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Ganesh Chaturthi 2026: 66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और 703 करोड़ का बीमा, जानिए GSB गणपति की कहानी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, September 16, 2026
Last Updated On: Wednesday, September 16, 2026
Ganesh Chaturthi 2026: मुंबई के GSB सेवा मंडल के महागणपति का 2026 का उत्सव अपनी भव्यता और परंपराओं के कारण खास है. करीब 24 फीट ऊंची प्रतिमा का 66 किलो से अधिक सोने और 335 किलो चांदी से श्रृंगार हुआ है. इस बार 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी लिया गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, September 16, 2026
Ganesh Chaturthi 2026: मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता और अनोखी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. लालबागचा राजा के साथ इस बार किंग्स सर्कल स्थित GSB सेवा मंडल का महागणपति भी खास चर्चा में है. यहां विराजमान गणेश प्रतिमा का श्रृंगार 66 किलो से अधिक सोने और करीब 335 किलो चांदी से किया गया है. उत्सव के दौरान मंडल ने 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी लिया है.
सोने-चांदी से सजे हैं बप्पा
GSB सेवा मंडल के महागणपति की प्रतिमा करीब 24 फीट ऊंची है. इस साल प्रतिमा को 66 किलो से ज्यादा सोने के आभूषणों, लगभग 335 किलो चांदी और कीमती रत्नों से सजाया गया है. यही वजह है कि GSB गणपति को देश के सबसे अमीर गणपति पंडालों में गिना जाता है.
हालांकि यहां मौजूद सोना-चांदी किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है. मंडल के अनुसार, ये आभूषण वर्षों से भक्तों और सेवादारों की ओर से दी गई भेंट का हिस्सा हैं. यानी इस भव्य श्रृंगार के पीछे कई दशकों की आस्था और परंपरा जुड़ी हुई है.
703 करोड़ रुपये का बीमा क्यों?
इस साल GSB सेवा मंडल ने 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है. 2025 में यह कवर करीब 474 करोड़ रुपये का था. इतनी बड़ी रकम सुनकर यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ गणपति की प्रतिमा की कीमत नहीं है.
यह बीमा गणेशोत्सव के दौरान आभूषणों, संपत्तियों, भक्तों की सुरक्षा और आयोजन से जुड़े निर्धारित जोखिमों को कवर करने के लिए लिया गया व्यापक इंश्योरेंस है. उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और बहुमूल्य आभूषणों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
| खासियत | 2026 में जानकारी |
|---|---|
| प्रतिमा की ऊंचाई | करीब 24 फीट |
| सोने के आभूषण | 66 किलो से अधिक |
| चांदी | करीब 335 किलो |
| बीमा कवर | ₹703.27 करोड़ |
| गणेशोत्सव | 14 से 18 सितंबर |
| गणेशोत्सव की परंपरा | 1955 से |
72 साल से चली आ रही गणपति की परंपरा
GSB सेवा मंडल का इतिहास भी इसकी भव्यता जितना ही दिलचस्प है. इसकी शुरुआत 1951 में विजयादशमी के दिन हुई थी. शुरुआती दौर में कुछ समाजसेवी लोग अंतिम संस्कार और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए एक साथ आए थे. समय के साथ यह समूह भजन और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ता गया और सेवा मंडल का विस्तार होता गया.
मंडल ने 1955 में गणेशोत्सव की शुरुआत की थी. 2026 में यहां 72वां गणेशोत्सव मनाया जा रहा है. इस साल बप्पा 14 से 18 सितंबर तक भक्तों के बीच विराजमान हैं. खास बात यह भी है कि गणपति के पांच दिनों के उत्सव में सेवा देने के लिए विदेशों में रहने वाले कई NRI सेवादार भी मुंबई पहुंचते हैं.
यहां DJ नहीं, सुनाई देते हैं वैदिक मंत्र
GSB गणपति की पहचान केवल सोने और चांदी से नहीं है. यहां उत्सव का माहौल पारंपरिक और धार्मिक विधियों पर आधारित रहता है. मंडप में विशेष हवन कुंड बनाए जाते हैं, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन किया जाता है.
यानी मुंबई के इस भव्य गणपति उत्सव में आधुनिक शोर-शराबे की जगह धार्मिक परंपराओं और वैदिक अनुष्ठानों को प्रमुखता दी जाती है. यही बात इसे दूसरे बड़े गणपति आयोजनों से अलग पहचान देती है.
मन्नत पूरी हो तो होती है तुलाभर सेवा
GSB गणपति से जुड़ी तुलाभर सेवा भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है. मान्यता के अनुसार, किसी भक्त की मनोकामना पूरी होने के बाद वह अपने बच्चे को विशेष तराजू पर बैठाता है. इसके बाद बच्चे के वजन के बराबर चावल, दाल या अन्य अनाज दान किया जाता है.
इस सेवा का उद्देश्य केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं है. एकत्र किए गए अनाज का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की सहायता और अन्नदान के लिए किया जाता है. इस तरह GSB गणपति की भव्यता के साथ सेवा और दान की परंपरा भी जुड़ी हुई है.
भव्यता के पीछे वर्षों की श्रद्धा
GSB महागणपति का आकर्षण उसके सोने-चांदी के श्रृंगार से जरूर बढ़ता है, लेकिन इसकी असली कहानी दशकों से चली आ रही सेवा, दान और धार्मिक परंपराओं में छिपी है. 72वें गणेशोत्सव के दौरान एक बार फिर यह गणपति मुंबई के गणेश उत्सव की भव्यता के साथ श्रद्धा और सेवा की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है.
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