Kanya Pujan 2024: जानें कन्या पूजन की महत्ता और शुभ मुहूर्त

Authored By: स्मिता

Published On: Tuesday, October 8, 2024

Last Updated On: Tuesday, October 8, 2024

kanya pujan 2024
kanya pujan 2024

कन्या पूजन 2024 दुर्गा अष्टमी पर होगा। यह शुक्रवार, 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 बजे समाप्त होगी।

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Tuesday, October 8, 2024

शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) 3 अक्टूबर से शुरू हो गया है, जो 12 अक्टूबर को विजयादशमी मनाने के साथ संपन्न हो जायेगा। यह मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित है। छोटी लड़कियों को मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए कन्या पूजन नवरात्र (Navratri 2024) उत्सव का एक अनिवार्य हिस्सा है। कन्या पूजन, जिसे कुमारी पूजा या कंजक पूजा के नाम से भी जाना जाता है।इस अवसर पर छोटी कन्याओं की पूजा की जाती है और उन्हें भोग भी अर्पित किया जाता (Kanya Pujan 2024) है।

कन्या पूजन की महत्ता (Significance of Kanya Pujan)

छोटी लड़कियों को मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। कन्या पूजन के माध्यम से देवी दुर्गा द्वारा सन्निहित दिव्य स्त्री ऊर्जा का उत्सव मनाया जाता है। इस पूजा के माध्यम से स्त्री शक्ति की महत्ता को समझा और माना जाता है। स्त्री शक्ति 10 पापों से पोषण और रक्षा करती है। इसलिए यह पूजा दर्शाती है कि स्त्रियां अपने द्वारा निभाई जाने वाली भूमिकाओं के लिए प्रशंसा की पात्र हैं।

इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन (Kanya Pujan muhurt 2024)

कन्या पूजन 2024 दुर्गा अष्टमी पर होगा। यह शुक्रवार, 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 बजे समाप्त होगी। इस साल दुर्गा अष्टमी और महा नवमी एक ही दिन पड़ रही है। इसके अलावा, राहु काल से बचना ज़रूरी है। यह अशुभ समय है, जो सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक रहेगा।
कन्या पूजा एक अनुष्ठान है, जिसमें शारदीय नवरात्र उत्सव के दौरान कन्याओं की स्त्री शक्ति और देवी दुर्गा के नौ रूपों का सम्मान करने के लिए छोटी लड़कियों की पूजा की जाती है।

kanya pujan muhurt 2024

कन्या पूजन की रस्में (Kanya Pujan Rituals)

देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो से दस साल की उम्र की नौ लड़कियों को आमंत्रित करें। साथ ही, एक लड़के को लंगूर का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित करें।
सम्मान दिखाने और उन्हें शुद्ध करने के लिए लड़कियों के पैर पानी से धोएं।

कन्याओं को नए कपड़े, चूड़ियां, बिंदी और कुमकुम लगाएं। उन्हें किसी साफ जगह पर सजाए गए मंच या चटाई पर बिठा दें। कन्याओं को भोजन, मिठाई, फल, फूल, अगरबत्ती, दीप और अन्य पवित्र वस्तु अर्पित करें। देवी दुर्गा के सम्मान में मंत्रों का जाप करें। कन्याओं को आभार के प्रतीक के रूप में पैसे और प्रसाद दें। कन्याओं के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें।

एक लड़के या लंगूर की पूजा

देवी भागवत पुराण के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिन छोटी लड़कियों की पूजा की जाती है, वे देवी दुर्गा का रूप होती हैं। इसी कारण से 9 लड़कियों के साथ 1 लड़के (जिसे लंगूर कहा जाता है) की पूजा की जाती है। उन्हें अच्छे भोजन कराए जाते हैं। उनके लिए हलवा पूरी, चने और नारियल का पारंपरिक भोग तैयार किया जाता है। इसे कंजक पूजा या कन्या पूजन के नाम से भी जाना जाता है।

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स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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