Vinayaka Chaturthi 2025: सकारात्मक ऊर्जा के साथ उपवास कर, करें श्रीगणेश जी के प्रिय मंत्र का जाप

Authored By: स्मिता

Published On: Thursday, January 2, 2025

Last Updated On: Thursday, January 2, 2025

Vinayaka Chaturthi 2025: Utsah aur shakti ke sath Ganesh ji ke priya mantra ka jaap karein
Vinayaka Chaturthi 2025: Utsah aur shakti ke sath Ganesh ji ke priya mantra ka jaap karein

मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन श्रीगणेशजी का जन्म हुआ था। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष पौष महीने में विनायक चतुर्थी 3 जनवरी 2025 को है। इस दिन (Vinayaka Chaturthi 2025) गणेशजी के प्रिय मंत्र का जाप करने से बुद्धि, विद्या और समृद्धि में वृद्धि होती है।

Authored By: स्मिता

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विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी या विनायक कैविथि या विनयगर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेशजी का जन्म हुआ था। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विनायक चतुर्थी हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है। इस वर्ष पौष महीने के दौरान विनायक चतुर्थी 3 जनवरी 2025 को है। यह दिन पूरी तरह से श्रीगणेश की पूजा करने के लिए समर्पित है। इस पवित्र दिन भगवान गणेश की पूजा भक्ति और पवित्रता के साथ की (Vinayaka Chaturthi 2025) जाती है।

कब है पौष माह की विनायक चतुर्थी (Paush Month Vinayaka Chaturthi 2025)

विनायक चतुर्थी का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। यह दिन भक्ति और पवित्रता के साथ भगवान गणेश की पूजा करने के लिए समर्पित है। विनायक चतुर्थी हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विनायक चतुर्थी पौष माह में 3 जनवरी, 2025 को पड़ेगी। विनायक चतुर्थी 3 जनवरी, 2025 को 01:08 बजे से 11:39 रात तक रहेगी।

विनायक चतुर्थी की महत्ता (Vinayaka Chaturthi Significance)

यह दिन पूरी तरह से भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। माना जाता है कि विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयां और बाधा दूर होती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता यानी जीवन से बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश भक्तों के जीवन में सौभाग्य और समृद्धि लाते हैं। ऐसा माना जाता है कि विनायक चतुर्थी पर व्रत रखने से आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

कैसे करें पूजा (Ganesh Puja Rituals)

ज्योतिष और धर्म ज्ञाता डॉ. अनिल शास्त्री बताते हैं, ‘इस दिन सुबह जल्दी उठ कर पूजा कक्ष सहित अपने पूरे घर की सफाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद पवित्र स्नान करना चाहिए। भक्तगण पूजा स्थल पर सभी भगवान के विग्रह को जल आदि से पवित्र कर लें। गणपति जी की मूर्ति के सामने दीया जला कर उनके प्रति सबसे पहले आभार प्रकट करें। फूल और प्रसाद चढ़ाकर मन से श्रीगणेश की प्रार्थना करें।’

मंत्र और स्तोत्र का पाठ (Mantra and Stotra Chanting)

डॉ. अनिल शास्त्री के अनुसार, विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विशेष मंत्र और स्तोत्र का पाठ किया जाता है। ये मंत्र हैं- ॐ श्री गणेशाय नमः..!! . ॐ गं गणपतये नमः..!! ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरुमाये देव सर्व कार्येषु सर्वदा..!! यह गणेश जी का प्रिय मंत्र है।

सकारात्मक विचारों की ऊर्जा के साथ उपवास (Positive Energy of Fast)

विनायक चतुर्थी के दिन भक्तगण व्रत और उपवास भी रख सकते हैं। उपवास करने से मन सकारात्मक विचारों की ऊर्जा से भरा रहता है और पूजा करने के दौरान मन नहीं भटक सकता है। यदि श्रद्धालु चाहें, तो शाम ढलने के बाद अन्न ग्रहण कर सकते हैं। यदि फल के साथ उपवास करना चाहते हैं, तो फलाहार पर भी रहां जा सकता है। शाम को भगवान गणेश की पूजा करने के बाद उपवास तोड़ा जा सकता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या रोजमर्रा की कोई जरूरी चीज दान की जा सकती है।

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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