Lifestyle News
Paush Somvati Amavasya 2024: पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन, चित्रकूट में पौष सोमवती अमावस्या मेला
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, December 26, 2024
Last Updated On: Thursday, December 26, 2024
सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2024) पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने, तर्पण अनुष्ठान कर पितरों से आशीर्वाद लेने और ज़रूरतमंदों को दान देने का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस अवसर पर चित्रकूट धाम में कामदगिरि पर्वत का विशेष महत्व होता है। यहां पौष सोमवती अमावस्या मेला का आयोजन भी होता है।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Thursday, December 26, 2024
पूर्णिमा के साथ-साथ अमावस्या का भी बहुत अधिक महत्त्व है। इस समय में भी ईश्वर की पूजा आराधना की जा सकती है। इस वर्ष पौष माह में सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2024) 30 दिसंबर को होगी। सोमवार को पड़ने के कारण यह अमावस्या पौष सोमवती अमावस्या कहलाती है। 2024 की आखिरी सोमवती अमावस्या पौष महीने में होगी। इस दिन नदी में पवित्र स्नान करना फलदायी माना जाता है। यह अमावस्या पितृ दोष (Pitri Dosh) से मुक्ति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उदय तिथि के अनुसार सोमवार को सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2024)
2024 की आखिरी सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर को पड़ेगी। इसे पौष अमावस्या या पौष सोमवती अमावस्या (Paush Somvati Amavasya 2024) के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनिल शास्त्री के अनुसार, पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या सुबह 4:00 बजे शुरू होगी। अगले दिन 31 दिसंबर 2024 को सुबह 3:56 बजे यह समाप्त हो जाएगी। उदय तिथि के अनुसार, सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।
विशेष अनुष्ठान (Somvati Amavasya Rituals)
डॉ. अनिल शास्त्री बताते हैं, ‘अमावस्या को पितरों की कृपा पाने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है। यह दिन उन्हें समर्पित माना जाता है। इस खास दिन पर पितरों की आत्मा की शांति, उन्हें प्रसन्न करने या पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए कुछ विशेष अनुष्ठान भी किया जा सकता है। पौष मास की सोमवती अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद अपने पितरों को याद कर उन्हें तर्पण प्रदान (Pitri Tarpan) करें। तर्पण के लिए काले तिल, सफेद फूल और कुश का इस्तेमाल किया जाता है। यह अनुष्ठान पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।’
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनिल शास्त्री के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर स्नान के बाद पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। सरसों और काले तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। माना जाता है कि पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। इसकी सेवा करने से तीर्थ यात्रा का पुण्य मिलता है और पितर प्रसन्न होते हैं।
चित्रकूट धाम में कामदगिरि पर्वत का विशेष महत्व (Chitrakoot Dham Mela 2024)
पौष सोमवती अमावस्या के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में चित्रकूट धाम में भी विशेष आयोजन होता है। भगवान श्रीराम ने वनवास काल के दौरान यहां 12 वर्ष गुजारे। इसलिए यहां ऐतिहासिक कामदगिरि पर्वत का विशेष महत्व है। यहां पौष अमावस्या पर हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। पौष सोमवती अमावस्या पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
पौष सोमवती अमावस्या मेला का आयोजन (Paush Somvati Amavasya 2024)
मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवागमन की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे के द्वारा स्पेशल मेला ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। भारतीय रेलवे की ओर से चित्रकूट धाम में आयोजित होने वाले पौष सोमवती अमावस्या मेले के अवसर पर यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से दो मेला स्पेशल गाड़ियों का संचालन किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को आवागमन में बेहतर सुविधा मिल सकेगी। 29 दिसंबर से 1 जनवरी 2025 तक मेला स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जाएगा।
(हिन्दुस्थान समाचार के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें : Paush Month 2024 : सूर्य को पूजने का है यह विशेष महीना














