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Hariyali & Hartalika Teej: हरियाली तीज और हरतालिका तीज, एक जैसे नहीं हैं दोनों व्रत, जानिए अंतर और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 1, 2026
Last Updated On: Saturday, August 1, 2026
Hariyali & Hartalika Teej: हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों भगवान शिव-पार्वती को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत हैं, लेकिन उनकी तिथि, परंपराएं और पूजा-विधि अलग है. जानिए दोनों व्रतों का धार्मिक महत्व, प्रमुख अंतर, पूजा के नियम और वे जरूरी सावधानियां, जिनका पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 1, 2026
Hariyali & Hartalika Teej: सनातन धर्म में तीज का पर्व महिलाओं की आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों ही भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हैं, लेकिन कई लोग इन्हें एक ही व्रत समझ लेते हैं. जबकि इन दोनों के समय, पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं में स्पष्ट अंतर है. यदि इन व्रतों को सही विधि से किया जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है.
कब मनाई जाएगी हरियाली और हरतालिका तीज?
वर्ष 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि हरतालिका तीज 14 सितंबर को पड़ेगी. हरियाली तीज सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर आती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. यही दोनों पर्वों का सबसे बड़ा अंतर माना जाता है.
हरियाली तीज की खास परंपराएं
हरियाली तीज को विशेष रूप से उत्तर भारत के कई राज्यों में उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, झूला झूलती हैं और पारंपरिक लोकगीत गाकर पर्व की खुशियां मनाती हैं. इसे श्रृंगार तीज भी कहा जाता है. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं.
हरतालिका तीज क्यों मानी जाती है कठिन?
हरतालिका तीज को सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और निर्जला उपवास रखा था. इसी कारण आज भी अनेक महिलाएं यह व्रत बिना जल ग्रहण किए रखती हैं. इस दिन शिव-पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है.
दोनों व्रतों में मुख्य अंतर
- हरियाली तीज सावन महीने में, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद महीने में आती है.
- हरियाली तीज में उत्सव, श्रृंगार और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व होता है.
- हरतालिका तीज में कठोर निर्जला व्रत और तपस्या की भावना प्रमुख रहती है.
- दोनों व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हैं, लेकिन उनकी पूजा-पद्धति और धार्मिक महत्व अलग-अलग माने जाते हैं.
व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
तीज का व्रत केवल उपवास नहीं बल्कि श्रद्धा और अनुशासन का भी पर्व है. पूजा के समय शिव-पार्वती को बेलपत्र, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल, नैवेद्य और सुहाग सामग्री अवश्य अर्पित करें. पूजा में व्रत कथा और आरती का पाठ करना भी आवश्यक माना जाता है.
इसके अलावा कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें-
- पूजा की सामग्री अधूरी न रखें.
- मन, वाणी और व्यवहार में संयम बनाए रखें.
- व्रत का संकल्प लेने के बाद उसे बीच में न छोड़ें.
- तामसिक भोजन और नकारात्मक व्यवहार से दूर रहें.
- दान, सेवा और परिवार के बुजुर्गों के सम्मान को भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है.
आस्था के साथ करें व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों ही माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण अवसर हैं. इन व्रतों का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करना है. इसलिए व्रत करते समय बाहरी दिखावे से अधिक सच्ची आस्था और श्रद्धा को महत्व देना चाहिए.
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