की भक्ति सहज हो सकती है. “तुम्हरे भजन राम को पावै” जैसी पंक्तियां इसी विश्वास को व्यक्त करती हैं. आज हनुमान चालीसा दुनिया भर में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले भक्तिगीतों में गिनी जाती है.
पत्नी के एक वचन ने बदल दी पूरी जिंदगी
धार्मिक परंपराओं और जीवनियों के अनुसार, तुलसीदास पहले गृहस्थ जीवन जी रहे थे. एक बार उनकी पत्नी रत्नावली मायके चली गईं. उनसे मिलने के लिए तुलसीदास तेज बारिश और नदी पार कर पहुंच गए. तब रत्नावली ने कहा कि यदि उनके शरीर के प्रति जितना प्रेम है, उतना ही प्रेम भगवान श्रीराम से होता, तो जीवन का कल्याण हो जाता. यह बात तुलसीदास के हृदय को गहराई से छू गई. इसके बाद उन्होंने सांसारिक मोह छोड़कर स्वयं को पूरी तरह श्रीराम की भक्ति और लोककल्याण के कार्यों में समर्पित कर दिया.
आज भी क्यों अमर हैं तुलसीदास की रचनाएं?
रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, दोहावली, गीतावली, कवितावली, जानकी मंगल और पार्वती मंगल जैसी रचनाएं आज भी भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान की कृपा से तुलसीदास को श्रीराम के दर्शन भी हुए थे, हालांकि इसके ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. फिर भी उनकी रचनाओं ने समाज को भक्ति, नैतिकता, करुणा और आदर्श जीवन का संदेश दिया. यही वजह है कि सदियों बाद भी तुलसीदास केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और रामभक्ति के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत माने जाते हैं.
















