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क्या है एस्मा कानून (ESMA) और क्यों हरियाणा में इसे लगाया गया? जानें इसके अंतर्गत सजा का प्रावधान
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Wednesday, December 10, 2025
Last Updated On: Wednesday, December 10, 2025
हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगीं, जिसके बाद हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ESMA लागू कर दिया. आखिर यह कानून क्या है, क्यों लगाया जाता है और इसके तहत कैसी सजा का प्रावधान होता है, यहां जानें पूरी जानकारी विस्तार से.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Wednesday, December 10, 2025
हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों और सरकार के बीच तनातनी एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है. दूसरे दिन भी जारी हड़ताल ने कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया. ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक आम मरीजों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. इसी बीच सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम यानी ESMA लागू कर दिया, जिससे अगले छह महीनों तक हड़ताल पर रोक लग गई है.
लेकिन सवाल यह है कि ESMA आखिर है क्या? यह कब लगाया जाता है? इसके तहत सजा का प्रावधान क्या है? और हरियाणा की मौजूदा स्थिति में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इस रिपोर्ट में आपको इसी कानून से जुड़ी हर ज़रूरी जानकारी आसान शब्दों में मिलेगी.
आमरण अनशन की भी तैयारी
एचसीएमएसए ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. संगठन का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, सरकारी अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी समेत सभी सेवाएं ठप रहेंगी. बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की भी तैयारी है.
इधर, देर शाम कुरुक्षेत्र के डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली. सरकार और एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती रोकने पर सहमति बन गई है. लेकिन एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) पर अभी भी मतभेद बना हुआ है. यही मुद्दा विवाद को और बढ़ा रहा है.
क्या है एस्मा कानून और क्यों लगाया गया?
एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ESMA) साल 1968 में संसद ने बनाया था. इसका मकसद उन सेवाओं को बिना बाधा जारी रखना है जो आम नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन के लिए जरूरी मानी जाती हैं. यह कानून तब लागू किया जाता है जब किसी जरूरी विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएं और सरकारी अपील के बाद भी काम पर लौटने से इनकार कर दें.
किसी राज्य में अगर डॉक्टर, बिजली कर्मचारी, परिवहन या दूसरे अहम विभाग काम बंद कर दें, तो सरकार एस्मा लगा सकती है. कार्रवाई से पहले कर्मचारियों को अखबार या किसी आधिकारिक माध्यम से सूचना दी जाती है. एस्मा शुरुआत में अधिकतम 6 महीने के लिए लागू होता है. जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार इसकी अवधि बढ़ा सकती है. हालांकि एक बार में 6 महीने से ज्यादा का आदेश नहीं दिया जा सकता.
जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
हड़ताल का सीधा असर जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिख रहा है. पानीपत में रोजाना करीब 1800 मरीज ओपीडी में आते हैं. लेकिन हड़ताल के दौरान यह संख्या घटकर सिर्फ 1000 रह गई. करनाल सिविल अस्पताल में ओपीडी 800 पर आ गई है.
यमुनानगर की स्थिति भी चिंताजनक है. यहां लगभग 2000 मरीज अस्पताल पहुंचे, लेकिन 62 डॉक्टर हड़ताल पर रहे. इलाज न मिलने पर मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है. इससे गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है. कई परिवार इलाज के खर्च को लेकर परेशान हैं. लाइनें लंबी हैं, डॉक्टर कम हैं और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हालात धीरे-धीरे गंभीर होते जा रहे हैं.
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