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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले लद्दाख सीमा से ड्रैगन हुआ पीछे
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, October 22, 2024
Last Updated On: Tuesday, October 22, 2024
करीब चार वर्षों से पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति को अब दूर कर लिया गया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत-चीन के बीच अपनी-अपनी सेनाओं को सीमा से पीछे करने सहित कई मुद्दों पर समझौता हुआ है।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Tuesday, October 22, 2024
आज से दो दिन तक रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) शुरू होने वाला है। इस शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात होनी है। द्विपक्षीय वार्ता होगी या नहीं इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं दी गई है लेकिन ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत-चीन सीमा को लेकर दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
भारत-चीन लद्दाख सीमा पर चार साल से अधिक समय से तनाव चल रहा है। खासकर गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच आपसी झड़प के समय से दोनों देशों की सेना सीमा पर तैनात है। तनाव को कम करने के लिए अधिकारी स्तर पर कई दौर की बैठक हुई है। लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकाल रहा था। पर अब दोनों देश तनाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
एलएसी (LAC) पर बनी सहमति
दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुसार भारत और चीन सीमा से अपनी-अपनी सेना को पीछे करने पर सहमत हो गए हैं। इसकी आधिकारिक जानकारी कल भारत के विदेश मंत्रालय ने दिया। साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों की सेनाएं पेट्रोलिंग करेंगी। इस पर भी सहमति बनी है।
देपसांग और डेमचोक पर तनाव कम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना होने से पहले कल विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस वार्ता की। इस प्रेस वार्ता में उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात यही बताया कि भारत-चीन सीमा (देपसांग और डेमचोक) पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा (देपसांग और डेमचोक) पर दोनों देशों की सेनाओं ने पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। साथ ही अब धीरे-धीरे दोनों देश अपनी सेना को पीछे करने लगेंगी।
विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री के मुताबिक वर्ष 2020 से चल रहे भारत-चीन के तनावपूर्ण संबंधों का अव धीरे-धीरे अंत होगा। 2020 से पूर्व की स्थिति बनाने के लिए दोनों देश एक-दूसरे के संपर्क में है। और लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर देपसांग और डेमचोक के अलावा अन्य शेष मुद्दों को हल करने के लिए भारतीय और चीनी वार्ताकार पिछले कुछ हफ्तों से लगातार संपर्क में हैं।
गलवान घाटी में तनाव

लद्दाख के पूर्वी सीमा पर स्थित गलवान घाटी में 15-16 जून 2020 को दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुई थी। उस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी। इसे भारत ने कबूल किया था। वहीं करीब 40 से 50 चीनी सैनिक भी उस झड़प में मारे गए थे। लेकिन लंबे समय तक चीन ने इसे स्वीकार नहीं किया। कई वर्षों बाद चीन से रिपोर्ट आई थी कि उनके सैनिक भी लद्दाख सीमा पर 2020 में मारे गए थे।
तभी से लद्दाख सीमा पर दोनों देश की सेनाएं डटी हुई हैं। भारत ने अपनी ओर से सीमाओं पर कई भारी-भरकम हथियार भी लद्दाख सीमा पर तैनात कर दिया था। इस तनाव को खत्म करने के लिए सेनाओं के उच्चाधिकारी कर स्तर पर वार्ता कर रहे थे। पर वे हल तक नहीं पहुंच रहे थे।
मोदी-जिनपिंग वार्ता की संभावना
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) एवं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी या नहीं, यह अभी तय नहीं है। विदेश सचिव मिस्त्री ने बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता के लिए अभी हम समय और इनकी व्यस्तताओं को ध्यान में रख रहे हैं। प्रधानमंत्री दो दिन रूस में रहेंगे। उनके कई कार्यक्रम पूर्व निर्धारित हैं।
प्रधानमंत्री @narendramodi ब्रिक्स शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेने रूस पहुंच गए हैं। #ब्रिक्स का यह 16 वां शिखर सम्मलेन है। इसकी अध्यक्षता #रूस कर रहा है।#BRICS2024 #BRICSSummit2024 #BRICSSummit #BRICS #Russia pic.twitter.com/UgG15Z1h0Y
— Galgotias Times (@galgotiastimes) October 22, 2024













